आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानें स्वास्थ्य लाभ

Last Updated:November 19, 2025, 20:10 IST
कंटकारी एक आयुर्वेदिक औषधि है, जो दशमूल समूह में शामिल है, इसके पौधे के फल, जड़, तना और पत्तियों का उपयोग स्वास्थ्य के लिए किया जाता है. यह श्वसन तंत्र को मजबूत, फेफड़ों की सफाई और कफ नाशक के रूप में लाभकारी है. इसके सेवन से खांसी, दमा, अस्थमा, गले की खराश, पेट और पाचन संबंधी समस्याएं, त्वचा की सूजन और संक्रमण कम होते हैं. कंटकारी का काढ़ा और मिश्रित औषधीय उपाय विशेष रूप से प्रभावी हैं
प्रकृति में अनेक पेड़-पौधे पाए जाते हैं जो मानव शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक होते हैं. ऐसा ही एक पौधा है कंटकारी, जो आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में जाना जाता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार के अनुसार, कंटकारी दशमूल समूह की औषधि है. इसके पौधे में छोटे-छोटे कांटे, पीले रंग के फल और औषधीय सुगंध पाई जाती है. यह प्राचीन काल से ही श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने, फेफड़ों की सफाई करने और कफ नाशक औषधि के रूप में उपयोग में लाई जा रही है. उन्होंने बताया कि इसके फल, जड़, तना और पत्तियां—सभी का आयुर्वेद में उपयोग किया जाता है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर के अनुसार, कंटकारी का काढ़ा सबसे असरदार घरेलू उपाय माना जाता है. लगभग 5 से 6 ग्राम सूखे फल या पत्तियों को एक गिलास पानी में उबालकर आधा रह जाने तक पकाएं. इस काढ़े का सुबह और शाम सेवन करने से पुरानी खांसी, गले की खराश, कफ जमाव और सांस फूलने जैसी समस्याओं में तेज सुधार होता है. यदि इसे शहद के साथ लिया जाए तो यह और भी प्रभावी हो जाता है तथा गला तुरंत साफ महसूस होता है.

इसके अलावा, कंटकारी की जड़ को पीसकर गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द, गैस और पाचन संबंधी समस्याएँ कम होती हैं. इसके पत्तों का पेस्ट बनाकर सूजन, फोड़े या दर्द वाली जगह पर लगाने से सूजन कम होती है और दर्द में तेजी से राहत मिलती है. दमा के रोगियों के लिए कंटकारी, मुलेठी और अदरक का मिश्रित काढ़ा एक प्राकृतिक राहतदायक उपाय है, जो सांस फूलना और छाती में जकड़न कम करता है.
Add as Preferred Source on Google
First Published :
November 19, 2025, 20:10 IST
homerajasthan
आयुर्वेद की शक्तिशाल कंटकारी…अनगिनत है इसके स्वास्थ्य लाभ



