करौली में मौत के खुले दरवाजे… 1 साल से नहीं जागे जिम्मेदार, अब लोग खुद भर रहे गड्ढे

करौली: राजस्थान के करौली शहर की सड़कों पर चलना अब आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं बचा है. शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों तक खुले पड़े सीवर चैंबर और जानलेवा गड्ढे लगातार गंभीर हादसों को न्योता दे रहे हैं. सबसे बड़ी हैरानी और शर्म की बात यह है कि पूरे शहर में इस समय 20 से अधिक सीवर चैंबर पूरी तरह खुले पड़े हैं. इनमें से कई चैंबरों की दयनीय स्थिति पिछले 8 से 10 महीनों से ऐसी ही बनी हुई है, जबकि कुछ सीवर टैंक तो पिछले करीब एक साल से आम जनता के लिए जी का जंजाल और परेशानी का बड़ा सबब बने हुए हैं. स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों और नगर परिषद में शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार लोगों ने आज तक इनकी कोई सुध नहीं ली है. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अब लोग मजबूर होकर अपनी खुद की जेब से पैसे खर्च कर इन खतरनाक गड्ढों को ढकने और ठीक करवाने को विवश हैं.
करौली शहर के मुख्य मार्गों पर खुले पड़े ये सीवर चैंबर दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए काल साबित हो रहे हैं. दिन के समय भी इनसे बचकर निकलना काफी मुश्किल भरा होता है, जबकि रात के अंधेरे में स्ट्रीट लाइटों के अभाव या कम रोशनी के कारण बड़े हादसे की आशंका कई गुना और अधिक बढ़ जाती है. स्थानीय निवासियों के अनुसार, आए दिन कोई न कोई वाहन चालक या राहगीर इन खुले चैंबरों में अचानक गिरकर गंभीर रूप से घायल हो जाता है. इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है और समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं होने से शहरवासियों में भारी रोष व्याप्त है.
एक साल से खुला था सीवर चैंबर, तंग आकर व्यापारी ने खुद ठीक करायाशहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख मार्गों में शामिल बग्गीखाना क्षेत्र में विद्युत सब स्टेशन के पास एक सीवर चैंबर पिछले एक साल से पूरी तरह खुला पड़ा था. स्थिति इतनी भयानक थी कि उस खुले टैंक में से लगातार गंदा पानी और सड़ा हुआ सीवर का मलबा बाहर बहकर सड़कों पर फैल रहा था. आसपास के दुकानदारों और राहगीरों को मजबूरी में इसी बदबूदार और खतरनाक रास्ते से गुजरना पड़ रहा था. स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब नगर परिषद ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया, तो एक स्थानीय व्यापारी ने अपनी खुद की जेब से पैसे खर्च कर उस सीवर चैंबर को ठीक करवाया. यह घटना सीधे तौर पर नगर परिषद की कार्यप्रणाली और लचर व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है.
चटीकना मोहल्ला और गोमती कॉलोनी के हालात भी बदतरबग्गीखाना क्षेत्र के अलावा शहर के अन्य इलाकों जैसे चटीकना मोहल्ला और पॉश इलाके के रूप में जानी जाने वाली गोमती कॉलोनी में भी कई सीवर चैंबर लंबे समय से खुले हुए हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इन खुले टैंकों के कारण पूरे इलाके में हर वक्त खतरे की तलवार लटकी रहती है. रात के समय जब गड्ढे दिखाई नहीं देते, तो लोगों के गिरने का खतरा और भी गंभीर हो जाता है. नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इन सभी खुले चैंबरों को पक्के ढक्कन लगाकर बंद नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ा प्राणघातक हादसा हो सकता है.
चटीकना बाजार में 80 मीटर के दायरे में तीन खुले जानलेवा चैंबरशहर के व्यस्त चटीकना बाजार में स्थिति बेहद चिंताजनक और डरावनी है. यहां मुख्य मार्ग पर महज 80 मीटर के छोटे से दायरे में तीन बड़े सीवर चैंबर पिछले कई महीनों से खुले पड़े हैं. इस मुख्य रास्ते से रोजाना हजारों की संख्या में आम लोग, बुजुर्ग और वाहन गुजरते हैं. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसी मार्ग से मासूम बच्चे भी अपने स्कूलों में आते-जाते हैं, जिससे उनके लिए भी यह खुला रास्ता किसी खतरे से कम नहीं है.
स्थानीय निवासी अबरार खान का कहना है कि इन खुले चैंबरों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं. दोपहिया वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं. वहीं, दूसरे स्थानीय निवासी तौफीक अहमद ने बताया कि क्षेत्र में ये तीनों सीवर चैंबर पिछले 8 से 10 महीने से खुले हैं. इनके कारण लोग लगातार परेशान हो रहे हैं और कई लोग इनमें गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं. कई बार शिकायत करने के बाद भी अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.
नगर परिषद आयुक्त का आश्वासन: जल्द करवाएंगे सर्वेशहर में खुले पड़े इन खतरनाक सीवर चैंबरों को लेकर जब करौली नगर परिषद आयुक्त कालूराम से बात की गई, तो उनका कहना था कि सीवरेज सिस्टम से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर तुरंत संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाती है. शहर में जितने भी सीवर चैंबर खुले पड़े हैं, उन सबका जल्द से जल्द सर्वे करवाया जाएगा और उन्हें दुरुस्त करवा दिया जाएगा. अब यह देखने वाली बात होगी कि नगर परिषद का यह कागजी आश्वासन धरातल पर कब उतरता है और शहरवासियों को इस नरकीय जीवन से कब मुक्ति मिलती है. फिलहाल, शहर के कई इलाकों में खुले पड़े ये सीवर चैंबर प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं.



