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इस युवक के पास है ₹150 और ₹200 के दुर्लभ सिक्के, संग्रहालय में है संरक्षित, भारत सरकार ने किया था जारी

Last Updated:December 05, 2025, 13:04 IST

धौलपुर न्यूज: धौलपुर के संग्रहकर्ता अजय गर्ग के निजी संग्रहालय में दो दुर्लभ स्मारक सिक्के रखे हैं. महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर जारी ₹200 का सिक्का और आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ पर जारी ₹150 का सिक्का है. ₹150 वाले सिक्के पर पहली बार गायत्री मंत्र उकेरा गया है, जबकि ₹200 का सिक्का दयानंद सरस्वती के जीवन और राष्ट्रजागरण को समर्पित है. अजय गर्ग का कहना है कि ये सिक्के सिर्फ धातु नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक है. यह संग्रहालय दुर्लभ मुद्राओं और टिकटों के कारण देशभर में चर्चित है.

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सचिन शर्मा/धौलपुर: राजस्थान के धौलपुर में मुद्रा एवं डाक टिकट संग्रहकर्ता अजय गर्ग के निजी संग्रहालय में दो अनमोल खजाने रखे हैं. भारत सरकार द्वारा जारी महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर ₹200 का स्मारक सिक्का और आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ पर ₹150 का विशेष स्मारक सिक्का. ये दोनों सिक्के न सिर्फ संग्रहकर्ताओं के लिए दुर्लभ हैं, बल्कि देश की आध्यात्मिक-सामाजिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले जीते-जागते दस्तावेज भी हैं.

₹150 का सिक्का आर्य समाज के सुधारवादी आंदोलनों, अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष और समाज में वैदिक जागृति की भावना को समर्पित है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी भारतीय सिक्के पर पहली बार गायत्री मंत्र देवनागरी लिपि में अंकित किया गया है. एक तरफ अशोक स्तंभ और ‘सत्यमेव जयते’ है, तो दूसरी तरफ पूरा गायत्री मंत्र है. वहीं ₹200 का सिक्का महर्षि दयानंद सरस्वती के त्याग, तपस्या और राष्ट्रजागरण के जीवन को सलाम करता है. दोनों सिक्कों में स्वामीजी की छवि और आर्य समाज का प्रतीक चिह्न खूबसूरती से उकेरा गया है.

सिक्के सिर्फ धातु के टुकड़े नहीं हमारी सांस्कृतिक धरोहर है

धौलपुर के रहने वाले अजय गर्ग कहते हैं कि इन सिक्कों को जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा. आर्य समाज ने भारतीय समाज को कुरीतियों से मुक्त कर शिक्षा, समानता और स्वाभिमान की अलख जगाई. अजय गर्ग ने बताया कि ये सिक्के सिर्फ धातु के टुकड़े नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर के जीवंत प्रतीक हैं. गायत्री मंत्र वाला सिक्का तो अपने आप में इतिहास रच रहा है. आने वाली पीढ़ियां इन्हें देखकर वैदिक चिंतन और सुधार आंदोलन से जुड़ेंगी.

संग्रहालय दुर्लभ मुद्राओं और डाक टिकटों के लिए प्रसिद्ध है

सिक्के जारी होते ही देशभर के संग्रहकर्ताओं में हलचल मच गई थी. अजय गर्ग का संग्रहालय पहले से ही कई दुर्लभ मुद्राओं और डाक टिकटों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन ये दोनों स्मारक सिक्के अब इसकी शान बढ़ा रहे हैं. उनके मुताबिक ऐसे सिक्के न सिर्फ संग्रह की शोभा हैं, बल्कि भावी पीढ़ी को भारतीय दर्शन और सुधार आंदोलनों की याद भी दिलाते रहेंगे.धौलपुर का यह छोटा-सा संग्रहालय अब आर्य समाज और महर्षि दयानंद के अनुयायियों के लिए तीर्थस्थल सरीखा बन गया है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

Location :

Dhaulpur,Rajasthan

First Published :

December 05, 2025, 13:03 IST

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इस युवक के पास है ₹150 और ₹200 के दुर्लभ सिक्के, संग्रहालय में है संरक्षित

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