UPI पर MDR शुल्क दीपावली तक टला; जानें व्यापारियों ने खुश होकर सरकार से क्या मांग की?

Last Updated:October 13, 2026, 22:35 IST
UPI MDR Free Postponed Till Diwali: केंद्र सरकार ने UPI पर MDR शुल्क का फैसला दीपावली तक टाला. FORTI और BUVM जैसे व्यापारिक संगठनों ने फैसले का स्वागत किया, लेकिन शुल्क को पूरी तरह हटाने की मांग की है. जारी सर्कुलर के बाद व्यापारियों में इस बात को लेकर राहत है कि शुल्क से जुड़ा फैसला अभी लागू नहीं किया जा रहा है. लेकिन संगठनों ने साफ किया है कि उनकी मांग सिर्फ कुछ समय की राहत तक सीमित नहीं है. वे चाहते हैं कि UPI से होने वाले व्यापारिक भुगतान पर MDR शुल्क को पूरी तरह वापस लिया जाए.
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UPI पर MDR शुल्क दीपावली तक टला
जयपुर. UPI से भुगतान करने वाले व्यापारियों के लिए MDR शुल्क को लेकर केंद्र सरकार ने फिलहाल राहत दी है. इस शुल्क से जुड़े फैसले को दीपावली तक टाल दिया गया है. मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से जारी सर्कुलर के बाद व्यापारिक संगठनों ने निर्णय का स्वागत किया है. हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि सिर्फ दीपावली तक फैसला टालना काफी नहीं है. UPI के व्यापारिक इस्तेमाल पर MDR शुल्क को पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए.
राजस्थान के व्यापारिक संगठन FORTI यानी फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री और भारत उद्योग व्यापार मंडल (BUVM) ने केंद्र के फैसले का स्वागत किया है. दोनों संगठनों का कहना है कि UPI पर MDR शुल्क का असर व्यापारियों के साथ ग्राहकों पर भी पड़ सकता है. इसलिए इस शुल्क को पूरी तरह हटाना व्यापार और उपभोक्ता, दोनों के हित में होगा.
विरोध के बाद दीपावली तक टला फैसलादेशभर में UPI के व्यापारिक इस्तेमाल पर MDR शुल्क लगाए जाने को लेकर विरोध हो रहा था. व्यापारिक संगठनों ने इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति जताई थी. इसी विरोध के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल इस फैसले को दीपावली तक टाल दिया है. मंगलवार को जारी सर्कुलर के बाद व्यापारियों में इस बात को लेकर राहत है कि शुल्क से जुड़ा फैसला अभी लागू नहीं किया जा रहा है. लेकिन संगठनों ने साफ किया है कि उनकी मांग सिर्फ कुछ समय की राहत तक सीमित नहीं है. वे चाहते हैं कि UPI से होने वाले व्यापारिक भुगतान पर MDR शुल्क को पूरी तरह वापस लिया जाए.
2 अक्टूबर को मनाया था ‘नो UPI डे’UPI पर MDR शुल्क के विरोध में 2 अक्टूबर को व्यापारिक संगठनों ने ‘नो UPI डे’ मनाया था. इस अभियान के जरिए व्यापारियों ने शुल्क को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. भारत उद्योग व्यापार मंडल (BUVM) ने भी इस पहल का आह्वान किया था. राजस्थान में FORTI ने भी इस अभियान का समर्थन किया था. व्यापारिक संगठनों का मानना है कि UPI आज कारोबार में भुगतान का एक आम तरीका बन चुका है. छोटी दुकानों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक इसका इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला कारोबारियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है.
FORTI और BUVM ने रखी शुल्क पूरी तरह हटाने की मांगकेंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करने के साथ ही FORTI और भारत उद्योग व्यापार मंडल ने अपनी मांग दोहराई है. FORTI का कहना है कि MDR शुल्क को पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए. संगठनों के मुताबिक, इस तरह के शुल्क का असर केवल व्यापारी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर भी पड़ सकता है. व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि UPI ने भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाया है. ग्राहक अब दुकानों पर नकद पैसे देने के बजाय मोबाइल से भी भुगतान कर सकते हैं. व्यापारियों के लिए भी यह भुगतान का सुविधाजनक तरीका है. ऐसे में इस व्यवस्था पर शुल्क लगाने के बजाय इसे बिना अतिरिक्त बोझ के जारी रखना चाहिए.
फिलहाल राहत, लेकिन स्थायी फैसले का इंतजारMDR शुल्क से जुड़े फैसले को दीपावली तक टाले जाने का व्यापारिक संगठनों ने स्वागत किया है. हालांकि, उनकी मांग है कि सरकार इस मामले में स्थायी समाधान निकाले और शुल्क को पूरी तरह खत्म करे. फिलहाल केंद्र सरकार के सर्कुलर से व्यापारियों को कुछ समय की राहत मिली है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि दीपावली के बाद इस मामले में क्या फैसला लिया जाता है. FORTI और BUVM ने साफ कर दिया है कि वे MDR शुल्क को पूरी तरह हटाए जाने के पक्ष में हैं. उनका कहना है कि इससे व्यापारियों और ग्राहकों, दोनों को फायदा होगा.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
October 13, 2026, 22:35 IST



