ऋषिकेश दा के दिल के बेहद करीब थे अमिताभ बच्चन, सुपरस्टार को दिया था खास नाम, उनके लिए लकी चार्म थी ये एक्ट्रेस

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्मों में आम लोगों की जिंदगी को बेहद खूबसूरत अंदाज में पेश किया. उनकी फिल्मों में परिवार, रिश्ते, प्यार, दोस्ती और रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियां नजर आती थीं. यही वजह है कि ‘आनंद’, ‘गुड्डी’, ‘बावर्ची’, ‘अभिमान’, ‘चुपके चुपके’ और ‘गोलमाल’ जैसी उनकी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखती हैं.
ऋषिकेश मुखर्जी यानी ऋषिकेश दा का अपने कलाकारों के साथ भी खास रिश्ता था. वह सेट पर कलाकारों के साथ काफी अपनापन रखते थे. एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने अमिताभ बच्चन और अपनी फेवरेट एक्ट्रेस दुर्गा खोटे को लेकर दिलचस्प बातें बताई थीं. 30 सितंबर 1922 को जन्मे ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले काफी अलग काम किए थे. शुरुआत में वह गणित और विज्ञान पढ़ाते थे, लेकिन उनका सपना फिल्मों में काम करने का था. इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने फिल्म लैब में असिस्टेंट के तौर पर काम शुरू किया. बाद में वह एडिटिंग से जुड़े और महान फिल्मकार बिमल रॉय के साथ काम करने का मौका मिला.
दिलीप कुमार की सलाह पर बने डायरेक्टर
ऋषिकेश दा ने बिमल रॉय की कई फिल्मों की एडिटिंग की. इसी दौरान उन्होंने फिल्म बनाने की बारीकियां सीखीं. ‘दो बीघा जमीन’, ‘देवदास’ और ‘मधुमती’ जैसी फिल्मों की एडिटिंग से उनका जुड़ाव रहा. उन्होंने एक इंटरव्यू में बिमल रॉय को अपना ‘फिल्मी पिता’ भी बताया था.इसके बाद दोस्त दिलीप कुमार के कहने पर ऋषिकेश मुखर्जी ने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा. उनकी पहली फिल्म ‘मुसाफिर’ साल 1957 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में एक ही घर में रहने वाले अलग-अलग परिवारों के जरिए जिंदगी के तीन पड़ाव जन्म, शादी और मौत को दिखाया गया था. बताया जाता है कि कई लोगों ने उन्हें इस तरह की कहानी पर फिल्म बनाने से रोकने की कोशिश की थी, लेकिन दिलीप कुमार के भरोसे ने उनका हौसला बढ़ाया. फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला. उनका मानना था कि अगर दुर्गा खोटे उनकी फिल्म में हैं तो फिल्म सफल होगी. वह इसे दुर्गा खोटे का आशीर्वाद मानते थे.
राजेश खन्ना-अमिताभ को लेकर बनाई ये फिल्म
इसके बाद ऋषिकेश दा ने ‘अनाड़ी’, ‘अनुराधा’, ‘अनुपमा’, ‘आशीर्वाद’, ‘सत्यकाम’ और ‘गुड्डी’ जैसी कई बेहतरीन फिल्में दीं. साल 1971 में रिलीज हुई ‘आनंद’ ने उन्हें हिंदी सिनेमा के बड़े फिल्मकारों की कतार में और मजबूत कर दिया. राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन स्टारर यह फिल्म आज भी दोस्ती और जिंदगी को देखने के अलग नजरिए के लिए याद की जाती है. फिल्म के लिए ऋषिकेश मुखर्जी को फिल्मफेयर में बेस्ट स्टोरी और बेस्ट एडिटिंग के सम्मान मिले थे. फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.
अमिताभ बच्चन को कहते थे ‘महाराज’
ऋषिकेश मुखर्जी और उनके कलाकारों के बीच काफी अपनापन था. एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह अमिताभ बच्चन को ‘महाराज’ कहकर बुलाते थे. अमिताभ के साथ उन्होंने ‘आनंद’, ‘अभिमान’, ‘नमक हराम’ और कई दूसरी फिल्मों में काम किया था. जब उनसे उनकी पसंदीदा अभिनेत्री के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बिना देर किए दुर्गा खोटे का नाम लिया. ऋषिकेश दा दुर्गा खोटे की एक्टिंग के बहुत बड़े प्रशंसक थे. उन्होंने कहा था कि वह शानदार कलाकार थीं और उनकी कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं.
ऋषिकेश दा की फिल्मों की एक खास बात यह भी थी कि वह छोटे से छोटे किरदार को भी पूरी अहमियत देते थे. ‘आनंद’ के बारे में उन्होंने कहा था कि फिल्म का हर किरदार जरूरी होता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे एक परिवार में हर सदस्य की अपनी जगह होती है. यही वजह थी कि उनकी फिल्मों में सपोर्टिंग किरदार भी दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बना लेते थे. ‘बावर्ची’, ‘अभिमान’, ‘नमक हराम’, ‘मिली’, ‘चुपके चुपके’, ‘गोलमाल’ और ‘खूबसूरत’ जैसी फिल्मों ने उनके शानदार करियर को और ऊंचाई दी. ऋषिकेश दा गंभीर विषयों के साथ-साथ कॉमेडी को भी बेहद सहज अंदाज में पर्दे पर उतारते थे. ‘गोलमाल’ और ‘खूबसूरत’ इसका अच्छा उदाहरण हैं. अपने लंबे फिल्मी करियर में ऋषिकेश मुखर्जी ने करीब 50 फिल्मों का निर्देशन किया. साल 2000 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मानों में से एक दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया.



