केंद्र सरकार ने जारी की अफीम नीति 2026-27: किसानों की पात्रता का दायरा बढ़ा, पट्टों के संकट और सीपीएस पद्धति से नाराजगी

Last Updated:October 29, 2026, 08:12 IST
Opium Policy 2026-27 News: केंद्र सरकार ने अफीम नीति 2026-27 की घोषणा कर दी है. नई नीति से राजस्थान में 4,261 अतिरिक्त किसानों को अफीम खेती की पात्रता मिलेगी. वहीं नारकोटिक्स विभाग ने प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बना दिया है. हालांकि, 4.4 किग्रा मार्फीन की शर्त और पट्टों के सीपीएस पद्धति में बदलने की आशंका से भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ के काश्तकारों में भारी नाराजगी है. किसानों को 10 आरी क्षेत्रफल का लाइसेंस और लीज पर जमीन लेने की छूट दी गई है.
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Bhilwara: केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2026-27 के लिए नई अफीम नीति की घोषणा कर दी गई है. इस नई नीति के जारी होते ही अफीम उत्पादक किसानों के बीच मिले-जुले प्रभाव के साथ असंतोष और चिंता की स्थिति भी देखने को मिल रही है. नीति के नए प्रावधानों के कारण जहां एक तरफ पात्रता का दायरा बढ़ने से हजारों नए किसानों को खेती का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ लाइसेंस की कड़ी शर्तों और बिना चीरा लगाए पोस्ता भूसा उत्पादन करने की सीपीएस (CPS) पद्धति में धकेले जाने की आशंका से किसानों में गहरा आक्रोश है.
नई अफीम नीति 2026-27 में किसानों को बड़ी राहत देते हुए पात्रता का दायरा बढ़ा दिया गया है. इस फैसले से अकेले राजस्थान में ही इस वर्ष 4,261 अतिरिक्त नए अफीम काश्तकार जुड़ सकेंगे. राजस्थान के प्रमुख अफीम उत्पादक जिलों भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, कोटा, झालावाड़ और बारां के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. इसके अलावा प्रशासनिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया गया है. अब किसानों को बार-बार दस्तावेज जमा नहीं कराने होंगे. पात्र किसानों की सूची सीधे नारकोटिक्स विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और पोर्टल पर जारी की जाएगी, जबकि सूचनाएं किसानों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल पर भेजी जाएंगी.
मार्फीन की शर्त और सीपीएस पद्धति पर किसानों ने जताई चिंताचित्तौड़ प्रांत अफीम आयाम के प्रमुख बद्रीलाल तेली सहित किसान संगठनों ने नीति के कुछ कड़े प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. नीति के अनुसार फसल वर्ष 2025-26 में प्रति हेक्टेयर न्यूनतम 4.4 किलोग्राम मार्फीन की औसत उपज देने वाले किसानों को ही चीरा लगाकर अफीम निकालने का लाइसेंस दिया जाएगा. किसानों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितताओं के बीच इतनी मार्फीन औसत देना बेहद कठिन है. इस वजह से पारंपरिक चीरा पद्धति वाले पट्टों पर संकट मंडरा रहा है और बड़ी संख्या में काश्तकारों को सीपीएस पद्धति में जाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसे किसान अपने आर्थिक हित में उचित नहीं मान रहे हैं.
10 आरी क्षेत्रफल का मिलेगा लाइसेंस, जमीन पट्टे पर लेने की छूटनीति के तहत पात्र किसानों को एक प्लॉट में 0.10 हेक्टेयर यानी 10 आरी क्षेत्रफल में अफीम बोने का लाइसेंस दिया जाएगा. यदि किसी किसान के पास खुद का निर्धारित क्षेत्र कम पड़ता है, तो उसे दूसरे किसान की जमीन पट्टे (लीज) पर लेकर क्षेत्रफल पूरा करने की छूट दी गई है. इसके साथ ही वास्तविक बुवाई क्षेत्र में लाइसेंस से 5 प्रतिशत तक अधिक खेती पाई जाने पर उसे क्षम्य सीमा (सहानुभूतिपूर्ण छूट) में रखने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा फसल हांकने वाले पात्र किसानों, अपील में सफल रहे किसानों और मृतक काश्तकारों के नामांकित वारिसों को भी लाइसेंस देने का रास्ता साफ किया गया है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
October 29, 2026, 08:12 IST



