Rajasthan

Vermicompost Scheme Farmers | Government Subsidy Vermicompost | Vermicompost Unit Grant | Agriculture Subsidy India | Farmer Support Scheme | Organic Farming Subsidy

Last Updated:November 29, 2025, 11:03 IST

Vermicompost Scheme Farmers: सरकार किसानों को ऑर्गेनिक खेती बढ़ाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर वित्तीय सहायता दे रही है. इस योजना के तहत किसान सब्सिडी लेकर अपने खेत में कम लागत में वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया सरल है और किसान ऑनलाइन या कृषि विभाग के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. यह पहल मिट्टी की उर्वरता और आय दोनों बढ़ाने में मददगार है.Agriculture News

सीकर. किसानों और पशुपालकों के लिए अच्छी खबर है. गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के अंतर्गत किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. यह योजना उन किसानों को शामिल किया गया है जिनके पास कम से कम तीन गोवंश उपलब्ध हैं. इन किसानों को सरकार की ओर से वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के निर्माण पर दस हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जाएगी. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा. किसना साथी पोर्टल पर जनाधार, भू-स्वामित्व ई-साइन जमाबंदी और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन किए जा सकते हैं.

Agriculture News

कृषि पर्यवेक्षक अजीत सिंह ने बताया कि इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना और गोवंश के संरक्षण को मजबूती देना है. उन्होंने बताया कि यह लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से जहां मिट्टी की सेहत प्रभावित हो रही थी, वहीं इस योजना के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खाद उत्पादन की ओर प्रेरित किया जा रहा है. वर्मी कम्पोस्ट से न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति में सुधार होता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जिससे बाजार में उत्पादों का मूल्य भी बढ़ता है.

Agriculture News

योजना में वर्मी कम्पोस्ट यूनिट लगाने के लिए किसानों को निर्धारित मानक के अनुसार कंपोस्ट पिट बनाना जरूरी है. इस योजना के तहत पिट 20 फीट लंबी, 3 फीट चौड़ी और 2 फीट गहरी होनी चाहिए. इसमें किसान अपनी सुविधानुसार 10 फीट लंबाई वाले दो अलग-अलग कंपोस्ट बेड भी तैयार कर सकते हैं. वर्मी कम्पोस्ट यूनिट में लम्बाई, चौड़ाई और गहराई तय करने का उद्देश्य जैविक खाद का नियमित उत्पादन सुनिश्चित करना है. इससे खेतों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम हो सके. कम्पोस्ट यूनिट से तैयार होने वाली खाद लंबे समय तक मिट्टी को पोषक तत्व उपलब्ध कराती है.

Add as Preferred Source on Google

Agriculture News

संयुक्त निदेशक कृषि ने बताया कि जैविक खेती को लेकर किसानों में बढ़ती जागरूकता और नवाचारों के कारण अब अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. लगातार रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव सामने आने के बाद जैविक खाद की मांग तेजी से बढ़ी है. विभाग का कहना है कि जैविक पद्धतियों को अपनाने से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि कृषि लागत भी काफी हद तक कम हो जाती है. किसान भी रासायनिक खेती को छोड़कर जैविक खेती की ओर आने कदम बढ़ा रहे हैं. इसमें सरकार का साथ भी उन्हें मिल रहा है.

Agriculture Tips

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि जैविक खाद के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता नहीं होती है. इससे किसानों को बाहर से खाद नहीं खरीदना पड़ता है, जिसे खेती की लागत भी घट जाती है. इसके अलावा वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की संरचना को मजबूत करता है और उसमें मौजूद सूक्ष्मजीवों को पुनर्जीवित करता है, जिसके फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है. जैविक खाद से तैयार उच्च गुणवत्ता वाली फसलों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. इससे किसानों को भी फायदा होता है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि स्थानीय बाजार के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है.

Agriculture Tips

योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व होना भी जरूरी है. वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की लागत राशि का 50 प्रतिशत या अधिकतम 10 हजार रुपए तक सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है. यह सब्सिडी जांच के बाद यूनिट के आकार के अनुसार दी जाएगी. विभाग का मानना है कि वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित होने से किसान लंबे समय तक बिना अतिरिक्त खर्च के प्राकृतिक उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे. यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि किसानों के लिए भी फायदे का सौदा है.

First Published :

November 29, 2025, 11:03 IST

homeagriculture

वर्मी कम्पोस्ट यूनिट लगाने पर सरकार दे रही पैसे! आवेदन की आसान प्रोसेस हुई जार

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj