गांवों की सरकार पर किसका चलेगा सिक्का? डॉक्टर, इंजीनियर और वकील भी ठोक रहे ताल

जयपुर. राजस्थान के पंचायत चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक नेताओं के बीच नहीं है. कोई मरीजों का इलाज करता है, कोई इंजीनियरिंग की पढ़ाई और पेशेवर अनुभव रखता है, तो कोई अदालत में कानूनी दांव-पेच लड़ता है. अब यही लोग गांवों की राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. जी हां, गांवों की सरकार में अपनी जगह बनाने के लिए डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और ठेकेदार भी मैदान में उतर गए हैं. इनकी नजर जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य की सीटों पर है, जहां जीत हासिल करने के बाद जिला प्रमुख और प्रधान बनने का रास्ता खुल सकता है.
भाजपा, कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी सहित अलग-अलग दलों ने ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है. जयपुर, जोधपुर, अजमेर और डूंगरपुर में पेशेवर लोग भी चुनाव लड़ रहे हैं. खास बात यह है कि कुछ जिलों में वकीलों की अच्छी-खासी भागीदारी दिखाई दे रही है, तो कहीं डॉक्टर और इंजीनियर भी राजनीतिक पारी शुरू करने को तैयार हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या पेशेवर अनुभव इन उम्मीदवारों को जनता का भरोसा दिला पाएगा? या फिर पंचायत चुनाव में स्थानीय पकड़, जातीय समीकरण और राजनीतिक पहचान ही जीत-हार तय करेंगे? इसका जवाब चुनाव परिणाम आने के बाद भी मिल पाएगा.
डूंगरपुर में डॉक्टर, जोधपुर में इंजीनियर ने संभाला चुनावी मोर्चा
पंचायत चुनाव में पेशेवर पहचान वाले उम्मीदवारों में डूंगरपुर के डॉ. दीपक धोघरा और जोधपुर की मोनिका शामिल हैं. डूंगरपुर जिला परिषद के वार्ड 37 से भारत आदिवासी पार्टी ने डॉक्टर दीपक धोघरा को प्रत्याशी बनाया है. वे एमबीबीएस-एमएस हैं. वहीं, जोधपुर जिला परिषद के वार्ड 31 से भाजपा प्रत्याशी मोनिका इंजीनियर हैं. दोनों उम्मीदवार जिला परिषद सदस्य बनने के लिए चुनाव मैदान में हैं. जिला परिषद में बहुमत और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला प्रमुख का चुनाव होता है.
इस बार वकील भी चुनाव में आजमा रहे किस्मत
पंचायत चुनाव में वकीलों की मौजूदगी भी चर्चा में है. जयपुर जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनावों में वकालत से जुड़े 10 प्रत्याशी मैदान में हैं. जोधपुर जिला परिषद के वार्ड 10 से कांग्रेस प्रत्याशी इंद्रा राम और वार्ड 30 से भाजपा प्रत्याशी कानाराम पेशे से वकील हैं. अजमेर जिला परिषद के वार्ड 8 से कांग्रेस प्रत्याशी गोवर्धन गुर्जर भी वकालत करते हैं. वहीं जोधपुर के वार्ड 22 से भाजपा प्रत्याशी पंकज बोहरा वकील होने के साथ विधि प्रकोष्ठ मोर्चा के मंडल अध्यक्ष भी हैं. जयपुर के वार्ड 30 से कांग्रेस प्रत्याशी कंचन चौधरी एलएलबी हैं. डूंगरपुर में कांग्रेस के वार्ड 7 से रतन और वार्ड 25 से लालशंकर पाटीदार भी बीए-एलएलबी हैं. यानी अदालतों में कानूनी दलीलें रखने वाले ये उम्मीदवार अब जनता के बीच अपना पक्ष रख रहे हैं.
ठेकेदारी के अनुभव के साथ सियासत में भी दांव
पंचायत चुनाव में ठेकेदारी से जुड़े लोग भी पीछे नहीं हैं. जलदाय विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग और बिजली निगमों से जुड़े काम करने वाले ठेकेदार भी चुनावी मैदान में उतरे हैं. जयपुर में पंचायत समिति सदस्य के लिए तीन ठेकेदार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि जोधपुर जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में ठेकेदारी से जुड़े 10 लोगों ने नामांकन दाखिल किया है.
पेशेवर पहचान कितनी आएगी काम?
डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और ठेकेदारों के चुनाव लड़ने से पंचायत चुनाव का मुकाबला दिलचस्प हो गया है. हालांकि, पेशेवर योग्यता अपने आप में जीत की गारंटी नहीं है. उम्मीदवारों को स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और मतदाताओं की अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होगा. अब देखना होगा कि इन प्रत्याशियों का पेशेवर अनुभव और सामाजिक संपर्क उन्हें चुनाव में कितनी बढ़त दिलाते हैं और कौन जिला प्रमुख तथा प्रधान बनने की दौड़ में आगे निकलता है.



