सबरीमाला मंदिर में महापाप: भगवान के शरीर से सोना लूटने का था बड़ा प्लान, SIT के खुलासे ने उड़ाए होश

केरल के सबसे बड़े मंदिरों में से एक सबरीमाला में गर्भगृह से सोना चुराने की नापाक कोशिश हुई है. केरल हाईकोर्ट में सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने जो खुलासा किया है, वह हैरान करने वाला है. एसआईटी ने अदालत को बताया कि आरोपियों का मकसद सिर्फ कुछ सोने की प्लेटें चुराना नहीं था, बल्कि उनकी योजना मंदिर के अन्य पवित्र हिस्सों से भी सोना नोच लेने की थी. जिस सोने से भगवान का श्रृंगार होना था, वह लालच की भेंट चढ़ गया. लेकिन धीरे-धीरे पूरा गर्भगृह लूटने का प्लान था.
मंगलवार को जब SIT ने अपनी रिपोर्ट पेश की तो केरल हाईकोर्ट में सन्नाटा पसर गया. जांच एजेंसी ने साफ कहा कि जिन आरोपियों को अब तक पकड़ा गया है, उनकी मंशा बेहद खतरनाक थी. मामला सिर्फ द्वारपालक की मूर्तियों या श्रीकोविल (गर्भगृह) की चौखट तक सीमित नहीं था. SIT ने अदालत में कहा, जांच में पता चला है कि आरोपियों के पास एक बड़ी योजना थी. वे सबरीमाला मंदिर में मौजूद अन्य स्वर्ण-जड़ित कलाकृतियों और प्लेटों को भी उखाड़ना चाहते थे ताकि उनसे सोना निकालकर गबन किया जा सके.
रक्षक बने भक्षक
इस पूरी साजिश में सबसे चौंकाने वाला पहलू अधिकारियों की भूमिका है. SIT ने अदालत के सामने पूर्व त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के अध्यक्ष ए. पद्मकुमार की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया. जांच दल का कहना है कि यह चोरी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं थी. SIT का दावा है कि शुरुआत से लेकर प्लेटों को सौंपने तक, हर मौके पर भयानक गड़बड़ी की गई. आरोप है कि पूर्व TDB अध्यक्ष पद्मकुमार ने जानबूझकर आधिकारिक फाइलों में झूठी एंट्री की.
सबसे बड़ा धोखा क्या था?
SIT के मुताबिक, पद्मकुमार ने जानबूझकर सोने से मढ़ी हुई प्लेटों को फाइलों में सिर्फ ‘तांबे की प्लेटें’ बताकर पेश किया. यह एक सोची-समझी चाल थी ताकि जब सोना गायब हो, तो रिकॉर्ड में यह दिखे ही नहीं कि वहां सोना था. इस तरह उन्होंने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी और अन्य के लिए खजाना लूटने का रास्ता साफ किया.
बेंगलुरु के ‘सीक्रेट मीटिंग’ का राज
साजिश कितनी गहरी थी, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब पिछले साल अक्टूबर में हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा था, तब आरोपी चुपचाप अपनी चालें चल रहे थे. SIT ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) का हवाला देते हुए खुलासा किया कि आरोपी गोवर्धन (बल्लारी का जौहरी), पंकज भंडारी (चेन्नई स्थित स्मार्ट क्रिएशंस का CEO) और उन्नीकृष्णन पोट्टी बेंगलुरु में एक गुप्त बैठक के लिए मिले थे.
यह बैठक क्यों हुई थी?
जांच एजेंसी का दावा है कि यह बैठक 2019 में किए गए उनके गुनाह पर पर्दा डालने और सबूतों को छिपाने की रणनीति बनाने के लिए की गई थी. ये लोग कानून की आंखों में धूल झोंकने की पूरी तैयारी कर चुके थे.
कौन हैं इस ‘पाप’ के मुख्य किरदार?
SIT अब तक इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन कहानी के मुख्य पात्रों को जानना जरूरी है:
उन्नीकृष्णन पोट्टी: बेंगलुरु का यह व्यवसायी इस पूरे मामले का ‘मास्टरमाइंड’ और मुख्य आरोपी बताया जा रहा है. SIT का कहना है कि इसी व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं.
ए. पद्मकुमार: पूर्व TDB अध्यक्ष, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर सोने को तांबा बताकर लूट का रास्ता आसान किया.
रोड्डम पांडुरंगैया नागा गोवर्धन: कर्नाटक के बल्लारी का एक जौहरी. SIT के अनुसार, इसका काम सोने को ठिकाने लगाना और साजिश में सक्रिय भूमिका निभाना था.
पंकज भंडारी: चेन्नई की फर्म ‘स्मार्ट क्रिएशंस’ का CEO. इस कंपनी को मंदिर की कलाकृतियों पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग (सोने की परत चढ़ाने) का काम सौंपा गया था, लेकिन आरोप है कि इन्होंने ‘दुर्भावनापूर्ण इरादे’ से सोने का गबन करने की साजिश रची.
SIT का क्या दावा
SIT ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि गोवर्धन, पंकज भंडारी, पोट्टी और अन्य आरोपियों ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से मंदिर और उसके आसपास तांबे की प्लेटों पर चढ़े सोने का आपराधिक गबन करने के लिए एक आपराधिक साजिश रची. जांच एजेंसी ने कहा, जांच के दौरान यह पाया गया कि ये सभी आपराधिक गतिविधियां एक बड़ी साजिश और एक संगठित अपराध का हिस्सा थीं. उनका मकसद सिर्फ एक बार की चोरी नहीं था, बल्कि वे मंदिर के एक-एक हिस्से को निशाना बनाने की फिराक में थे.
हाईकोर्ट का सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए, केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को SIT को जांच पूरी करने के लिए छह सप्ताह का और समय दे दिया है. वहीं, SIT के कड़े विरोध के बाद अदालत ने ए. पद्मकुमार और गोवर्धन की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 8 जनवरी तक के लिए टाल दी है. SIT ने तर्क दिया कि अगर पद्मकुमार को जमानत दी गई, तो यह जांच को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि उन्होंने अपने पद पर रहते हुए जानबूझकर ऐसे दस्तावेज तैयार किए जिससे TDB को अपूरणीय वित्तीय नुकसान हुआ और उसकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई. अब सबकी निगाहें 8 जनवरी की सुनवाई और SIT की आगे की जांच पर टिकी हैं. क्या भगवान अयप्पा के खजाने के लुटेरों को उनके किए की सजा मिलेगी? या फिर फाइलों में ‘सोने’ को ‘तांबा’ बनाने वाले ये शातिर खिलाड़ी बच निकलेंगे? फिलहाल, SIT की रिपोर्ट ने यह तो साबित कर दिया है कि सबरीमाला के पवित्र सोपानों के पीछे एक बहुत ही काली और गंदी साजिश रची गई थी.



