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म्यूचुअल फंड्स में निवेश के 6 गुरुमंत्र: टाटा एसेट मैनेजमेंट से जानें

नई दिल्ली. अगर आप वेल्थ बनाना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी है कि आप लंबे समय तक मार्केट में बने रहें. जल्दी शुरुआत करें और लगातार निवेश बनाए रखें, ताकि आपका पैसा समय के साथ बढ़ता रहे. म्यूचुअल फंड्स इस सफर को आसान बनाते हैं, क्योंकि ये अलग-अलग तरह के निवेश विकल्प देते हैं. एक अच्छा पोर्टफोलियो बनाने के लिए जरूरी है कि आप हर समय मार्केट में मौजूद रहें, चाहे स्थिति जैसी भी हो.

कई निवेशक मार्केट के उतार-चढ़ाव में घबरा कर बाहर निकल जाते हैं, जिससे वे सही मौके खो देते हैं. अगर आप म्यूचुअल फंड्स के जरिए लंबे समय तक निवेश बनाए रखते हैं और अलग-अलग कैटेगरी में बैलेंस बनाते हैं, तो मार्केट के उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है. यही स्ट्रैटेजी असली वेल्थ बनाने की कुंजी है. इस रक्षाबंधन अपनी बहन को सिर्फ पैसे मत दीजिए उसे आर्थिक सुरक्षा का आशीर्वाद भी दीजिए. उसे वो गुरुमंत्र दीजिए जो भविष्य में उसके पास कभी पैसों की कमी नहीं होने देंगे. टाटा एसेट मैनेजमेंट की प्रोडक्ट हेड शैली गंग ने 6 ऐसे गुरुमंत्र दिए हैं जो पैसा बनाने में आपकी बड़ी मदद कर सकते हैं. आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.फ्लेक्सीकैप और मल्टीकैप फंड्स से कोर पोर्टफोलियो बनाएं

मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में कई खास इंडस्ट्रीज हैं, जबकि लार्जकैप फंड्स में ज्यादा लिक्विडिटी होती है, जो मंदी के समय नुकसान कम करती है. अगर आप तय नहीं कर पा रहे कि कब किस फंड में पैसा लगाना है, तो फ्लेक्सीकैप और मल्टीकैप फंड्स सही विकल्प हैं. ये अपने आप अलग-अलग मार्केट कैप में बैलेंस बना देते हैं.

सेक्टर फंड्स रखें सैटेलाइट पोर्टफोलियो में

सेक्टर और थीमैटिक फंड्स से पोर्टफोलियो में यूनिकनेस आती है. ये फंड्स उन सेक्टर्स में निवेश कराते हैं, जिनमें डाइवर्सिफाइड फंड्स में कम एक्सपोजर मिलता है. 2-3 टॉप सेक्टर या थीमैटिक फंड्स चुनें, जो मीडियम और लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न दे सकें.

एक्टिव और पैसिव स्ट्रैटेजी का कॉम्बिनेशन

इंडेक्स फंड्स (पैसिव) और एक्टिव फंड्स का कॉम्बिनेशन पोर्टफोलियो को बैलेंस करता है. एक्टिव फंड्स में फंड मैनेजर स्टॉक्स चुनते हैं, जबकि पैसिव में इंडेक्स के हिसाब से निवेश होता है. दोनों का मिश्रण आपको अलग-अलग मार्केट फेज में बेहतर सुरक्षा और ग्रोथ देता है.

हाइब्रिड फंड्स से वोलैटिलिटी कंट्रोल

मार्केट के उतार-चढ़ाव में बैलेंस्ड एडवांटेज या मल्टी एसेट फंड्स मददगार रहते हैं. ये फंड्स सही समय पर इक्विटी और डेट का बैलेंस बदलते हैं, जिससे निवेशक घबराहट में मार्केट से बाहर नहीं निकलते. ऐसे फंड्स में पैसा लंबे समय तक निवेशित रहता है और सही समय पर ग्रोथ पकड़ पाता है.

फैक्टर स्ट्रैटेजी और सोना-चांदी ईटीएफ भी रखें

मॉमेंटम और क्वालिटी फैक्टर स्ट्रैटेजी वाले फंड्स लंबे समय में इंडेक्स को मात देते हैं. इसके अलावा, पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ भी शामिल करें, क्योंकि इनका कोरिलेशन इक्विटी से कम होता है और ये इन्फ्लेशन व जियो-पॉलिटिकल रिस्क के खिलाफ हेज का काम करते हैं.

यह लेख केवल शैक्षिक और जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसमें व्यक्त विचार संबंधित एक्सपर्ट के निजी विचार हैं. म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश उत्पादों में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित एक्सपर्ट से परामर्श जरूर करें. निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं और पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं देते. इस लेख की सामग्री पर आधारित किसी भी निर्णय के लिए नेटवर्क18 की कोई जिम्मेदारी या जवाबदेही नहीं होगी.

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