US Green Card Halt: Infosys-TCS समेत 8 कंपनियों पर PERM बैन, 1 लाख भारतीय परिवारों पर असर | US Visa News

होमताजा खबरदेश
US में ग्रीन कार्ड पर बैन: PERM सस्पेंशन से ‘गोल्डन केज’ में फंसे 1 लाख भारतीय
Last Updated:October 09, 2026, 02:28 IST
अमेरिका में ग्रीन कार्ड नियमों में हुए बड़े बदलाव ने एक लाख से ज्यादा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को संकट में डाल दिया है. ट्रंप प्रशासन ने इन्फोसिस और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों को पर्म प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है. इससे एच-1बी वीजा पर काम कर रहे भारतीयों की परमानेंट रेजीडेंसी प्रक्रिया रुक गई है. इस कड़े फैसले से भारतीय परिवारों के भविष्य और उनके करियर पर गहरा असर पड़ा है.Infosys-TCS समेत 8 कंपनियों पर PERM बैन, 1 लाख भारतीय परिवारों पर असर. (AP Photo)
नई दिल्ली: अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव ने एक लाख से ज्यादा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को परेशानी में डाल दिया है. फेडरल अथॉरिटीज ने इन्फोसिस और टीसीएस समेत कई प्रमुख कंपनियों को पर्म एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है. लेबर सेक्रेटरी ने इन दिग्गज कंपनियों पर वीजा धोखाधड़ी और लेबर सर्टिफिकेशन प्रोसेस के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. इस वजह से एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हजारों प्रोफेशनल्स के लिए परमानेंट रेजीडेंसी का रास्ता अचानक बंद हो गया है. यह फैसला मुख्य रूप से अमेरिकी वर्कर्स के अधिकारों को बचाने के लिए लिया गया है. यह बैन माइक्रोसॉफ्ट और अडोबी पर भी लागू हुआ है.
माइक्रोसॉफ्ट ने H-1B फ्रॉड के आरोपों को नकारा, कहा- 80% आवेदन मौजूदा कर्मचारियों के लिए
माइक्रोसॉफ्ट ने H-1B वीजा सिस्टम के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज किया है. कंपनी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में दाखिल करीब 6,000 H-1B आवेदनों में 80% मौजूदा कर्मचारियों के स्टेटस बढ़ाने या बदलने के लिए थे. कंपनी के मुताबिक इन आवेदनों का इस्तेमाल नए लोगों को नौकरी देने के लिए नहीं किया गया. बाकी आवेदन ऐसे कर्मचारियों के लिए थे जो पहले से अमेरिका में कानूनी रूप से रह रहे थे और माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े. कंपनी ने कहा कि ये कर्मचारी उसके अमेरिकी वर्कफोर्स का करीब 1% हैं. यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस ऐलान के कुछ घंटे बाद आया जिसमें माइक्रोसॉफ्ट को विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया वाले एक सरकारी कार्यक्रम से निलंबित करने की बात कही गई थी.
‘गोल्डन केज’ में कैसे फंस गए हजारों भारतीय टेक वर्कर्स?
टेक परिवारों के लिए यह रोक एक जाल जैसी बन गई है. अमेरिकी नियमों के तहत लीगल स्टेटस बनाए रखने के लिए स्पॉन्सर करने वाली कंपनी के साथ रोजगार जरूरी है. सस्पेंशन के कारण कंपनियां नए पर्म एप्लिकेशन फाइल नहीं कर सकती हैं. पेंडिंग सर्टिफिकेशन भी आगे नहीं बढ़ेंगे. इससे ग्रीन कार्ड की लाइन वहीं रुक गई है. एच-4 वीजा वाले जीवनसाथियों के वर्क ऑथराइजेशन पर खतरा मंडराने लगा है. उम्र पूरी कर रहे बच्चों को डिपोर्टेशन का डर सता रहा है.
ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार को नए नियमों का ऐलान किया. ग्रीन कार्ड की राह हुई और मुश्किल. (AP Photo)
ग्रीन कार्ड बैन से आर्थिक तंगी और करियर पर क्या पड़ेगा असर?
इस बैन का आर्थिक असर सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने वाला है. फंसी हुई ग्रीन कार्ड एप्लिकेशन वाले टेक वर्कर्स आसानी से कंपनियां नहीं बदल सकते. वे नया प्रमोशन या टेक्निकल रोल भी स्वीकार नहीं कर सकते. ऐसा करने पर उनके कई सालों के फाइलिंग टाइमलाइन को रीसेट करना पड़ेगा. ये इंजीनियर्स अपने मौजूदा रोल्स में लॉक हो गए हैं. परिवारों के लिए घर खरीदना या बच्चों की शिक्षा का फैसला लेना रिस्की हो गया है. उनका भविष्य अब प्रशासनिक अपीलों पर निर्भर है.
आईटी सेक्टर पर इस बड़े फैसले के बाद अब आगे क्या विकल्प बचते हैं?
यह बैन इमिग्रेशन पॉलिसी को सख्ती से लागू करने की दिशा में बड़ा कदम है. इससे ऑफशोर कंसल्टिंग स्ट्रक्चर पर अमेरिकी सरकार की निगरानी काफी बढ़ गई है. प्रभावित आईटी कंपनियां अब इसके कानूनी उपाय तलाश रही हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय टेक टैलेंट अब दूसरे देशों का रुख कर सकता है. इसके साथ ही भारत के टेक इकोसिस्टम में वापसी की दिलचस्पी भी बढ़ रही है. ग्रीन कार्ड रास्तों पर निर्भर रहना अब रिस्की हो गया है.
About the Authorदीपक वर्माDeputy News Editor
दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
New Delhi,Delhi
First Published :
October 08, 2026, 23:54 IST



