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UCC 2029 rollout timeline। Uniform Civil Code NDA states। 1 फैसला, 18cr मुसलमान… PM ने कौन सा टारगेट सेट किया कि ओवैसी+इंडी फुल फायर हैं

पीएम नरेंद्र मोदी इंडी वालों को चैन से बैठने नहीं देते. आप देखिए अभी ब्रिक्स में जलवा दिखाया तो ये लोग अब तक जल भुन रहे हैं. अब तो पीएम नरेंद्र मोदी वो एजेंडा ला रहे हैं कि इंडी ही नहीं, ओवैसी और दूसरे लोगों की भी नींद उड़ गई है. अभी तो विपक्ष इसी में फंसा था कि नरेंद्र मोदी पता नहीं कब महिला आरक्षण का बिल ले आएं, पता नहीं कब परिसीमन का बिल ले आएं. लेकिन नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को नई टेंशन दे दी है. नरेंद्र मोदी ने अभी से ही 2029 का एजेंडा सेट कर दिया है. और ये एजेंडा है यूनिफॉर्म सिविल कोड का. और इस एजेंडे को पीएम मोदी ग्रैंड लेवल पर एक तरह से पूरे देश में लागू करने वाले हैं. इसके लिए टाइमलाइन सेट हो गई है. इसी बात को लेकर विपक्ष में खलबली मची हुई है.

कांग्रेस अखिलेश से लेकर तेजस्वी और ओवैसी तक…सब मैदान में आ गए हैं. आज आपको बताएंगे कि इधर यूनिफॉर्म सिविल कोड का ऐलान हुआ, उधर कैसे मोदी विरोधियों में हड़कंप मच गया. क्यों अखिलेश यादव सबसे मुखर होकर UCC का विरोध करने लगे. UCC अगर आ गया तो राहुल गांधी और अखिलेश यादव की राजनीति के सामने कौन सी मुसीबत आ जाएगी. आपको ये भी बताएंगे कि UCC को लेकर इंडी में ही नहीं, एनडीए के अंदर भी कैसे उथलपुथल मच गई. इधर ये सब लोग UCC पर माथा पकड़े हुए हैं, उधर ममता बनर्जी की अलग ही टेंशन है. आज आपको इसके बारे में भी बताएंगे कि बंगाल में ममता बनर्जी के साथ क्या नया खेला हो गया.

मोदी-शाह-शुवेंदु ने बंगाल की सबसे हाई प्रोफाइल सीट पर किसे उतार दिया कि ममता का फाइनल पैकअप होने की बातें कही जाने लगी. आज इसके बारे में डिटेल में आपको बताएंगे पहले आप इस सियासी घमासान का एक ट्रेलर देख लीजिए. जब से बीजेपी ने UCC को लेकर अपना प्लान सामने रखा है तब से इंडी में जबरदस्त खलबली मची हुई है. क्योंकि UCC वो मु्द्दा है जो बीजेपी का पुराना वादा है. और जिस तरह से पीएम मोदी ने बीजेपी के पुराने पुराने वादे पूरे किए हैं. उससे इंडी इस टेंशन में है कि पीएम मोदी तो इसे लागू करके ही मानेंगे.

आप देखिए कि बीजेपी ने राम मंदिर का वादा किया था वो पूरा हो गया है. जम्मू-कश्मीर से 370 हटाकर एक देश, एक संविधान वाला वादा पूरा कर दिया है. अब बारी UCC की है. यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड…जिसके तहत शादी, तलाक..परिवार से जुड़े दूसरे सिविल मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था होती है. बीजेपी चाहती है कि साल 2029 से पहले वो UCC के वादे को भी निपटना दे. इसलिए अमित शाह ने इस वादे को पूरा करने के लिए बकायदा एक टाइम लाइन सेट कर दी. अमित शाह ने कह दिया कि 2029 तक NDA शासित 21 राज्यों में इसे लागू कर देंगे

