एक 12 साल का बच्चा, दूसरा IIT इंजीनियर, जहान और गौरव ने सांसारिक सुखों से क्यों किया किनारा?

जयपुर. करियर, कारोबार और बेहतर भविष्य की दौड़ के बीच राजस्थान से जुड़ी दो ऐसी कहानियां सामने आई हैं, जिनमें युवाओं ने कम उम्र में ही सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर धर्म और अध्यात्म को प्राथमिकता दी है. गुजरात के सूरत में रहने वाले राजस्थान मूल के 12 वर्षीय जहान बेताला ने जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया है. वह 18 जनवरी 2027 को लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आचार्य श्री महाश्रमणजी से दीक्षा ग्रहण करेंगे. दूसरी ओर, राजस्थान के केकड़ी क्षेत्र के जूनिया गांव निवासी 24 वर्षीय आईआईटी इंजीनियर गौरव जैन ने गुरुग्राम में 18 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत धारण किया है. गौरव ने अपने गुरु मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के संघ में रहने का संकल्प लिया है. दोनों के फैसलों के पीछे धार्मिक संस्कार, गुरुजनों का मार्गदर्शन और वैराग्य की भावना अहम रही है.
एक ओर 12 साल का बालक दीक्षा की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी ओर प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग करने वाला युवा आकर्षक नौकरी और पारिवारिक अपेक्षाओं से अलग आध्यात्मिक जीवन चुन चुका है. जहान बेताला का परिवार मूल रूप से राजस्थान के बोरावड़ क्षेत्र से जुड़ा है. उनके पिता प्रवीन बेताला और मां नताशा बेताला फिलहाल गुजरात के सूरत शहर में रहते हैं. परिवार के अनुसार, जहान की उम्र करीब 12 साल होने के साथ ही उनके मन में त्याग और वैराग्य के भाव प्रबल होने लगे. धीरे-धीरे उनका झुकाव भौतिक वस्तुओं और सांसारिक आकर्षणों से दूर होकर धर्म, साधना और आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ने लगा. इसी भावना के चलते उन्होंने जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया.
18 जनवरी 2027 को लाडनूं में होगी दीक्षा
जहान के इस फैसले को दिशा देने में साध्वी मंगलप्रज्ञाजी का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा. साध्वीजी इन दिनों राजस्थान के बालोतरा में चातुर्मास कर रही हैं. अपने बालोतरा प्रवास के दौरान उन्होंने जहान को जैन धर्म के सिद्धांतों और संयम के मार्ग के बारे में समझाया. साथ ही उनके माता-पिता से भी बातचीत की. इससे परिवार को बेटे के फैसले को समझने और इसके लिए मानसिक रूप से तैयार होने में मदद मिली. परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, जहान बेताला 18 जनवरी 2027 को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे. राजस्थान के लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आचार्य श्री महाश्रमणजी उन्हें दीक्षा प्रदान करेंगे. इस आयोजन को लेकर परिवार और जैन समाज में तैयारियां की जा रही हैं. जहान की बहन जियाना, पिता प्रवीन बेताला और मां नताशा बेताला ने बालोतरा के श्रावक-श्राविका समाज को दीक्षा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. परिवार ने समाज के लोगों से कार्यक्रम में पहुंचकर जहान को आशीर्वाद देने और उनके संयम जीवन की शुरुआत के अवसर पर सहभागी बनने की अपील की है.
आईआईटी की पढ़ाई, 18 लाख का पैकेज, फिर भी नौकरी से किया किनारा
राजस्थान के केकड़ी क्षेत्र के जूनिया गांव निवासी 24 वर्षीय गौरव जैन की कहानी भी वैराग्य के फैसले को लेकर चर्चा में है. राकेश जैन के बड़े बेटे गौरव ने आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्हें गुरुग्राम की एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिली, जहां उनका सालाना पैकेज 18 लाख रुपये था. पढ़ाई में मेधावी होने के साथ गौरव मिलनसार और खुशमिजाज स्वभाव के भी रहे हैं. परिवार से मिले धार्मिक संस्कारों ने उनके जीवन में शुरू से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उच्च शिक्षा और अच्छी नौकरी हासिल करने के बाद भी उनका रुझान आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर बना रहा. आखिरकार उन्होंने आकर्षक वेतन वाली नौकरी छोड़ने और आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत धारण करने का निर्णय लिया. अब वह अपने गुरु मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के संघ में रहकर संयम के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं.
2015 में गुरु के दर्शन के बाद बढ़ा आध्यात्मिक झुकाव
गौरव के परिवार के अनुसार, उनके वैराग्य की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी. उस समय दिगंबर जैन संत मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने गौरव के ननिहाल गुलगांव में गुणोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र की नींव रखी थी. इसी दौरान गौरव ने पहली बार मुनिश्री के दर्शन किए और उन्हें अपना गुरु मान लिया. इसके बाद वह नियमित रूप से मुनिश्री के प्रवचन सुनने लगे. जिज्ञासा समाधान के माध्यम से धर्म से जुड़े सवालों के उत्तर प्राप्त करते हुए उनकी आस्था और मजबूत होती गई. जयपुर के प्रताप नगर में उच्च शिक्षा के लिए रहने के दौरान भी उनकी धार्मिक दिनचर्या जारी रही. गौरव प्रतिदिन साइकिल से सांगानेर स्थित श्री संघीजी मंदिर पहुंचते थे. वहां देवदर्शन और भगवान का अभिषेक करने के साथ उन्होंने शुद्ध एवं सात्विक भोजन करने का नियम भी बनाए रखा.
नौकरी मिली तो परिवार ने शुरू की शादी की चर्चा
वर्ष 2022 में गौरव को मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिली तो परिवार में खुशी का माहौल था. अच्छी शिक्षा और बेहतर नौकरी के बाद परिजनों ने उनके विवाह को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी. लेकिन गौरव के मन में सांसारिक जीवन से अलग होकर धर्म और संयम के रास्ते पर चलने की इच्छा लगातार मजबूत हो रही थी. वह शादी की चर्चाओं को टालते रहे और अंततः उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेने का फैसला कर लिया. अपने निर्णय को पूरा करने के लिए गौरव पर्युषण पर्व से पहले मध्यप्रदेश के इंदौर पहुंचे. उस समय उनके गुरु मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज वर्षायोग के लिए वहां प्रवास कर रहे थे. गौरव ने गुरुचरणों में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने और मुनिसंघ में रहने की इच्छा जताई. हालांकि, उस समय मुनिश्री ने उनकी बात टाल दी. इसके बाद गौरव गुरुग्राम लौट गए, लेकिन उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ.
गौरव जैन नौकरी छोड़कर आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत धारण कर चुके हैं
पर्युषण पर्व संपन्न होने के कुछ दिन बाद गौरव अपने गांव जूनिया जाने के बजाय दोबारा इंदौर पहुंच गए. उन्होंने परिवार को अपने फैसले की जानकारी दी और माता-पिता सहित अन्य परिजनों को भी वहां बुला लिया. परिवार के सदस्यों ने भावुक होकर उन्हें निर्णय बदलने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन गौरव अपने संकल्प पर अडिग रहे. आखिरकार उन्होंने मुनिपुंगव श्री सुधासागरजी महाराज से विधिवत आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया और मुनिसंघ में शामिल होने का अपना निर्णय पूरा किया. जहान बेताला जनवरी 2027 में दीक्षा लेने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि गौरव जैन नौकरी छोड़कर आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत धारण कर चुके हैं.



