जहां दीवारें बोलती हैं! पत्थरों पर छपे हाथ और बलिदान की कहानी, जानें किस्सा जालोर के सायर पोल का

Last Updated:January 08, 2026, 20:43 IST
Jalore Sayer Pol History : जालोर का सायर पोल वीर नारियों के साहस और बलिदान का प्रतीक है, जहां प्राचीन बालाजी मंदिर आस्था का केंद्र है. यह स्थल इतिहास प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए खास है. इसकी दीवारों पर छपे हाथों के निशान और प्राचीन शिलालेख आज भी सुरक्षित हैं. इन शिलालेखों में उस दौर की घटनाओं और वीरांगनाओं की गाथाओं का उल्लेख मिलता है. यह स्थल न केवल श्रद्धालुओं बल्कि इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है.
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जालौर. जालोर का ऐतिहासिक सायर पोल केवल एक प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि इतिहास, वीरता और आस्था का जीवंत प्रतीक है. यह पोल जालोर की संस्कृति और गौरवशाली अतीत की कहानी को आज भी अपने भीतर समेटे हुए है. कहा जाता है कि इसकी दीवारों पर बने हाथों के निशान जालोर के इतिहास की अमर गाथा को बयां करते हैं. ये निशान उन वीर नारियों के साहस और बलिदान की याद दिलाते हैं, जिन्होंने कठिन समय में अदम्य संकल्प के साथ अपने प्राणों की आहुति देकर इतिहास रच दिया.
सायर पोल वीर नारियों के साहस का प्रतीक माना जाता है. इसकी दीवारों पर छपे हाथों के निशान और प्राचीन शिलालेख आज भी सुरक्षित हैं. इन शिलालेखों में उस दौर की घटनाओं और वीरांगनाओं की गाथाओं का उल्लेख मिलता है. यह स्थल न केवल श्रद्धालुओं बल्कि इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है. यहां पहुंचने वाला हर व्यक्ति उस समय की कठिन परिस्थितियों और त्याग को महसूस कर सकता है.
आस्था का केंद्र बालाजी मंदिरसायर पोल के भीतर एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी बालाजी मंदिर स्थित है. यह मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है. कार्तिक पूर्णिमा और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा, आरती और भजन संध्या का आयोजन किया जाता है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं. यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि श्रद्धालुओं को मानसिक और आत्मिक शांति भी प्रदान करता है.
स्थानीय लोगों की जुड़ी है गहरी आस्थास्थानीय निवासी श्यामलाल बताते हैं कि यह पोल जालोर की ऐतिहासिक पोलों में से एक है. जालोर में जब जोहर हुआ था, तब वीरांगनाओं ने अपने प्राण त्यागने से पहले यहां अपने हाथों के निशान छोड़े थे. आज भी ये निशान पोल की दीवारों पर साफ दिखाई देते हैं. उनके अनुसार पोल के अंदर स्थित बालाजी का मंदिर भी बहुत प्राचीन और चमत्कारी है, जो पूरे क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
इतिहास और आस्था का अनोखा संगमजालोर का सायर पोल और बालाजी मंदिर यह संदेश देता है कि इतिहास केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि हमारे आसपास मौजूद स्मारकों और आस्था स्थलों में भी जीवित रहता है. यह स्थल इतिहास प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए एक अनोखा अनुभव प्रस्तुत करता है और जालोर की गौरवशाली विरासत को सहेज कर रखे हुए है.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Jalor,Rajasthan
First Published :
January 08, 2026, 20:43 IST
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जहां दीवारें बोलती हैं! पत्थरों पर छपे हाथ, बलिदान की कहानी,किस्सा सायर पोल का



