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उदयपुर रेप कांड: पीड़िता का अंडरगारमेंट्स क्यों नहीं ढूंढ पाई राजस्थान पुलिस, शरीर पर कहां-कहां मिले निशान?

Udaipur Rape Investigation@राजस्थान के उदयपुर में 20 दिसंबर की रात एक महिला मैनेजर के साथ चलती कार में क्या हुआ? महिला के शरीर पर कहां-कहां जख्म के निशान मिले? सबसे पहले महिला मैनेजर के शरीर को किसने छुआ? क्या कंपनी के सीईओ जितेश सिसोदिया ने ही रेप किया या गौरव सिरोही ने भी साथ दिया? उस रात कार में गौरव सिरोही की पत्नी शिल्पा सिरोही की क्या भूमिका थी? क्या एक महिला ने दूसरी महिला के कपड़े उतारे? पीड़ित महिला का अंडरगारमेंट्स किसने गायब किया? पुलिस के हाथ लगा डैशकैम क्या अदालत में पर्याप्त सबूत साबित होगा? ये कुछ सवाल हैं जिनका जवाब उदयपुर पुलिस तलाश रही है ताकि अदालत में दोषी को सजा मिल सके. घटना के 9 दिन बाद राजस्थान पुलिस की जांच कहां तक पहुंची? पुलिस की शुरुआती जांच में क्या कंपनी का सीईओ जितेश सिसोदिया ही दोषी पाया गया है या सिरोही दंपत्ति भी बराबर के दोषी हैं?

राजस्थान पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं. 20 दिसंबर की रात हुई इस हैवानियत ने न केवल कॉरपोरेट जगत को शर्मसार किया है, बल्कि पुलिस के सामने साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की एक बड़ी चुनौती भी पेश की है. मामले की जांच कर रही महिला अपराध अनुसंधान सेल की एएसपी माधुरी वर्मा ने बताया कि पुलिस की प्राथमिकता अब उन वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाना है, जिन्हें आरोपियों ने बड़ी चालाकी से मिटाने की कोशिश की है. लेकिन उस रात पीड़िता के गायब कपड़े और सामान अभी तक नहीं मिलना इस केस को गुत्थी सुलझाने में रोड़ा अटका सकता है.

कहां तक पहुंची पुलिस की जांच?

पीड़िता द्वारा 23 दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद से ही उदयपुर पुलिस एक्शन मोड में है. पुलिस ने सबसे पहले उस लग्जरी कार को अपने कब्जे में लिया है, जिसमें इस वारदात को अंजाम दिया गया था. कार के डैशकैम से मिली ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसके साथ कोई छेड़छाड़ न हुई हो. इसके अलावा, पुलिस ने शोभागपुरा स्थित उस होटल के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं, जहां पार्टी हुई थी. फुटेज में पीड़िता को आरोपियों के साथ कार में बैठते हुए देखा गया है, जिससे घटनाक्रम की पुष्टि होती है.

उदयपुर गैंगरेप कांड में पीड़िता का नया खुलासा.

शरीर पर मिले गहरे जख्म

पीड़िता के मेडिकल परीक्षण के बाद जो शुरुआती रिपोर्ट सामने आई है, वह बेहद विचलित करने वाली है. रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स पर गंभीर चोट के निशान और घाव मिले हैं, जो जबरदस्ती किए गए कृत्य की पुष्टि करते हैं. इसके अलावा, उसके हाथों, कंधों और जांघों पर नीले निशान पाए गए हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि पीड़िता ने आरोपियों के चंगुल से छूटने के लिए कड़ा संघर्ष किया था. मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि नशीले पदार्थ के सेवन के कारण पीड़िता पूरी तरह विरोध करने की स्थिति में नहीं थी, फिर भी उसके शरीर पर मिले संघर्ष के निशान वारदात की पुष्टि के लिए अहम कानूनी सबूत हैं. शिल्पा सिरोही औऱ उसके पति गौरव सिरोही की भी डैशकैम में आवाज पकड़ी गई है.

गायब कपड़े और अंडरगारमेंट्स क्यों नहीं मिले?

इस मामले में सबसे रहस्यमयी पहलू पीड़िता के मोजे, कान की बाली और अंडरगारमेंट्स का गायब होना है. पीड़िता ने शिकायत में स्पष्ट कहा है कि जब उसे सुबह होश आया तो ये चीजें उसके पास नहीं थीं. पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत ये कपड़े और गहने गायब किए हैं. जानकारों के मुताबिक, अक्सर बलात्कार के मामलों में आरोपी पीड़िता के अंडरगारमेंट्स और अन्य कपड़े इसलिए ले जाते हैं ताकि उन पर मौजूद सीमेन (Semen), बाल या डीएनए (DNA) के नमूने फॉरेंसिक जांच में न पकड़े जाएं. यह ‘एविडेंस टेंपरिंग’ का एक गंभीर मामला है.

राजस्थान पुलिस कहां-कहां तलाश रही गायब सामान

राजस्थान पुलिस की टीमें आरोपियों के ठिकानों और उस संभावित रास्ते की तलाशी ले रही हैं जहां इन कपड़ों को फेंका गया हो सकता है. यूं तो आरोपियों ने शारीरिक साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन वे कार में लगे डैशकैम की रिकॉर्डिंग के बारे में भूल गए. पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस ऑडियो रिकॉर्डिंग में आरोपी आपस में ऐसी बातें कर रहे हैं जो उनके अपराध को स्वीकार करने जैसी हैं.

कुलमिलाकर उदयपुर रेपकांड ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन, बल्कि कॉरपोरेट वर्ककल्चर और महिलाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 9 दिन बीत जाने के बाद पीड़िता का अंडरगारमेंट्स अभी तक पुलिस नहीं ढूंढ पाई है. सीईओ जितेश सिसोदिया, उनके करीबी सहयोगी गौरव सिरोही और उसकी पत्नी शिल्पा सिरोही की पूछताछ चल रही है. पुलिस जांच के साथ-साथ सामने आए तकनीकी सबूतों ने इस केस को बेहद अहम बना दिया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डैशकैम में रिकॉर्ड हुई आवाजें और बातचीत घटना के समय और परिस्थितियों की पुष्टि करती हैं. यही फुटेज पुलिस के लिए एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य साबित हुई.

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