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शरीर में अचानक झटके आना कौन सी बीमारी है? कभी-कभी खुद पर नहीं रहता नियंत्रण, जानिए लक्षण और बचाव

Parkinson Symptoms: कई बार इंसानी शरीर में ऐसी बीमारियां हो जाती हैं, जिनके बारे में लोगों को कम ही जानकारी होती है. इनके लक्षण भी चौंकाने वाले होते हैं. पार्किंसन ऐसी ही बीमारियों में से एक है. जी हां, पार्किंसन एक ब्रेन डिसऑर्डर है. इस बीमारी में अचानक शरीर में झटके लगते हैं. यह समस्या ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है. इस बीमारी में दिमाग की विशिष्ट मस्तिष्क कोशिकाओं में नुकसान होने के कारण मूवमेंट प्रभावित होती है. हाथ-पैरों में कंपन होता रहता है. मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, जिससे कई बार शरीर पर नियंत्रण भी नहीं रहता है. शारीरिक संतुलन बनाने में मुश्किलें आती हैं.

इस तरह की समस्याएं विकसित होने के कारण इसे प्रॉग्रेसिव न्यूरोडीजेनरेटिव डिसऑर्डर भी कहा जाता है. इस बीमारी का कोई परमानेंट इलाज तो नहीं है, किन हेल्दी खानपान और लक्षणों को मैनेज करने में परेशानी को कम किया जा सकता है. अब सवाल है कि आखिर पार्किंसंस के लक्षण क्या हैं? कैसे करें इससे बचाव? आइए जानते हैं इस बारे में-

क्या होता है पार्किंसन रोग

पार्किंसन डॉट ओआरजी की रिपोर्ट के अनुसार, पार्किंसंस रोग (PD)एक न्यूरोडीजेनरेटिव विकार है, जो मुख्य रूप से मस्तिष्क के एक विशिष्ट क्षेत्र में डोपामिन-उत्पादक (डोपामिनर्जिक) न्यूरॉन्स को प्रभावित करता है, जिसे सब्सटांशिया निग्रा कहा जाता है.

पार्किंसन रोग के शुरुआती लक्षण

इसके लक्षणों की बात करें, तो इसके लक्षण आमतौर पर कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होते हैं. रोग की विविधता के कारण लक्षणों का नजर आना अक्सर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होता है. पार्किंसन रोग के लक्षण निम्न हो सकते हैं-

शरीर के अंगों में कंपन: कंपकंपी आना, लगातार अंग में कंपन्न होना या ट्रेमर उस स्थिति को कहते हैं, जब किसी व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध उसके शरीर का कोई हिस्सा हिलने लगता है और खुद ही शांत भी हो जाता है.

उंगलियों में कंपन: ट्रेमर की दिक्कत आमतौर पर हाथों में होती है. इसमें व्यक्ति का हाथ या उंगलियां अचानक कंपकंपाने लगती हैं और कई बार उंगलियां या अंगूठा किसी एक तरफ झुकने या घूम जाने की दिक्कत भी हो सकती है.

गति में सुस्ती: पार्किंसंस के लक्षण हाथ से शुरू होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते रहते हैं. अगर वक्त पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी व्यक्ति के चलने-फिरने की गति को धीमा कर देती है. ऐसी स्थिति में रोगी के कदम पहले की तुलना में छोटे हो जाते हैं.

मसल्स सख्त होना: पार्किंसंस की शुरुआत में शरीर के किसी भी प्रभावित हिस्से की मांसपेशियां सामान्य से अधिक सख्त होने लगती हैं. धीरे-धीरे इनकी ये स्टिफनेस और अधिक बढ़ सकती है. इस स्थिति में व्यक्ति को मसल्स में दर्द की दिक्कत बनी रह सकती है.

बोलने-लिखने में दिक्कत: पार्किंसंस की स्थिति में कई लोगों को स्पीच संबंधी दिक्कतें होने लगती हैं. जैसे, आवाज धीमी होना, बोलते वक्त परेशानी होना, शब्दों को क्लियर न बोल पाना आदि. इस बीमारी से पीड़ितों को कई बार लेखन में भी दिक्कत होती है.

सेक्शुअल डिसफंक्शन: पार्किंसंस रोग से पीड़ितों की सेक्स लाइफ भी प्रभावित होती है. इस बीमारी की स्थिति में सेक्स में रुचि कम हो जाती है या फिर तुरंत स्खलित होने की समस्या हो सकती है. वहीं कुछ लोगों को पूरे शरीर में ही हर समय दर्द बना रह सकता है.

पार्किंसंस से ऐसे करें बचाव
फैमिली हिस्ट्री में यह दिक्कत हो तो ये लोग स्वस्थ जीवन शैली भी नहीं अपना रहे होते हैं.
तनाव से बचें, क्योंकि, अधिक तनाव की स्थिति में बॉडी में हॉर्मोन्स का असंतुलन होता है.
पार्किंसंस रोग से पीड़ितों को अपनी हेल्दी डायट और नियमित योग जरूर करना चाहिए.
ज्यादा से ज्यादा खुश रहना और एरोबिक एक्सर्साइज करके बीमारी से बचाव संभव है.

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