Rajasthan

घड़ियालों के नन्हे बच्चों के लिए जगी राहत की उम्मीद, जीवित रहने की दर 70% तक

Last Updated:August 27, 2026, 08:52 IST

Chambal River Flood Update: चंबल के कैचमेंट एरिया में कम बारिश के चलते इस बार नदी में बाढ़ का खतरा काफी कम है. इसका सबसे बड़ा लाभ मई-जून में अंडों से निकले घड़ियालों के नन्हे बच्चों को मिलेगा, जो हर साल तेज बहाव में बह जाते थे. प्राकृतिक रूप से घड़ियाल बच्चों की उत्तरजीविता दर 1-2% होती है, लेकिन इस बार इसके 70% तक रहने की उम्मीद है. वर्तमान में नदी का गेज 121.66 मीटर है और स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है.

ख़बरें फटाफट

धौलपुर: राजस्थान के धौलपुर जिले से बहने वाली प्रसिद्ध चंबल नदी में इस बार मानसून की धीमी रफ्तार और कैचमेंट एरिया में कम बारिश के कारण भीषण बाढ़ के आसार बेहद कम दिखाई दे रहे हैं. हालांकि बीच में काली सिंध बांध से छोड़े गए पानी के कारण नदी का जलस्तर एक बार खतरे के निशान के करीब जरूर पहुंचा था, लेकिन फिलहाल नदी पूरी तरह सामान्य और शांत स्थिति में बह रही है. अगस्त का महीना खत्म होने को है और आमतौर पर इस समय तक चंबल अपने रौद्र रूप में आ जाती है. इस बार बाढ़ न आने से चंबल के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और विशेष रूप से जलीय जीवों को बड़ी राहत मिलती दिख रही है.

बाढ़ का खतरा टलने का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष फायदा चंबल नदी में रहने वाले घड़ियालों के नन्हे बच्चों (हैचलिंग्स) को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. हर साल मई और जून के महीने में घड़ियालों के बच्चे अंडों से बाहर निकलते हैं. इसके ठीक बाद आने वाली मानसून की बाढ़ इन नवजात जीवों के लिए सबसे बड़ी प्राकृतिक चुनौती बन जाती है. नदी के तेज बहाव और उफान में हर साल सैकड़ों नन्हे घड़ियाल बह जाते हैं, जिससे उनकी अकाल मौत हो जाती है.

प्राकृतिक आवास में अस्तित्व का संघर्षविशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक आवास में घड़ियाल के बच्चों के जीवित रहने की सामान्य दर महज 1 से 2 फीसदी ही होती है. तेज जलधारा के अलावा चील, सियार और अन्य जंगली जीव भी इन छोटे घड़ियालों व उनके अंडों को अपना शिकार बना लेते हैं. कई बार नन्हे घड़ियाल अवैध शिकारियों के जालों में भी फंस जाते हैं. तेज बाढ़ इस नुकसान को कई गुना बढ़ा देती है. इसी खतरे से प्रजाति को बचाने के लिए धौलपुर के देवरी स्थित घड़ियाल प्रजनन केंद्र में करीब 200 अंडे लाकर बच्चों को सुरक्षित माहौल में बड़ा किया जाता है और बाद में नदी में पुनः छोड़ा जाता है.

इस वर्ष 70 फीसदी तक बच्चों के बचने की संभावनावन और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार चंबल नदी में भीषण उफान नहीं आता है, तो प्राकृतिक आवास में घड़ियाल के बच्चों के सुरक्षित रहने की दर बढ़कर 70 फीसदी तक पहुंच सकती है. इससे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में घड़ियालों की आबादी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जो कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद सकारात्मक संकेत है.

वर्तमान जलस्तर और केंद्रीय जल आयोग की निगरानीचंबल नदी का सामान्य गेज स्तर लगभग 120 मीटर रहता है और अगस्त के अंतिम सप्ताह में यह 121.66 मीटर के आसपास बना हुआ है. इसकी तुलना में वर्ष 2025 में इसी अवधि के दौरान चंबल में भीषण बाढ़ आई थी, जिससे तटीय क्षेत्र के लगभग 20 गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया था. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार जलस्तर पर लगातार 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है. हालांकि आगामी दिनों में बारिश होने पर जलस्तर में कुछ वृद्धि हो सकती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए विनाशकारी बाढ़ की संभावना बेहद कम है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

और पढ़ेंLocation :

Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan

First Published :

August 27, 2026, 08:51 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj