राजस्थान के इस गांव की मिट्टी से बने खिलौने अमेरिका और फ्रांस तक बना रहे अपनी पहचान…जानिए इसकी खासियत

Last Updated:November 04, 2025, 18:15 IST
नागौर जिले के छोटे से गांव बू-नरावता ने अपनी मिट्टी से बने हस्तनिर्मित खिलौनों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है. पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरागत कला में गांव के कारीगर मिट्टी को आकार देकर रंग-बिरंगे घोड़े, ऊंट, हांडी और पारंपरिक राजस्थानी पात्र बनाते हैं. अब ये खिलौने सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि सजावट और कलाकृति के रूप में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और दुबई तक पहुंच रहे हैं.
नागौर. राजस्थान में नागौर जिले की मूंडवा पंचायत समिति के छोटे से गांव बू-नरावता आज अपनी अनोखी पहचान के लिए जाना जाता है. इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यहां की मिट्टी से बने हस्तनिर्मित खिलौने हैं, जो न केवल राजस्थान बल्कि देश के कई हिस्सों में और अब विदेशों तक अपनी जगह बना चुके हैं. यहां के कारीगर पीढ़ियों से इस परंपरागत कला को संजोए हुए हैं. खिलौनों की खूबसूरती और बारीकी से की गई कारीगरी हर किसी को आकर्षित करती है.
गांव की मिट्टी में विशेष प्रकार के खनिज तत्व और चिकनाहट पाई जाती है, जिससे बने खिलौने बेहद मजबूत और टिकाऊ होते हैं. इन्हें हाथों से आकार देकर और प्राकृतिक रंगों से सजाकर तैयार किया जाता है. ये खिलौने केवल बच्चों के लिए नहीं, बल्कि सजावट के सामान और कलाकृति के तौर पर भी विदेशों में पसंद किए जा रहे हैं. जोधपुर के रास्ते इन खिलौनों का निर्यात अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और दुबई जैसे देशों में किया जा रहा है.
ऑनलाइन माध्यमों पर खिलौने बेच रहे कारीगरकारीगरों के अनुसार, पहले ये खिलौने सिर्फ स्थानीय मेलों और आसपास के बाजारों में बेचे जाते थे, लेकिन अब ऑनलाइन माध्यमों और निर्यातकों के सहयोग से इनकी मांग कई गुना बढ़ चुकी है. मिट्टी के घोड़े, ऊंट, हांडी, ढोलक, और पारंपरिक राजस्थानी पात्रों के स्वरूप में बने ये खिलौने राजस्थान की लोकसंस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाते हैं. गांव की सरपंच संतु देवी का कहना है कि गांव की इस कला को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए अब पंचायत स्तर पर कारीगरों को प्रशिक्षण और विपणन के साधन उपलब्ध करवाने की योजना है.
मिट्टी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहरायाउन्होंने बताया कि मिट्टी के खिलौने न केवल आजीविका का साधन हैं, बल्कि ग्रामीण परंपरा और कला-संस्कृति की पहचान भी हैं. आज बू-नरावता गांव का नाम उन चुनिंदा गांवों में शामिल है, जिन्होंने अपनी मिट्टी से ही अपनी पहचान बनाई है. यहां की कला ने यह साबित किया है कि ग्रामीण भारत की परंपरागत हस्तकला न केवल समय के साथ जीवित है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहरा रही है. सरपंच संतु देवी का कहना है कि अब इस कला को सीखने के लिए आसपास के लोग भी आ रहे हैं. गांव में मिट्टी के खिलौनों के साथ-साथ मिट्टी के बर्तन भी बनाए जाते हैं, जिनकी आसपास के क्षेत्र में भी भारी डिमांड है.
Monali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
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Location :
Nagaur,Rajasthan
First Published :
November 04, 2025, 18:15 IST
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नागौर के बू-नरावता गांव के मिट्टी के खिलौने विदेशों में हो रहे लोकप्रिय



