खाद की किल्लत पर नरेश मीणा का जयपुर कूच, शिवदासपुरा टोल पर भारी पुलिस बल तैनात

जयपुर. राजस्थान में खाद की किल्लत, महंगे दाम और खाद के साथ जबरन दूसरी चीजें देने के आरोपों को लेकर नरेश मीणा का आंदोलन जारी है. बुधवार को नरेश मीणा ने निवाई से जयपुर के लिए कूच किया. फिलहाल चाकसू में उनकी सभा चल रही है. इसके बाद उन्होंने जयपुर के शहीद स्मारक पहुंचकर किसानों की मांगों को लेकर आंदोलन करने का ऐलान किया है.
नरेश मीणा के साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद हैं. उनके जयपुर कूच को देखते हुए जिला पुलिस और प्रशासन भी लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है. शिवदासपुरा टोल पर पुलिस ने रास्ता रोक दिया है. यहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं. वाटर कैनन के साथ STF और RAC के सैकड़ों जवान भी मौके पर बताए जा रहे हैं. कई इंस्पेक्टर और RPS अधिकारी भी व्यवस्था संभाल रहे हैं.
चाकसू में सभा, आगे जयपुर जाने का ऐलाननरेश मीणा ने बुधवार सुबह निवाई से जयपुर की ओर कूच किया था. रास्ते में समर्थक उनके साथ जुड़ते गए. चाकसू पहुंचने के बाद सभा की गई. यहां से उन्होंने फिर जयपुर जाने का ऐलान किया. नरेश मीणा का कहना है कि किसानों की खाद से जुड़ी समस्याओं को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है. उनकी प्रमुख मांगों में डीएपी और यूरिया की उपलब्धता, तय कीमत पर खाद मिलना, खाद के साथ दूसरी चीजों की जबरन बिक्री यानी अटैचमेंट पर रोक और किसानों को दिन में पर्याप्त बिजली देना शामिल है. इससे पहले वह बारां से जयपुर की ओर किसान पदयात्रा भी निकाल चुके हैं और आमरण अनशन पर बैठे हैं. हाल के दिनों में उनकी जयपुर कूच की तैयारी को लेकर प्रशासन और उनके बीच बातचीत भी हुई थी.
शिवदासपुरा टोल पर भारी पुलिस बलनरेश मीणा के जयपुर पहुंचने की घोषणा के बाद पुलिस ने शिवदासपुरा टोल पर सुरक्षा बढ़ा दी. मौके पर वाटर कैनन और STF-RAC के जवान तैनात किए गए हैं. पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में रास्ते पर निगरानी रखी जा रही है. नरेश मीणा और उनके समर्थकों को यहां रोके जाने के बाद अब आगे की स्थिति पर नजर है. उनका कहना है कि वे किसानों की मांगों को लेकर जयपुर में शहीद स्मारक पर आंदोलन करेंगे. इस बीच नरेश मीणा तीसरे मोर्चे से जुड़े नेताओं से भी आंदोलन में साथ आने की अपील कर रहे हैं. उन्होंने हनुमान बेनीवाल, राजेंद्र गुढ़ा समेत कई नेताओं के समर्थन का दावा किया है. पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा भी उनके साथ मौजूद हैं.
खाद के साथ अटैचमेंट का भी मुद्दा क्या है?इस आंदोलन में सिर्फ खाद की कमी का मुद्दा नहीं है. किसानों की नाराजगी खाद के साथ दूसरी चीजें लेने के लिए मजबूर किए जाने को लेकर भी है. नरेश मीणा का आरोप है कि किसानों को खाद लेने के लिए अटैचमेंट के नाम पर महंगा सामान भी दिया जा रहा है. इसी के साथ डीएपी और यूरिया की उपलब्धता और कीमत को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. राजस्थान में इस समय रबी सीजन की तैयारियां चल रही हैं और किसानों के लिए खाद की समय पर उपलब्धता अहम है. सरकार की ओर से राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक होने की बात कही गई है, जबकि दूसरी तरफ कई जगह किसान कतार और उपलब्धता की समस्या की शिकायत कर रहे हैं. यही अंतर अब आंदोलन का बड़ा मुद्दा बन गया है.
क्या पिछली सरकार में हालात अच्छे थे?राजस्थान में खाद की कमी को लेकर विवाद नया नहीं है. वर्ष 2021 में भी रबी की बुवाई के समय अक्टूबर और नवंबर में किसानों को डीएपी और यूरिया के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ा था. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर खाद की कम आपूर्ति का मुद्दा उठाया था. नवंबर 2021 के आंकड़ों को लेकर गहलोत सरकार ने बताया था कि अक्टूबर-नवंबर के लिए 8 लाख मीट्रिक टन यूरिया की मांग के मुकाबले 5.52 लाख मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हुई, जिससे करीब 2.48 लाख मीट्रिक टन की कमी बताई गई थी.
तब केंद्र पर फोड़ा था ठीकराउस समय कांग्रेस सरकार ने केंद्र पर पर्याप्त खाद नहीं देने का आरोप लगाया था. वहीं भाजपा ने राज्य सरकार पर खाद के इंतजाम और कालाबाजारी रोकने में नाकाम रहने के आरोप लगाए थे. श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित कृषि बहुल इलाकों में किसानों की नाराजगी और प्रदर्शन भी सामने आए थे. यानी खाद को लेकर राजस्थान में सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले भी होते रहे हैं. इस बार भी यही मुद्दा आंदोलन और राजनीतिक बयानबाजी के बीच पहुंच गया है.
पहले भी कई मुद्दों पर आंदोलन कर चुके हैं नरेश मीणानरेश मीणा इससे पहले भी अलग-अलग किसान और जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन करते रहे हैं. पांचना बांध के पानी के बंटवारे और समझौते को लेकर उन्होंने पूर्वी राजस्थान के किसानों के पक्ष में आंदोलन किया है. छात्र राजनीति के दौर में भी उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रों की मांगों को लेकर प्रदर्शन किए थे. उस समय वह NSUI से जुड़े छात्र नेता और RUSU महासचिव रहे. छात्र मांगों को लेकर उन्होंने 9 दिन का आमरण अनशन भी किया था. जुलाई 2025 में उन्होंने करीब 150 किलोमीटर की जन क्रांति यात्रा शुरू की थी. इसका मकसद क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और जनहित के मुद्दों को सरकार तक पहुंचाना बताया गया था. बाद में झालावाड़ के सरकारी स्कूल हादसे के बाद उन्होंने यह यात्रा रोक दी थी और पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे थे.
समरावता से लेकर झालावाड़ तक आंदोलन
नवंबर 2024 में देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव को उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार किया था. नरेश मीणा ने ग्रामीणों की इस मांग का समर्थन किया था. इसी दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विवाद हुआ और SDM को थप्पड़ मारने का मामला सामने आया था. बाद में इस मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई.
सितंबर 2025 में झालावाड़ के स्कूल हादसे में मारे गए बच्चों के परिवारों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर उन्होंने जयपुर के शहीद स्मारक पर करीब 15 दिन तक अनशन किया था. उस आंदोलन में मृतकों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग प्रमुख रही थी.
अब अक्टूबर 2026 में उनका आंदोलन किसानों की खाद और बिजली की समस्याओं को लेकर है. इस बार आंदोलन का अगला पड़ाव जयपुर बताया जा रहा है. फिलहाल शिवदासपुरा टोल पर पुलिस की तैनाती और चाकसू में चल रही सभा के बीच सबकी नजर इस बात पर है कि नरेश मीणा और उनके समर्थक आगे क्या कदम उठाते हैं.