अमित शाह के इसी बयान पर हंगामा मच गया है..सुनिए अमित शाह ने क्या कहा..फिर आपको बताऊंगा कि ओवैसी, कांग्रेस, अखिलेश सब क्या कह रहे हैं. इधर अमित शाह ने UCC की बात की, उधर विपक्ष की लाइन लेंथ बिगड़ गई. सबसे ज्यादा झटका यूपी में अखिलेश यादव को लगा. अखिलेश यादव राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर खुद को सबसे बड़ा हिंदू हितैषी बताकर बीजेपी को घेरने की प्लानिंग में लगे थे. लेकिन बीजेपी ने नए मुद्दे की एंट्री कर दी है, अब अखिलेश यादव अपनी बैचेनी नहीं छिपा पा रहे हैं, विपक्ष के बड़े नेताओं में अखिलेश यादव सबसे पहले UCC के विरोध में मैदान में आ गए

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि

– जनता समझ रही है भाजपा जिस यूसीसी की बात कर रही है दरअसल उसकी Full Form कुछ और है :

– UCC यानी Underground Communal Conspiracy

– आगे अखिलेश ने कहा कि पहले पिछले वादे निभाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ

– नया जुमला न लेकर आओ और न जनता को बहकाओ

– अखिलेश ने लिखा कि 15 लाख खाते में पहुंचाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ

– 2 करोड़ नौकरी दिलवाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ

– सबका साथ कर दिखाओ, यूसीसी फिर बाद में लाओ..

इस तरह अखिलेश यादव ने एक लंबा चौड़ा पोस्ट किया है, अखिलेश यादव UCC को लेकर क्यों बेचैन है ये आपको बताऊं उससे पहले सुनिए UCC को लेकर सपा नेता अबू आजमी क्या कह रहे हैं. अमित शाह ने NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू करने की बात कही है लेकिन सबसे ज्यादा खलबली यूपी में दिख रही है. क्योंकि यूपी में चुनाव आने वाले हैं. अगर बीजेपी यूपी में UCC को पुश करेगी तो अखिलेश यादव फंस जाएंगे.

– क्योंकि मुस्लिम मालौना इस मुद्दे पर मुखर हैं

– मुस्लिम समुदाय अखिलेश यादव का कोर वोट बैंक हैं

– अखिलेश यादव को इस मुद्दे पर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाना होगा

– दूसरी तरफ अखिलेश यादव ये भी चाहते हैं कि PDA के तहत सवर्ण, दलित, पिछड़े भी उनके साथ आ जाएं

– लेकिन UCC के चक्कर में धार्मिक ध्रुवीकरण हुआ तो अखिलेश यादव की मुश्किल बढ़ जाएगी

– यूपी में बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय को UCC से कोई दिक्कत नहीं है

– इसके अलावा यूपी में ओवैसी भी ताल ठोक रहे हैं,वो भी इसे मुद्दे को लेकर मुखर है

– तो अखिलेश यादव के सामने इस मुद्दे पर मुस्लिम वोट बंटने का भी खतरा है

अखिलेश यादव की इस टेंशन के बीच योगी सरकार ने ये कहकर अखिलेश यादव को झटका दे दिया है कि योगी सरकार UCC लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है.सुनिए यूपी सरकार के मंत्री क्या कह रहे हैं. आप देखिए अभी यूपी में UCC लागू नहीं हुआ है. सिर्फ लागू करने की चर्चा हुई है. लेकिन यूपी में इसे लेकर जबरदस्त घमासान शुरू हो गया. इस मुद्दे पर धर्मगुरु भी आमने-सामने आ गए हैं. मुस्लिम मौलाना इसके विरोध में उतर आए हैं, दूसरी तरफ संत समाज से जुड़े लोग इसका स्वागत कर रहे हैं.

इधर यूपी में UCC का मुद्दा गरमा रहा है, उधर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी मैदान में उतरने वाला है. UCC और अलग अलग मुद्दों को लेकर 17 सितंबर को पर्सनल लॉ बोर्ड  जंतर-मंतर पर ‘सेव कॉन्स्टिट्यूशन-सेव शरिया’ आंदोलन की शुरुआत करने वाला है. उधर इस विवाद में असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से इंडी की मुश्किल ओर बढ़ जाएगी. ओवैसी भी इस मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं.

