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ये सड़क नहीं चीन की छाती पर वार है! 16000 फीट की ऊंचाई पर भारत का बेजोड़ प्‍लान, ड्रैगन की होगी बोलती बंद

Last Updated:December 23, 2025, 00:04 IST

China News: भारत ने चीन सीमा पर रणनीतिक बढ़त के लिए उत्तराखंड में बड़ा कदम उठाया है. बीआरओ नीलापानी से 16,134 फीट ऊंचे मूलिंग ला पास तक 32 किलोमीटर लंबी सड़क बनाएगा. फिलहाल इस दुर्गम रास्ते पर पैदल जाने में 5 दिन लगते हैं. सड़क बनने के बाद भारतीय सेना चंद घंटों में तिब्बत बॉर्डर तक पहुंच सकेगी. यह प्रोजेक्ट ड्रैगन की विस्तारवादी चालों को कुचलने और LAC पर भारत की धाक जमाने के लिए गेमचेंजर साबित होगा.

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ये सड़क नहीं चीन की छाती पर वार है! 16000 फीट की ऊंचाई पर भारत का घातक प्‍लानभारत की बड़ी तैयारी.

नई दिल्‍ली. जब सरहद पर सन्नाटा चीरती हुई मशीनों की गूंज सुनाई दे तो समझ लीजिए कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक रुख अपना चुका है. उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ों में जहां अब तक सिर्फ बर्फीली हवाएं राज करती थीं, वहां अब बीआरओ (BRO) ने सड़क बनाने की तैयारी कर ली है. नीलापानी से मूलिंग ला (Muling La) तक बनने वाली यह 32 किलोमीटर की सड़क केवल डामर का टुकड़ा नहीं बल्कि चीन की विस्तारवादी नीतियों के ताबूत में आखिरी कील साबित होने वाली है. 16,134 फीट की ऊंचाई पर भारत 32 किलोमीटर की एक ऐसी सामरिक लकीर खींचने जा रहा है, जिसे पार करना ड्रैगन के लिए नामुमकिन होगा. इससे पांच दिन का सफर महज कुछ घंटों में तय हो सकेगा.

5 दिन का सफर चंद घंटों मेंकेंद्र सरकार ने उत्तराखंड में चीन सीमा (तिब्बत बॉर्डर) तक पहुंच आसान बनाने के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण सड़क परियोजना को हरी झंडी दे दी है. सीएनएन न्‍यूज-18 की खबर के मुताबिक बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) नीलापानी से मूलिंग ला बेस तक 32 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण करेगा. फिलहाल इस पूरे रूट पर सिर्फ एक कच्चा ट्रैक मौजूद है जहां भारतीय जवानों को पैदल गश्त करने में कम से कम 5 दिन का समय लगता है. 16,134 फीट की ऊंचाई पर स्थित मूलिंग ला दर्रा सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, जो सीधे तिब्बत को जोड़ता है. बीआरओ ने इस सड़क के लिए कंसल्टेंसी और तकनीकी सर्वे के दस्तावेज तैयार कर लिए हैं.

चीन की घेरेबंदी पर भारत का जवाबपिछले कुछ वर्षों में चीन ने तिब्बत की तरफ अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहद मजबूत किया है. जवाब में भारत ने भी अब जैसे को तैसा वाली नीति अपना ली है. इस सड़क के निर्माण से भारत को तीन बड़े रणनीतिक फायदे होंगे:

1.      रसद और हथियारों की तत्काल पहुंच: सड़क बनने के बाद जो रास्ता 5 दिन में तय होता था, वह महज कुछ घंटों का रह जाएगा. इससे संकट की स्थिति में भारी तोपें और सेना की टुकड़ियां मिनटों में तैनात की जा सकेंगी.

2.      ड्रैगन की चालबाजी पर नजर: मूलिंग ला बेस पर भारत की मजबूत पकड़ का मतलब है कि चीनी सेना की हर हलचल भारतीय रडार और जवानों की सीधी नजर में होगी.

3.      शीतकालीन सुरक्षा: सर्दियों में जब बर्फबारी के कारण संपर्क कट जाता है, यह पक्की सड़क साल के अधिकतम समय तक सीमा को सक्रिय रखने में मदद करेगी.

चीन अक्सर भारतीय सीमा के पास ‘गांव’ बसाकर या सड़कें बनाकर दबाव बनाने की कोशिश करता है, लेकिन उत्तराखंड में भारत का यह मेगा प्रोजेक्ट ड्रैगन को यह बताने के लिए काफी है कि अब हिमालय में भारत का पलड़ा भारी है. यह सड़क न केवल कनेक्टिविटी सुधारेगी बल्कि बीजिंग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उसकी विस्तारवादी सोच अब भारतीय पहाड़ों से टकराकर चूर-चूर हो जाएगी.

About the AuthorSandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

First Published :

December 23, 2025, 00:00 IST

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