Rajasthan

खाकी में इंसानियत की मिसाल, रात की गश्त में बेसहारों का सहारा बन रहीं महिला SHO अभिलाषा

Last Updated:October 26, 2026, 18:15 IST

Jhunjhunu Female SHO Story : झुंझुनूं की महिला थानाधिकारी अभिलाषा गश्त के दौरान बेसहारा लोगों को भोजन और कंबल देती हैं. उनकी यह मानवीय पहल खाकी और आमजन के बीच भरोसे को मजबूत कर रही है. गश्त के दौरान जब फुटपाथ या किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई बेसहारा व्यक्ति भूखा दिखाई देता है, तो वे उसे भोजन उपलब्ध कराती हैं. सर्दियों में गाड़ी में कंबल और शॉल भी रखती हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी को राहत दी जा सके.

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झुंझुनूं. वर्दी की जिम्मेदारी कानून की रक्षा करना है, लेकिन जब इसी वर्दी में इंसानियत का जज्बा भी शामिल हो जाए, तो पुलिस की एक अलग ही तस्वीर सामने आती है. झुंझुनूं की महिला थानाधिकारी अभिलाषा रात के अंधेरे में शहर की सुरक्षा के लिए गश्त पर निकलती हैं, तो उनकी गाड़ी में अपराध रोकने की जिम्मेदारी के साथ कुछ भोजन के पैकेट और कंबल भी होते हैं. उनकी कोशिश रहती है कि शहर में कोई बेसहारा भूखा न सोए और सर्द रातों में किसी जरूरतमंद को ठिठुरने के लिए मजबूर न होना पड़े.

आमतौर पर पुलिस की रात्रिकालीन गश्त का मकसद अपराधों पर नजर रखना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है. महिला थानाधिकारी अभिलाषा ने इस जिम्मेदारी के साथ सेवा का एक और पहलू जोड़ दिया है. गश्त के दौरान फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले असहाय लोगों को देखकर वे उनके पास रुकती हैं और उन्हें भोजन का पैकेट देती हैं. सर्दियों में उनकी गाड़ी में कंबल और शॉल भी रखे रहते हैं, ताकि जरूरतमंदों को ठंड से बचने में मदद मिल सके.

गश्त पर निकलने से पहले रखवाती हैं 5 से 10 भोजन के पैकेटअभिलाषा बताती हैं कि वे रात्रिकालीन गश्त के दौरान अपने साथ पांच से दस भोजन के पैकेट रखती हैं. गश्त के दौरान जब फुटपाथ या किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई बेसहारा व्यक्ति भूखा दिखाई देता है, तो वे उसे भोजन उपलब्ध कराती हैं. सर्दियों में गाड़ी में कंबल और शॉल भी रखती हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी को राहत दी जा सके. उनकी इस पहल में एक खास संवेदनशीलता भी दिखाई देती है. यदि किसी दिन गश्त के दौरान भोजन लेने वाला कोई जरूरतमंद नहीं मिलता, तो वे भोजन को व्यर्थ नहीं जाने देतीं, बल्कि सुबह उसे गायों को खिला देती हैं. यानी उनकी कोशिश रहती है कि भोजन का सदुपयोग हो और कोई भी पैकेट बेकार न जाए.

बचपन के संस्कारों से मिली सेवा की प्रेरणाअभिलाषा का कहना है कि बचपन में परिवार से मिले संस्कारों ने उन्हें जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा दी. इसी वजह से वे अपनी ड्यूटी के साथ असहाय और बेसहारा लोगों के लिए भी समय निकालती हैं. उनके लिए सेवा केवल किसी खास अवसर तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. वे परिवार में खुशियों के मौकों को भी जरूरतमंदों के साथ साझा करती हैं. जन्मदिन या अन्य खुशी के अवसरों पर अनाथ आश्रमों और ऐसी जगहों पर जाकर समय बिताती हैं, जहां जरूरतमंद बच्चे रहते हैं. उनका मानना है कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं और किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना भी अपने आप में बड़ी संतुष्टि है.

जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में मदद करना चाहती हैंअभिलाषा की सोच भोजन और कपड़ों की मदद तक सीमित नहीं है. वे जरूरतमंद बालिकाओं और बच्चों की शिक्षा में सहयोग करना चाहती हैं, ताकि आर्थिक परिस्थितियां उनके सपनों की राह में बाधा न बनें. उनका मानना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए अवसर और सहयोग मिले, तो वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं. इस काम में उनके पति एसआई मुकेश किलानियां भी उनका प्रोत्साहन करते हैं. वे भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को कोचिंग दिलाने में सहयोग करते हैं. दोनों का प्रयास है कि जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलें और वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें.

कानून के साथ संवेदना का संदेशपुलिस की वर्दी को अक्सर सख्ती, अनुशासन और कार्रवाई से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन महिला थानाधिकारी अभिलाषा की यह पहल बताती है कि कानून की जिम्मेदारी निभाते हुए समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशील भी रहा जा सकता है. रात में शहर की सुरक्षा के लिए निकलने वाली उनकी गाड़ी में रखे भोजन के पैकेट और कंबल एक छोटी-सी पहल जरूर हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा भाव बड़ा है. यह उस जिम्मेदारी का विस्तार है, जिसमें समाज के हर व्यक्ति की सुरक्षा के साथ उसकी बुनियादी जरूरतों के प्रति संवेदना भी शामिल है. अभिलाषा की पहल एक संदेश देती है कि इंसानियत दिखाने के लिए किसी बड़े आयोजन या विशेष अवसर का इंतजार करना जरूरी नहीं है. कभी किसी भूखे को भोजन देना, ठंड से कांपते व्यक्ति को कंबल देना या किसी बच्चे की पढ़ाई में मदद करना भी समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बन सकता है. खाकी के साथ जुड़ी यह संवेदना पुलिस और आमजन के बीच भरोसे और मानवीय जुड़ाव को मजबूत करने की प्रेरणा देती है.

About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…

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Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan

First Published :

October 26, 2026, 18:15 IST

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