चांदनी चौक में QR कोड से साइबर ठगी, Vettaiyan फिल्म से प्रेरणा

Last Updated:December 23, 2025, 18:33 IST
दिल्ली के चांदनी चौक में लहंगे की खरीदारी के दौरान एक महिला से 1.40 लाख की डिजिटल ठगी हुई. महिला ने दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन किया, लेकिन पैसा दुकानदार के बजाय जयपुर के जालसाज मनीष वर्मा के पास पहुंचा. 19 साल के आरोपी ने रजनीकांत की फिल्म ‘वेट्टैयन’ से प्रेरित होकर मोबाइल ऐप के जरिए असली क्यूआर कोड एडिट किया था. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर 100 से ज्यादा फर्जी कोड बरामद किए हैं.
पुलिस ने आरोपी को धर दबोचा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली का सबसे व्यस्त बाजार चांदनी चौक में शादियों की खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ती है. वहां डिजिटल ठगी के एक नए और बेहद खतरनाक तरीके ने सबको सन्न कर दिया है. 13 दिसंबर 2025 की दोपहर जब एक महिला अपनी शादी के लिए ढाई लाख रुपये का कीमती लहंगा खरीदने एक नामी गारमेंट शॉप पहुंची तो उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि दुकान के काउंटर पर रखा QR कोड ही उसकी गाढ़ी कमाई पर डाका डाल देगा. जैसे ही महिला ने भुगतान के लिए कोड स्कैन किया, 1 लाख 40 हजार रुपये दुकानदार के खाते के बजाय राजस्थान के एक शातिर जालसाज की जेब में पहुंच गए. यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं बल्कि साउथ इंडियन फिल्म ‘वेट्टैयन’ (Vettaiyan) से प्रेरित एक सोची-समझी साजिश थी, जिसने दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को भी हैरान कर दिया है.
धोखाधड़ी का फिल्म जैसा तरीकाचांदनी चौक की इस नामी दुकान पर जब महिला ने 1 लाख 40 हजार रुपये ट्रांसफर किए तो ट्रांजैक्शन सफल हो गया. लेकिन दुकानदार के खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचा. जांच में पता चला कि गिरफ्तार आरोपी मनीष वर्मा मोबाइल ऐप्स की मदद से असली क्यूआर कोड को बड़ी सफाई से एडिट कर देता था. वह असली कोड के ऊपर अपना बैंक अकाउंट लिंक कर देता था. देखने में यह कोड बिल्कुल असली लगता था लेकिन स्कैन करते ही पैसा सीधे आरोपी के पास पहुंच जाता था.
राजस्थान से आरोपी की गिरफ्तारीसाइबर पुलिस नॉर्थ ने जब ई-एफआईआर दर्ज कर यूपीआई ट्रांजैक्शन की जांच की तो पैसा राजस्थान के जयपुर जिले के एक खाते में पाया गया. दिल्ली पुलिस ने इंटर-स्टेट ऑपरेशन चलाकर 19 साल के मनीष वर्मा को दबोच लिया. उसके मोबाइल की तलाशी ली गई तो पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई. आरोपी के फोन से 100 से ज्यादा एडिट किए गए क्यूआर कोड बरामद हुए.
साउथ फिल्म से मिला आइडियापूछताछ में मनीष ने कबूला कि उसने ठगी का यह हाई-टेक तरीका रजनीकांत स्टारर फिल्म ‘वेट्टैयन’ देखकर सीखा था. वह अकेला ही इस पूरे साइबर फ्रॉड को अंजाम दे रहा था. वह चुपके से दुकानों के बाहर लगे क्यूआर कोड को अपने एडिट किए गए कोड से बदल देता था. पुलिस अब उन अन्य पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है, जो इस 19 साल के मास्टरमाइंड का शिकार बने हैं.
About the AuthorSandeep Gupta
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
First Published :
December 23, 2025, 18:28 IST
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