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कक्षा में भरभराकर गिरा छत का प्लास्टर, लहूलुहान हुए तीन मासूम, राजस्थान में फिर दिखा झालावाड़ जैसा खौफनाक मंजर

Last Updated:October 07, 2026, 11:09 IST

Udaipur School Roof Collapse: उदयपुर के भींडर स्थित नारदा गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को एक बड़ा हादसा हो गया. पढ़ाई के दौरान अचानक जर्जर कक्षा की छत का प्लास्टर भरभराकर गिर पड़ा, जिससे तीन मासूम बच्चे लहूलुहान हो गए. मलबे की चपेट में आने से बच्चों के सिर में चोटें आई हैं. गनीमत रही कि पूरी छत नहीं गिरी, वरना राजस्थान में झालावाड़ स्कूल हादसे जैसी एक और बड़ी त्रासदी हो सकती थी. हादसे के वक्त कक्षा में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था और घायल बच्चों को खुद पैदल चलकर घर जाना पड़ा.

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उदयपुर के भींडर में जर्जर स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा, 3 बच्चे लहूलुहानZoomUdaipur School Roof Collapse: उदयपुर के भींडर में जर्जर स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा, 3 बच्चे लहूलुहान

उदयपुर: उदयपुर जिले के भींडर इलाके से एक बेहद ही डराने वाली और शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली खबर सामने आई है. वाणियातलाई ग्राम पंचायत के नारदा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई कर रहे बच्चों पर अचानक मौत का साया मंडरा गया. सोमवार को स्कूल के एक जर्जर कक्षा-कक्ष की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा. इस भयानक हादसे में कक्षा में बैठे तीन मासूम विद्यार्थी मलबे की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए. तेज आवाज के साथ गिरे इस मलबे के कारण बच्चों के सिर में गंभीर चोटें आईं और स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई.

यह घटना राजस्थान में जर्जर सरकारी स्कूलों के खौफनाक सच को उजागर करती है. इस हादसे ने तुरंत झालावाड़ स्कूल हादसे की डरावनी यादें ताजा कर दीं, जहां जर्जर इमारत गिरने से कई मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. ऐसा लगता है कि सरकार और प्रशासन ने उस दर्दनाक घटना से कोई सबक नहीं लिया है. भींडर के इस स्कूल में भी अगर गनीमत नहीं रहती और पूरी छत नीचे आ जाती, तो झालावाड़ की तरह ही यहां भी एक बहुत बड़ी और दर्दनाक त्रासदी हो सकती थी. आखिर कब तक मासूम बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर इन खस्ताहाल इमारतों में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर रहेंगे.

हादसे के वक्त गायब थे शिक्षक, बच्चे खुद पहुंचे घरइस हादसे में 7 वर्षीय काजल, 7 वर्षीय कृष्णा और 8 वर्षीय ललित गंभीर रूप से घायल हुए हैं. घटना के वक्त लापरवाही की सारी हदें पार हो गईं क्योंकि कक्षा में कोई भी शिक्षक मौजूद नहीं था. सबसे दुखद पहलू यह रहा कि सिर से खून बहने के बावजूद ये लहूलुहान मासूम बच्चे खुद पैदल चलकर अपने घर तक पहुंचे. परिजनों ने जब बच्चों को इस हालत में देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. आनन-फानन में परिजनों ने उन्हें जिला चिकित्सालय भींडर पहुंचाया, जहां उनका उपचार किया गया.

शिक्षक की टेबल-कुर्सी भी टूटकर हुई चकनाचूरहादसा कितना भयंकर था, इसका अंदाजा कक्षा की स्थिति देखकर लगाया जा सकता है. छत से गिरे भारी मलबे के कारण शिक्षक की टेबल और कुर्सी टूटकर पूरी तरह चकनाचूर हो गई. पुरानी और जर्जर छत से जंग लगे सरिये तक बाहर निकल आए हैं. अखबार की कटिंग के मुताबिक, स्कूल में 37 बच्चों के नामांकन पर एक स्थायी और एक संविदा शिक्षक नियुक्त हैं. इसके बावजूद अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण के दौरान एक शिक्षक अनुपस्थित पाया गया.

मरम्मत के नाम पर सिर्फ पुताई का खेलइस गंभीर घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और बच्चों के अभिभावकों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों ने बताया कि साल 2020 में छत का प्लास्टर कराया गया था, लेकिन भवन की असल मरम्मत करने के बजाय सिर्फ रंग-रोगन करके लीपापोती कर दी गई थी. भवन की जर्जर स्थिति के बारे में जिम्मेदार अधिकारियों को पहले भी कई बार अवगत कराया जा चुका था, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. घटना के बाद आखिरकार प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और जर्जर भवन को बंद करने के निर्देश दिए. अब बच्चों की पढ़ाई सुचारू रखने के लिए किसी सुरक्षित स्थान की तलाश की जा रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Udaipur,Udaipur,Rajasthan

First Published :

October 07, 2026, 11:09 IST

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