मशीन नहीं, हाथों का हुनर है पहचान, चतेरा परिवार पीढ़ियों से बना रहा लक्ष्मी पूजन के चित्र, दिवाली पर बढ़ी डिमांड

Last Updated:November 04, 2026, 15:02 IST
Karauli News: करौली में बनने वाले लक्ष्मी पूजन के इन हस्तनिर्मित चित्रों को आज भी पुराने लोग सबसे ज्यादा मान्यता देते हैं. दिवाली पर बाजारों में इनकी जमकर मांग रहती है. इन्हें बनाने वाले स्थानीय चित्रकार दिनेश कुमार शर्मा बताते हैं कि इन चित्रों में साक्षात मां लक्ष्मी का वास होता है.
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करौली. दीपावली के पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है. हिंदू धर्म के इस सबसे बड़े त्योहार पर लक्ष्मी पूजन के चित्रों की सबसे ज्यादा मांग रहती है. करौली में एक परिवार ऐसा है, जो रियासतकाल से हस्तनिर्मित लक्ष्मी पूजन के चित्र बनाता आ रहा है. शुद्ध रंगों से तैयार होने वाले इन चित्रों की मांग दिवाली पर करौली में आज भी सबसे ज्यादा रहती है. ये चित्र देशभर में कई जगह भेजे जाते हैं. सिर्फ करौली में बनने वाले ये चित्र वोकल फॉर लोकल की मिसाल हैं.
करौली में बनने वाले लक्ष्मी पूजन के इन हस्तनिर्मित चित्रों को आज भी पुराने लोग सबसे ज्यादा मान्यता देते हैं. दिवाली पर बाजारों में इनकी जमकर मांग रहती है. इन्हें बनाने वाले स्थानीय चित्रकार दिनेश कुमार शर्मा बताते हैं कि इन चित्रों में साक्षात मां लक्ष्मी का वास होता है. यही वजह है कि लोग दिवाली पर इन्हें सबसे ज्यादा पसंद करते हैं.
मांग इतनी कि नहीं हो पाती पूर्तिकरौली में लक्ष्मी पूजन के इन हस्तनिर्मित चित्रों को केवल स्थानीय चतेरा परिवार ही तैयार करता है. इस परिवार की इन चित्रों को बनाते हुए कई पीढ़ियां गुजर चुकी हैं. वर्तमान में परिवार के दिनेश कुमार शर्मा इन चित्रों को तैयार कर रहे हैं. वे अब इस पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाने वाले आखिरी कलाकार हैं. उन्होंने लोकल 18 को बताया कि ये चित्र केवल करौली में ही बनाए जाते हैं. दिवाली पर इनकी काफी मांग रहती है, लेकिन मेहनत ज्यादा होने के कारण इनका उत्पादन सीमित ही रह पाता है.
2 महीने में तैयार हो पाते हैं 200 चित्रस्थानीय चित्रकार दिनेश शर्मा बताते हैं कि हस्तनिर्मित लक्ष्मी पूजन के ये चित्र बेहद मेहनत से तैयार होते हैं. दिवाली से करीब दो महीने पहले वे इन्हें बनाना शुरू कर देते हैं. मेहनत इतनी ज्यादा है कि दिवाली तक मुश्किल से 200 चित्र ही तैयार हो पाते हैं. आज बाजार में रेडीमेड लक्ष्मी पूजन के चित्रों का चलन बढ़ने से इनकी मांग जरूर कुछ कम हुई है, लेकिन पुराने लोग आज भी दिवाली पर इन्हीं चित्रों को सबसे ज्यादा मान्यता देते हैं. दिनेश कुमार बताते हैं कि करौली ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी कई लोग ये चित्र खरीदकर ले जाते हैं.
बाजार में 50 से 60 रुपये के आसपास है कीमतहस्तनिर्मित होने के कारण ये चित्र बाजार में रेडीमेड चित्रों की तुलना में थोड़े महंगे होते हैं. यही वजह है कि दिवाली पर इन्हें खरीदने वालों की संख्या सीमित रहती है. वर्तमान में इन हस्तनिर्मित चित्रों की कीमत लगभग 50 से 60 रुपये के आसपास है. इन्हें बनाने वाले चित्रकार दिनेश शर्मा बताते हैं कि रेडीमेड चित्रों की भारी मांग के बावजूद पिछले कई सालों से हस्तनिर्मित चित्रों की मांग भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. पहले जहां वे करीब 100 चित्र तैयार करते थे, वहीं अब लगभग 200 चित्र बना रहे हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Karauli,Rajasthan
First Published :
November 04, 2026, 15:02 IST



