न मिटेंगे, न बहेंगे… बाड़मेर में विराजे 520 किलो के पत्थर वाले गणपति, ‘पोस्टर म्यूजियम’ बना गणेश पंडाल

Last Updated:September 18, 2026, 13:34 IST
Barmer Ganesh Utsav: बाड़मेर के जुनी चौकी पाड़ा में आजाद युवा ग्रुप द्वारा गणेश उत्सव पर अनूठी पहल की गई है. यहां 520 किलो वजनी पत्थर की गणेश प्रतिमा विराजित की गई है, जिसे विसर्जन के समय स्नान कराकर सुरक्षित रखा जाता है. इससे PoP के नुकसान से पर्यावरण को बचाया जा रहा है. इसके अलावा पंडाल को ‘पोस्टर म्यूजियम’ की थीम पर सजाया गया है, जिसमें 12 ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और भगवान के अवतारों के पोस्टर लगाए गए हैं ताकि लोग सनातन धर्म और संस्कृति से जुड़ सकें.
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बाड़मेर. गणेश उत्सव के पावन अवसर पर बाड़मेर शहर में भक्ति, कला और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. शहर के प्रमुख गणेश पंडालों में इस बार अलग-अलग थीम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. शहर के जुनी चौकी पाड़ा में ‘आजाद युवा ग्रुप’ की ओर से सजाया गया गणेश पंडाल इस बार शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस पंडाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक खास ‘पोस्टर म्यूजियम’ की थीम पर सजाया गया है, साथ ही यहां प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की जगह करीब 520 किलो वजनी पत्थर के गणपति विराजित किए गए हैं.
आजाद युवा ग्रुप द्वारा पंडाल में चस्पा किए गए अनूठे पोस्टर लोगों को सनातन धर्म और संस्कारों से जोड़ने का काम कर रहे हैं. पंडाल को एक संग्रहालय (म्यूजियम) का रूप दिया गया है, जहां भारत के प्रमुख शक्तिपीठों, 12 ज्योतिर्लिंगों, संपूर्ण शिव परिवार और भगवान के विभिन्न अवतारों को आकर्षक सचित्र पोस्टरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है. पंडाल में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु और युवा गणेश जी के दर्शन के साथ-साथ भारतीय धार्मिक इतिहास और पौराणिक संस्कृति से भी रूबरू हो रहे हैं.
2013 से विराज रहे 520 किलो वजनी पत्थर के गणपतिआजाद युवा ग्रुप की ओर से वर्ष 2005 से लगातार गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा स्थापना की जा रही है. शुरुआत के कुछ वर्षों में यहां परंपरा के अनुसार मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती थी. इसके बाद वर्ष 2013 में जोधपुर के पास सांगली से लाई गई करीब 520 किलो वजनी पत्थर की गणेश प्रतिमा स्थापित की जा रही है. यहां सप्ताह भर तक अनूठे धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है. पंडाल में नियमित रूप से प्रत्येक बुधवार को विशेष आरती और भोग का आयोजन किया जाता है, वहीं प्रतिदिन शाम को दीपोत्सव के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का बड़ा संदेशग्रुप के सदस्य रवि सोनी का कहना है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से बनी मूर्तियों के जलस्रोतों में विसर्जन से पानी दूषित होता है और जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए आजाद युवा ग्रुप ने पत्थर की प्रतिमा स्थापित करने की अनूठी पहल की है. उत्सव के समापन पर इस भारी पत्थर की प्रतिमा को जलस्रोतों में विसर्जित करने के बजाय विधि-विधान से स्नान करवाया जाता है और ‘पुराने सुनारों के वास’ में पूरे आदर के साथ सुरक्षित रख दिया जाता है. इससे प्रतिमा को बार-बार विसर्जित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और धार्मिक परंपरा के निर्वहन के साथ-साथ समाज को पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त संदेश भी मिल रहा है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
September 18, 2026, 13:34 IST



