Virat Kohli Challenge to self।।Virat Kohli Century against West Indies। करियर के आखिरी स्टेज पर विराट का खतरनाक चैलेंज, विंडीज को रौंदने पर कबूला सच

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करियर के आखिरी स्टेज पर विराट का खतरनाक चैलेंज, विंडीज को रौंदने पर कबूला सच
Last Updated:September 27, 2026, 23:05 IST
Virat Kohli Challenge to self: वेस्टइंडीज के खिलाफ ताबड़तोड़ शतक लगाने वाले विराट कोहली का कहना है कि उन्होंने अपने करियर के इस चरण में तेज गति से रन बनाने और खेल का नया वर्जन तलाशने का नया चैलेंज स्वीकार किया है. कम फॉर्मेट खेलने से मिली मानसिक शांति और फिटनेस के दम पर वह बिना दबाव के खुलकर खेल रहे हैं. शुभमन गिल की कप्तानी और उनकी साझेदारी की तारीफ करते हुए कोहली ने युवाओं को मैदान पर पूरी शिद्दत से पसीना बहाने और खेल के प्रति ईमानदार रहने की प्रेरणा दी है.विराट ने मैच विनिंग पारी खेली.
क्रिकेट के इस दौर में जब हर कोई शॉर्टकट और ताबड़तोड़ अंदाज की बात करता है, तब किंग विराट कोहली ने एक ऐसा बयान दे दिया है जो हर युवा खिलाड़ी के दिल को छू लेगा. अपने करियर के इस पड़ाव पर जहां खिलाड़ी संन्यास या आराम के बारे में सोचते हैं, वहीं कोहली ने अपने ऊपर एक नया चैलेंज लिया है. वो है तेज गति से रन बनाना, मैदान पर बिना थके दौड़ना और हर मैच में अपनी फिटनेस का नया स्तर दिखाना. केवल वनडे फॉर्मेट खेलने के बाद अब वह मानसिक रूप से ज्यादा शांत और स्पष्ट महसूस कर रहे हैं. वर्ल्ड कप से ठीक एक साल पहले उनका यह नया रूप और पॉजिटिव एप्रोच टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ा हथियार बनने जा रहा है. आइए जानते हैं वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 गेंदों पर 139 रनों की अजेय पारी खेलने के बाद किंग गोहली ने क्या कहा.
करियर के आखिरी दौर में नया गियरविराट कोहली ने कहा है कि करियर के इस स्टेज पर उनके सामने एक नया चैलेंज है, जो अपनी पारी में एक या दो गियर ऊपर उठाना और तेज गति से खेलना है. उन्होंने बताया कि कम फॉर्मेट खेलने से उन्हें अपने लक्ष्यों को लेकर गजब की क्लेरिटी मिली है, जिससे उन्हें किसी भी तरह का दबाव या एंग्जायटी महसूस नहीं होती. उनके लिए मैदान पर उतरना अब केवल प्रदर्शन का दबाव नहीं बल्कि हर पल का आनंद लेना बन गया है. उनका साफ मानना है कि एक आजाद दिमाग के पीछे एक फिट शरीर का होना सबसे जरूरी है जो उन्हें मैदान पर अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने की ताकत देता है.
फिटनेस, आभार और खेल के प्रति जज्बाकोहली का मानना है कि जब कोई खिलाड़ी अपनी सफलता के शिखर पर होता है तो उसका यह भूल जाना बहुत आसान होता है कि वह कहां से आया था. अपने बचपन से लेकर भारत के लिए खेलने तक के सफर को याद करते हुए वह पूरी तरह कृतज्ञ महसूस करते हैं. उनका कहना है कि अगर किस्मत का साथ न होता तो शायद वह आज इस मुकाम पर नहीं होते. यही वजह है कि मैदान पर उतरने के बाद वह अपना सौ प्रतिशत देना चाहते हैं. चाहे आखिरी ओवरों में बाउंड्री से बाउंड्री लगातार दौड़ना हो या टीम के लिए हर मु मु मुस्तैदी दिखाना हो, वह बिना किसी बहाने के मैदान पर जान झोंक देने में यकीन रखते हैं.
युवा खिलाड़ियों के लिए कोहली की अनमोल सलाहनई पीढ़ी के क्रिकेटर्स को सलाह देते हुए कोहली ने कहा है कि खिलाड़ियों को खेल के मैदान से बाहर की दुनिया या शोर-शराबे के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए. जब आप एक बार मैदान के अंदर कदम रख देते हैं, तो वही आपका सब कुछ होना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एथलीटों को इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि खेल कभी भी खत्म हो सकता है, इसलिए हर मैच को ऐसे खेलें जैसे वही सब कुछ हो. यह निडर मानसिकता ही खिलाड़ियों को जोखिम लेने और अपनी टीम के लिए मैच जिताने का माद्दा देती है.
शुभमन गिल के साथ बेहतरीन ट्यूनिंग और साझेदारीशुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और उनकी लीडरशिप पर बात करते हुए कोहली ने उनकी जमकर तारीफ की है. दुनिया के टॉप ओडीआई बल्लेबाज शुभमन गिल के साथ बल्लेबाजी करते समय उन्हें ज्यादा बात करने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि दोनों को बखूबी पता होता है कि परिस्थिति के अनुसार क्या कदम उठाना है. कोहली का मानना है कि गिल के पास खेल को अलग-अलग परिस्थितियों से जिताने का एकदम सही दृष्टिकोण और विजन है और यही वजह है कि वह टीम की सफलतापूर्वक अगुवाई कर रहे हैं.
About the AuthorSandeep GuptaChief Sub Editor
पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
September 27, 2026, 23:05 IST



