टेलीग्राम पर मिला नौकरी का ऑफर, पहुंच गए नरक में! झुंझुनूं के दो युवक थाईलैंड से लौटे, सुनाई दर्दभरी आपबीती

Last Updated:November 09, 2025, 12:04 IST
Jhunjhunu News: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के दो युवक अक्षय मीणा और शैलेष मीणा थाईलैंड में साइबर ठगों के अवैध कैंप में फंस गए थे, जहां उन्हें बंधक बनाकर थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया. 22 दिन तक कैद में रहने के बाद भारत सरकार के हस्तक्षेप से दोनों को 500 अन्य भारतीयों के साथ रेस्क्यू किया गया. युवकों ने बताया कि उन्हें टेलीग्राम पर हाई सैलरी जॉब का लालच देकर ले जाया गया था, लेकिन वहां उनसे जबरन ऑनलाइन फ्रॉड कराया जाता था.
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साइबर फ्रॉड का शिकार हुए झुंझुनूं के दो युवक सकुशल लौटे
झुंझुनूं. राजस्थान के झुंझुनूं जिले के दो युवक थाईलैंड में साइबर ठगों के अवैध कैंप में फंसकर ‘थर्ड डिग्री टॉर्चर’ झेलने के बाद आखिरकार स्वदेश लौट आए हैं. अक्षय मीणा (23) और शैलेष मीणा (25) नामक इन युवकों को टेलीग्राम पर हाई सैलरी वाली नौकरी का लालच देकर थाईलैंड ले जाया गया था, लेकिन वहां पहुंचते ही उनका पासपोर्ट छीन लिया गया और म्यांमार बॉर्डर के पास एक खुफिया साइबर फ्रॉड सेंटर में कैद कर लिया गया. अक्षय और शैलेष ने बताया कि टेलीग्राम पर एक ग्रुप में उन्हें “डेटा एंट्री का काम, 80 हजार से 1.20 लाख रुपये महीना” का ऑफर मिला. एजेंट ने कहा कि वीजा-टिकट सब फ्री है, बस थाईलैंड आ जाओ.
दोनों युवक 18 अक्टूबर को जयपुर से विशेष फ्लाइट लेकर बैंकॉक पहुंचे. वहां से उन्हें बस में बैठाकर 14 घंटे की यात्रा के बाद म्यांमार बॉर्डर के पास ‘माए सोट’ इलाके में ले जाया गया. युवकों ने बताया कि कैंप में 500 से ज्यादा भारतीय कैद थे. सबके पासपोर्ट छीन लिए गए थे. दिन-रात फर्जी वेबसाइट और क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए लोगों को ठगने का काम कराया जाता था. रोजाना 50 लोगों को ठगने का टारगेट होता था. अगर कोई टारगेट पूरा नहीं करता तो उसे बिजली के शॉक, लोहे की रॉड से पिटाई और भूखा रखने की सजा दी जाती थी.
विरोध किया तो इलेक्ट्रिक शॉक दिया
अक्षय ने रोंगटे खड़े कर देने वाली बात बताई कि जब हमने काम करने से मना किया तो नग्न कर बिजली का करंट दिया गया. हाथ-पैर बांधकर 10-10 मिनट तक शॉक देते थे. कई युवक बेहोश हो जाते थे. एक लड़के की तो दोनों किडनी फेल हो गई. शैलेष ने बताया कि सुबह एक रोटी और दोपहर में चावल. अगर टारगेट पूरा नहीं हुआ तो रात का खाना भी छीन लिया जाता था. कैंप के बाहर म्यांमार में बमबारी की आवाजें आती थी. हर पल डर लगता था कि जान नहीं बचेगी.
500 भारतीयों के साथ विशेष विमान से स्वदेश हुई वापसी
भारत सरकार के दखल के बाद थाईलैंड पुलिस ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. 7 नवंबर को 500 से अधिक भारतीयों को विशेष विमान से दिल्ली लाया गया. इनमें झुंझुनूं के अक्षय और शैलेष भी शामिल थे. दिल्ली से जयपुर पहुंचने पर साइबर सेल के एसआई भींवाराम ने दोनों युवकों को परिजनों के सुपुर्द किया.अक्षय के पिता रामस्वरूप मीणा ने कहा कि 22 दिन तक बेटे का कोई अता-पता नहीं था. हमने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी. आज बेटा सकुशल लौटा, जैसे दूसरा जन्म मिल गया है. शैलेष की मां ने आंसुओं के साथ कहा कि मेरा बेटा कह रहा था कि मां मुझे मार देंगे, अब जिन्दा नहीं लौटूंगा.
6 महीने में राजस्थान के 85 युवक झांसे में फंसे
जयपुर साइबर सेल के एसआई भींवाराम ने बताया कि पिछले 6 महीने में राजस्थान से 85 युवक थाईलैंड-म्यांमार के इन कैंपों में फंस चुके हैं. इनमें से 62 को अब तक रेस्क्यू किया जा चुका है. पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि टेलीग्राम, व्हाट्सएप पर आने वाले हाई सैलरी जॉब ऑफर पर भरोसा न करें.अक्षय और शैलेष अब अपने घर में हैं, लेकिन उनकी आंखों में अभी भी उस नरक का खौफ साफ दिखता है. दोनों ने कहा कि जीवन बचाने के लिए भारत सरकार और राजस्थान पुलिस का शुक्रिया. अब किसी को थाईलैंड जाने की सलाह नहीं देंगे.
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट… और पढ़ें
Location :
Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
November 09, 2025, 12:04 IST
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थाईलैंड से सकुशल लौटे झुंझुनूं के दो युवक, सुनाई दिल दहला देने वाली आपबीती



