जापान में गोविंद ने राधा के साथ जीता रजत, गाइड रनर बनकर दिया साथ

Last Updated:October 23, 2026, 15:27 IST
Asian Para games Japan : जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में जालोर के गोविंद सोलंकी ने गाइड रनर के रूप में भारतीय एथलीट राधा वेंकटेश के साथ मिलकर 1500 मीटर रेस में रजत पदक जीता है. जापान में रजत पदक जीतकर इस जोड़ी ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और तालमेल का प्रदर्शन किया है.
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जालोर. जालोर जिले के उम्मेदाबाद गांव के गोविंद सोलंकी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी पहचान बनाई है. जापान के आइची-नागोया में आयोजित 5वें एशियन पैरा गेम्स में गोविंद ने गाइड रनर के रूप में भारतीय पैरा एथलीट राधा वेंकटेश का साथ दिया. दोनों ने महिलाओं की 1500 मीटर रेस में भारत के लिए रजत पदक हासिल किया. गोविंद ने राधा के साथ दौड़ते हुए रेस पूरी करने में उन्हें महत्वपूर्ण सहयोग दिया.
19 अक्टूबर को हुई इस स्पर्धा में राधा वेंकटेश ने 5 मिनट 30.90 सेकंड में दौड़ पूरी कर सिल्वर मेडल जीता. वहीं, भारत की ही सौम्या कुमार ने 5 मिनट 12.39 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इस तरह 1500 मीटर स्पर्धा में भारत के खाते में गोल्ड और सिल्वर, दोनों पदक आए.
2023 में भी जीत चुके हैं स्वर्ण पदकगोविंद सोलंकी और राधा वेंकटेश की जोड़ी की यह पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि नहीं है. वर्ष 2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भी दोनों ने साथ दौड़कर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था. उस दौरान राधा ने महिलाओं की 1500 मीटर टी-13 श्रेणी में 5 मिनट 19 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया था. जापान में रजत पदक जीतकर इस जोड़ी ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और तालमेल का प्रदर्शन किया है.
2016 में शुरू हुआ था खेल का सफरगोविंद के खेल सफर की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई. उन्होंने तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पहली बार हिस्सा लिया. इसके बाद उन्होंने 2022 और 2023 में दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया. इन प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने एक बार पहला और एक बार दूसरा स्थान हासिल किया.
पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच जारी रखा अभ्यासउम्मेदाबाद में जन्मे गोविंद ने गांव में पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की. इसके बाद वे बेंगलुरु चले गए और पिता के साथ पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बंटाने लगे. कारोबार की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने दौड़ने का अभ्यास नहीं छोड़ा. गांव आने पर वे आज भी सुबह उम्मेदाबाद से डांगरा तक करीब 12 किलोमीटर दौड़ लगाते हैं और वापस लौटकर अपना अभ्यास पूरा करते हैं. पिता के निधन के बाद परिवार और व्यवसाय की जिम्मेदारियां भी गोविंद के हिस्से आईं, लेकिन उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून बनाए रखा. नियमित अभ्यास और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने गाइड रनर के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
October 23, 2026, 15:27 IST