आज ओवैसी भोपाल गए. वहां उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर UCC के मुद्दे पर सवाल उठाए. ओवैसी ने कहा कि मुस्लिमों की धार्मिक आजादी को छीना जा रहा है. ओवैसी कह रहे हैं कि गोवा में UCC लागू करके दिखाओ जबकि गोवा में कई सालों से UCC लागू है. ओवैसी कह रहे हैं कि ये बीजेपी और RSS की मुस्लिमों के खिलाफ साजिश है

– जबकि संविधान के अनुच्छेद 44 में UCC के बारे में कहा गया है कि

– राज्य…भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा.

– सुप्रीम कोर्ट के कई जजमेंट हैं जिसमें संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए UCC को लागू करने की बात कही गई है

– इसी साल मार्च में पैतृक संपत्ति में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी याचिकाएं पर सुनवाई करते हुए

– कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं के समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए यूसीसी प्रभावी रास्ता हो सकता है.

– कोर्ट ने इसे व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद लैंगिक भेदभाव से निपटने का प्रभावी समाधान बताया

– लेकिन कोर्ट सिर्फ UCC को लागू करने पर टिप्पणी कर सकता है, UCC के लिए कानून बनाने का काम तो सरकारें ही करेंगी

– वही हो रहा है, बीजेपी शासित राज्यों में उत्तराखंड पहला राज्य है जहां UCC लागू हो चुका है

– इसमें शादी, तलाक, संपत्ति में जुड़े अधिकार, उत्तराधिकार जैसे मुद्दे पर सभी के लिए कॉमन नियम बनाए गए हैं

– बहुविवाह पर रोक लगाई गई है, शादि के रजिस्ट्रेशन को जरूरी बनाया गया है

– बाद में उत्तराखंड के UCC कानून से मिलते जुलते कानून को गुजरात, असम, एमपी में पास कराया गया

– अभी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, बंगाल में इसे लाने की तैयारी चल रही है

यानी संविधान में UCC को लागू करने का जिक्र है. सुप्रीम कोर्ट को भी मान चुका है कि लैंगिक भेदभाव को हटाने के लिए ये प्रभावी समाधान है लेकिन इंडी वाले इस पर राजनीति करने में लगे हैं सुनिए कांग्रेस के नेता इस पर क्या कह रहे हैं. इंडी वालों को इस बात से भी दिक्कत है कि बीजेपी क्यों अलग-अलग राज्यों में UCC का कानून ला रही है. जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला कह रहे हैं कि अलग-अलग राज्यों में क्यों सीधे संसद में बिल ले आओ.

UCC को लेकर बिहार में भी विवाद हो गया है. NDA के अंदर भी टकराव हो गया है. जेडीयू के नेता श्याम रजक ने कहा दिया था कि बिहार में इसे लागू नहीं होने देंगे. दूसरी तरफ चिराग पासवान भी खुलकर समर्थन नहीं कर रहे. चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि

– भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है.

– हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएं और रीति-रिवाज हैं

– संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है

– लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता – दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है

– प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो

– व्यापक विचार-विमर्श हो – उसके बाद पार्टी अपना मत रखेगी

यानी UCC के मुद्दे पर जेडीयू और चिराग पासवान ने पेंच फंसा दिया है. जबकि जीतनराम मांझी की पार्टी इसके समर्थन में है. हालांकि जब इसे लेकर ज्यादा विवाद हुआ. तो जेडीयू ने अपने स्टैंड को थोड़ा सॉफ्ट करते हुए कहा कि पहले इसका ड्रॉफ्ट आने दीजिए, उसमें कोई दिक्कत लगेगी तो बात करेंगे बेवजह विरोध नहीं करेंगे. दूसरी तरफ बीजेपी कह रही है कि UCC लागू होगा ही.

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