कभी होती थी साफे-चुन्नियों की रंगाई, आज है सुनारों का प्रमुख केंद्र, जानिए पाली के उदयपुरिया बाजार का इतिहास

Last Updated:August 26, 2026, 11:49 IST
पाली के ऐतिहासिक बाजार ने समय के साथ अपनी पहचान बदली है. कभी साफे-चुन्नियों की रंगाई के लिए मशहूर यह बाजार आज सोने-चांदी के आभूषणों के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है. वर्ष 1940 में जवाहर मल सोनी ने यहां सोने-चांदी का कारोबार शुरू किया था. उनकी शुरुआत से लेकर आज तक कई पीढ़ियों ने इस विरासत को आगे बढ़ाया और अपनी कारीगरी व भरोसे से बाजार को नई पहचान दी.
राजस्थान का पाली शहर अपने समृद्ध इतिहास और पारंपरिक व्यापार के लिए जाना जाता है. शहर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक बाजारों में शामिल यह क्षेत्र कभी रंगरेजों के बाजार के रूप में मशहूर था. यहां दूर-दूर से आए साफे और चुन्नियों की रंगाई का काम बड़े पैमाने पर हुआ करता था, जिससे बाजार में हर समय चहल-पहल बनी रहती थी.
समय के साथ इस बाजार की पहचान बदलने लगी. आजादी से पहले, वर्ष 1940 में सोनाई गांव से आए जवाहर मल सोनी ने यहां कदम रखा और सोने-चांदी का व्यापार शुरू किया. उनके इस साहसिक कदम ने पारंपरिक रंगाई बाजार में आभूषण व्यापार की मजबूत नींव रखी.
जवाहर मल सोनी के व्यवसाय शुरू करने के बाद धीरे-धीरे अन्य व्यापारी भी इस क्षेत्र से जुड़ते गए. जैसे-जैसे समय बदला, कपड़ा रंगाई का यह पुराना बाजार धीरे-धीरे सर्राफों के प्रमुख केंद्र के रूप में परिवर्तित हो गया और इसकी पहचान सोने-चांदी की मंडी के रूप में स्थापित हो गई.
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इस व्यापारिक सफर को मूलचंद और पुखराज सोनी ने आगे बढ़ाते हुए बाजार और प्रतिष्ठान को एक नई पहचान दी. वर्तमान में इस समृद्ध पारिवारिक परंपरा और साख को महेंद्र कुमार और पुखराज सोनी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा आज भी बना हुआ है.
एक समय था जब यह प्रतिष्ठान मुख्य रूप से अपनी गुणवत्तापूर्ण चांदी की आभूषणों की कारीगरी के लिए प्रसिद्ध था. लेकिन समय की मांग और उत्कृष्ट कारीगरी के बल पर आज इस प्रतिष्ठान ने सोने के आभूषणों के क्षेत्र में भी अपनी एक विशिष्ट और मजबूत पहचान बना ली है.
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August 26, 2026, 11:49 IST



