Rajasthan

एक बार किया निवेश अब साल के कमा रहे 25 लाख, सीकर के किसान ने खेती को बनाया मुनाफे का बिजनेस

Last Updated:September 18, 2026, 11:47 IST

राजस्थान में किसान अब सिर्फ गेहूं, जौ, चना और सरसों की पारंपरिक खेती पर निर्भर नहीं हैं. कुछ किसान आधुनिक तकनीक और नई फसलों के जरिए खेती को मुनाफे वाले कारोबार में बदल रहे हैं. सीकर के लामिया गांव के किसान सोनाराम इसकी एक मिसाल हैं, जिन्होंने खेती में पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई और सोलर सिस्टम जैसी तकनीकों को अपनाकर अपनी कमाई बढ़ाई है. आज वे खेती से सालाना 20 से 25 लाख रुपए से अधिक की कमाई करने का दावा करते हैं.

Agriculture Business Idea: राजस्थान में खेती अब सिर्फ गेहूं, जौ, चना और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं है. किसान आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को कारोबार का रूप दे रहे हैं. सीकर के लामिया गांव के किसान सोनाराम भी इसका उदाहरण हैं. उन्होंने साल 2017 में पारंपरिक खेती के साथ पॉलीहाउस में खीरे की खेती शुरू की. ड्रिप सिंचाई, सोलर सिस्टम और बारिश के पानी को स्टोर करने जैसी तकनीकों को अपनाकर वे अब खेती से सालाना 20 से 25 लाख रुपए से अधिक की कमाई कर रहे हैं.

जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर लामिया गांव निवासी सोनाराम के पास 14 बीघा जमीन है. यहां वे गेहूं, जौ, चना और सरसों की खेती के साथ 4000 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में खीरे का उत्पादन करते हैं. सोनाराम ने 2017 में करीब 32 लाख रुपए खर्च कर पॉलीहाउस तैयार करवाया था. सरकारी अनुदान मिलने के बाद उनका खर्च करीब 10 लाख रुपए ही रहा.

पहली फसल में ही मिला 2 लाख से ज्यादा मुनाफा

सोनाराम ने पॉलीहाउस में पहली बार खीरे की खेती शुरू की तो करीब 2 लाख रुपए खर्च हुए. पहली ही फसल में उन्हें 2 लाख रुपए से अधिक का मुनाफा मिला. इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे उत्पादन और तकनीक में सुधार किया. उनके मुताबिक साल 2023 में खीरे और पारंपरिक खेती से 12 लाख रुपए से अधिक, जबकि 2024 में करीब 16 लाख रुपए का मुनाफा हुआ. साल 2025 के पहले सीजन में ही करीब 7 लाख रुपए का मुनाफा हो चुका था. साल 2026 में तो ये मुनाफा और भी अधिक बढ़ गया है. एक सीजन से 10 लाख रुपए से अधिक मुनाफा हुआ है.

4000 वर्ग मीटर पॉलीहाउस में 45 टन तक उत्पादन

सोनाराम पॉलीहाउस में करीब 7000 खीरे के पौधे लगाते हैं. अनुकूल वातावरण के कारण पौधे करीब 40 दिन में फल देना शुरू कर देते हैं. उनके अनुसार एक पौधे से एक सीजन में करीब 60 से 70 किलो तक खीरा मिलता है. इस तरह एक सीजन में करीब 40 से 45 टन उत्पादन हो जाता है. साल में दो सीजन में खीरे की खेती की जाती है. पहला सीजन फरवरी से मई और दूसरा जुलाई से अक्टूबर तक रहता है.

गोबर और गोमूत्र से बनाते हैं प्राकृतिक खाद

सोनाराम खीरे की खेती में प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए उन्होंने दुर्गापुरा रिसर्च सेंटर से ट्रेनिंग लिया. खेत पर ही गोमूत्र, गोबर, आक, धतूरा और खींप जैसी चीजों से खाद तैयार करते हैं. इन सभी को ड्रम में भरकर करीब 3 से 4 महीने तक सड़ाया जाता है. इसके बाद फसल के दौरान इसका इस्तेमाल करते हैं. सोनाराम ने खेती में तकनीक को काफी पहले अपनाना शुरू कर दिया था.

उन्होंने 1980 में खेत में फव्वारा सिंचाई सिस्टम लगाया था. बाद में ड्रिप तकनीक आने पर पूरे खेत में ड्रिप सिस्टम लगवाया. बारिश के पानी को बचाने के लिए खेत में बड़ा पॉन्ड बनाया है. बिजली की समस्या से बचने के लिए सोलर सिस्टम भी लगाया है. सोनाराम का कहना है कि खेती में तकनीक और सही प्रबंधन को अपनाकर किसान कम पानी में उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती को फायदे का कारोबार बना सकता है.

About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor

Sajan Kumar is a journalist with professional experience in digital news, web journalism, SEO content, copy editing and social media storytelling. He has been working in journalism since 2020 and has worked wit…

और पढ़ेंLocation :

Sikar,Rajasthan

First Published :

September 18, 2026, 11:45 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj