Poultry Farming Tips: बारिश में मुर्गियों को बीमारियों से बचाना है? शेड से चारे तक इन 5 जरूरी बातों का रखें ध्यान

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बारिश में मुर्गियां पड़ सकती हैं बीमार, इन 5 जरूरी बातों का जरूर रखें ध्यान
Last Updated:September 18, 2026, 10:56 IST
Rainy Season Poultry Farming Tips: मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए बारिश का मौसम अतिरिक्त सावधानी बरतने का समय है. गीला चारा, दूषित पानी और खराब साफ-सफाई से मुर्गियों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. शेड को सूखा रखने के साथ फीडर और ड्रिंकर की नियमित सफाई जरूरी है. मक्खी-मच्छर और चूहों को दूर रखें और बाहरी लोगों व दूसरे पक्षियों का अनावश्यक प्रवेश रोकें. समय पर टीकाकरण और जैव-सुरक्षा के उपाय अपनाएं. अचानक ज्यादा मौत या तेजी से बीमारी फैलने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
बारिश का मौसम मुर्गी पालकों के लिए कई परेशानियां लेकर आता है. इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से मुर्गियों के शेड में सीलन हो जाती है. शेड में बारिश का पानी नहीं आने दें और छत व दीवारों की लीकेज समय पर ठीक कराएं. शेड में हवा का सही आवागमन भी जरूरी है. शेड को पूरी तरह बंद रखने के बजाय ताजी हवा के आने-जाने की व्यवस्था रखें.
बारिश के दिनों में मुर्गियों की लिटर यानी बिछावन पर खास ध्यान देना चाहिए. भूसा, लकड़ी का बुरादा या धान की भूसी गीली हो जाए तो उसे तुरंत निकालकर सूखी लिटर डालें. लिटर को समय-समय पर उलटते-पलटते रहें. गीली लिटर से बदबू और अमोनिया बढ़ने के साथ बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है. पानी की टंकी, पाइप और ड्रिंकर में लीकेज की रोज जांच करें.
इस मौसम में मुर्गियों में दस्त, सांस लेने में परेशानी, आंख-नाक से पानी आना, कमजोरी और कोक्सीडियोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. अगर कोई मुर्गी सुस्त दिखाई दे, अलग बैठी रहे या उसका मल सामान्य नहीं हो तो उसे तुरंत दूसरी मुर्गियों से अलग कर दें. बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा देने के बजाय पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है.
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मुर्गियों को हमेशा साफ और ताजा पानी दें और चारे को सूखी व साफ जगह पर रखें. बारिश में गीला या फफूंद लगा चारा मुर्गियों को नहीं खिलाना चाहिए. फीडर और ड्रिंकर की नियमित सफाई करें. मक्खी-मच्छर और चूहों को शेड से दूर रखें. नीम की पत्तियां जैसे घरेलू उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन इन्हें बीमारी का इलाज नहीं मानना चाहिए. साफ-सफाई और शेड को सूखा रखना ही सबसे जरूरी बचाव है.
मुर्गियों का टीकाकरण समय पर कराएं और फार्म में साफ-सफाई के साथ जैव-सुरक्षा का भी ध्यान रखें. बाहर से आने वाले लोगों और दूसरे पक्षियों का अनावश्यक प्रवेश रोकें. बीमारी फैलने पर बिना सलाह एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं देने से बचें. रोज सुबह-शाम शेड का निरीक्षण करने से बीमारी को शुरुआती स्तर पर पहचाना जा सकता है. अचानक ज्यादा मौत, गंभीर सांस की परेशानी या तेजी से बीमारी फैलने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
First Published :
September 18, 2026, 10:56 IST



