अन्या ने रॉ चीफ को बताया था सगा मामा, ED का डर दिखाकर ऐंठे सवा करोड़ रुपये, अब 30 करोड़ की थी डिमांड

Last Updated:September 19, 2026, 22:36 IST
दिल्ली के संसद मार्ग थाने में अन्या वत्स और संयम सचदेवा के खिलाफ 1.25 करोड़ रुपये की ठगी का मामला दर्ज हुआ है. शिकायतकर्ता अखिलेश गोयल का आरोप है कि आरोपियों ने प्रवर्तन निदेशालय का फर्जी नोटिस भेजकर पीएमएलए, एनडीपएस, और यूएपीए के तहत फंसाने की धमकी दी थी. साथ ही रॉ के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारियों से संबंध होने का झूठा दावा कर दबाव बनाया था. आरोप है कि लगातार ईमेल, व्हाट्सऐप और कॉल्स के जरिए डराकर करोड़ों वसूले गए और बाद में 30 करोड़ की मांग भी की गई.दिल्ली के संसद मार्ग थाने में अन्या वत्सा और अन्य के खिलाफ फर्जी ईडी नोटिस और 1.25 करोड़ रुपये की ठगी को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है. (एआई इमेज)
युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, आरोपी अन्या वत्स से जुड़ी कई चौंकान वाले राज सामने आ रहे है. इस मामले में फिलहाल एक बड़ा खुलाया दिल्ली की संसद मार्ग थाने में दर्ज एक एफआईआर से हुआ है. शिकायतकर्ता अखिलेश गोयल ने आरोप लगाया है कि अन्या वत्स, संयम सचदेवा और उनके साथियों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और दूसरी सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर उन्हें डराया और करीब 1.25 करोड़ रुपये ऐंठ लिए.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी नोटिस, ई-मेल, व्हाट्सएप मैसेज और फोन कॉल के जरिए ऐसा माहौल बनाया, जैसे शिकायतकर्ता के खिलाफ गंभीर सरकारी कार्रवाई होने वाली हो. यह मामला 3 सितंबर 2024 से शुरू होने का दावा किया गया है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, उस दिन उन्हें एक अनजान मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप पर ईडी का नोटिस मिला. इसमें उन्हें और उनकी पत्नी को प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होने के लिए कहा गया था.
PMLA, NDPS और UAPA में फंसाने का दिखाया था डर
नोटिस मिलने के बाद अन्या वत्स और संयम सचदेवा ने शिकायतकर्ता से संपर्क किया और दावा किया कि मंत्रालय स्तर पर उनकी पहुंच है. उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि वे इस मामले में उनकी मदद कर सकते हैं.
आरोप है कि अन्या वत्स ने बताया था कि रॉ के पूर्व प्रमुख और आईपीएस अधिकारी रहे सामंत गोयल उनके मामा हैं, जबकि रॉ में ज्वाइंट सेकेट्री के पद पर तैनात अनिल गुप्ता उसके स्थानीय अभिभावक हैं.
शिकायतकर्ता का दावा है कि इन नामों का इस्तेमाल उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अन्या की पहुंच सरकारी महकमें में काफी ऊपर तक है. इसके बाद शिकायतकर्ता को पीएमएलए, एनडीपीएस और पीएपीए जैसे कानूनों के तहत फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाया गया.
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसे बताया गया कि अगर वह पैसे देता रहा तो मामले को संभाला जा सकता है. अक्टूबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच उससे अलग-अलग किस्तों में करीब 1.25 करोड़ रुपये लिए गए. यह रकम अन्या वत्स के एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे.
आरोप है कि अन्या को रकम देने के लिए उसने करीबियों से उधार बैंक से लोन लिया था. अन्या वत्स और संयम सचदेवा लगातार यह कहते रहे कि रकम जुर्माने, सेटलमेंट और मामले को खत्म कराने के लिए दी जा रही है.
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसे अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन भी आते थे. कॉलर खुद को गृहमंत्रालय, ईडी, रॉ और एनआईए का अधिकारी बताकर नाम और पहचान का इस्तेमाल कर उसपर दबाव बना रहे थे.
नवंबर 2024 में भेजा गया थमकी भरा ई-मेलशिकायत में 29 नवंबर 2024 के एक ई-मेल का भी जिक्र है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह ई-मेल अन्या वत्स की ओर से भेजा गया था. इसमें दावा किया गया कि शिकायतकर्ता के खिलाफ सभी मामले बंद हो गए हैं. इसके साथ करीब 96.89 लाख रुपये और 1 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च के तौर पर देने की मांग की गई थी. इसके बाद 4 अगस्त 2025 को एक और ई-मेल भेजा गया था. इसमें बताया था कि अन्या ने अलग-अलग सरकारी एजेंसियों को 13.85 करोड़ रुपये दिए हैं और शिकायतकर्ता पर 26 करोड़ रुपये बकाया हैं. हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन भुगतानों के बदले उसे कोई सरकारी रसीद या वैध दस्तावेज नहीं दिया गया था.
व्हाट्सएप पर 30 करोड़ रुपये मांगने का आरोपशिकायत में एक धमकी भरे व्हाट्सएप मैसेज का भी जिक्र है. इसमें शिकायतकर्ता से दीवाली से पहले 30 करोड़ रुपये चुकाने की मांग किए जाने का आरोप है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, मैसेज में उसके परिवार को लेकर धमकी दी गई और तुरंत 15 लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया. शिकायत में यह भी आरोप है कि शिकायतकर्ता को डराने के लिए उसके परिचित गोपाल महाजन के बेटे का जिक्र किया गया. शिकायतकर्ता का कहना है कि लगातार फोन, व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिए उस पर मानसिक दबाव बनाया गया.
15 अगस्त 2026 को दर्ज हुई थी एफआईआरशिकायत के आधार पर संसद मार्ग थाने में 15 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी. शिकायत के साथ व्हाट्सएप चैट, ई-मेल, बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेज, फर्जी नोटिस के स्क्रीनशॉट और भुगतान की टाइमलाइन भी दी गई है. अब पुलिस बैंक खातों में हुए लेनदेन, मोबाइल नंबरों, ई-मेल, व्हाट्सएप चैट और दस्तावेजों की जांच कर रही है. साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सरकारी एजेंसियों के नाम और पहचान का इस्तेमाल कैसे किया गया और इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे.
About the Authorअनूप कुमार मिश्रAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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September 19, 2026, 22:36 IST



