सरकारी नौकरी नहीं मिली तो बदली राह! सीकर के दंपति ने शुरू की किन्नू बागवानी, अब सालाना लाखों में कमा रहे मुनाफा

सीकर. कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो राह खुद बन जाती है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है सीकर के कोलीड़ा गांव के युवा किसान अक्षय कुमार ढाका और उनकी पत्नी पूजा ने. एमए और बीएड की डिग्री लेने के बाद भी जब अक्षय को सरकारी नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने निराश होने के बजाय खेती में नवाचार का रास्ता चुना. आज वही निर्णय उन्हें सालाना 10 लाख रुपए से ज्यादा का मुनाफा दिला रहा है.
अक्षय बताते हैं कि किसान परिवार से होने के कारण उनकी रूचि खेती में हमेशा से अधिक थी. साल 2017 में दोस्तों के साथ पंजाब टूर के दौरान जब किन्नू के विशाल और हरे-भरे बाग देखे, तो ठान लिया कि शेखावाटी की मिट्टी में भी ऐसी ही बागवानी संभव है. उन्होंने यह विचार अपनी पत्नी से साझा किया, जिसे पूजा ने पूरी तरह उनका साथ दिया. परिवार के लोग भी बागवानी करने के लिए मान गए.
4 लाख की लगात से 10 बीघा में लगाया किन्नू
अक्षय कुमार ढाका ने बताया कि पंजाब से पूरी जानकारी जुटाने के बाद 2017 में बागवानी की शुरुआत की. उन्होंने 10 बीघा खेत में 1,000 किन्नू के पौधे लगाए. जिनमें लगभग 4 लाख रुपए की लागत आई. पौधे लगाने से पहले गड्ढों को खुला छोड़कर मिट्टी कीट-मुक्त की गई और फिर गोबर की खाद डालकर ऑर्गेनिक विधि से बाग की शुरुआत की. करीब तीन से चार साल मेहनत करने के बाद मार्च 2021 से पौधों पर फल आने लगे और दिसंबर तक पहली फसल तैयार हो गई. पहली उपज से उन्हें करीब 1 लाख रुपए का मुनाफा हुआ.
किन्नू की बागवानी से सालाना 10 लाख कमा रहे मुनाफा
उन्होंने बताया कि, 2022 में किन्नू की उपज उम्मीदों से कहीं अधिक रही और उन्हें 8 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हुई. इसके बाद 2023 में भी बाग में बेहतरीन किस्म के किन्नू तैयार हुए और उम्मीद से अधिक लगभग 10 लाख रुपए का मुनाफा हुआ. इसके बाद 2024 और इस साल भी उन्हें 10 लाख से अधिक का मुनाफा हुआ है. किन्नू यहां प्राकृतिक रूप से पकते हैं, पूरी तरह ऑर्गेनिक खाद का उपयोग होता है और सिंचाई ड्रिप इरीगेशन के जरिए की जाती है. गर्मियों में पेड़ के चारों ओर गड्ढे बनाकर पानी भरकर नमी बरकरार रखी जाती है.
अक्षय की सफलता में पत्नी का अहम योगदान
पारंपरिक खेती के नुकसान और अधिक लागत से परेशान किसान अब बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं. अक्षय बताते हैं कि किन्नू के लिए शुष्क मौसम और मीठे पानी की आवश्यकता होती है, जो सीकर में आसानी से मिल जाता है. नियमित निराई-गुड़ाई और देखभाल से यहां की मिट्टी में बेहतरीन किन्नू तैयार हो जाते हैं. किन्नू में सफलता मिलने के बाद अक्षय ने 10 बीघा में मौसमी और 1 बीघा में नींबू के पौधे भी लगाए है. उनसे भी उत्पादन मिलने लगा है. आज वे कुल 21 बीघा में बागवानी कर रहे हैं. अक्षय की सफलता में उनकी पत्नी पूजा का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. पूजा और अक्षय की मां दोनों सरकारी टीचर हैं, लेकिन इसके बावजूद वे बाग की देखभाल में पूरा सहयोग देती हैं. पूजा ने बताया कि गांव वालों के तानों और सलाहों के बीच उन्होंने अक्षय पर पूरा भरोसा रखा. आज वही निर्णय परिवार के लिए प्रेरणा और कमाई का स्थायी स्रोत बन चुका है.



