जालौर की 700 साल पुरानी ऐतिहासिक छतरी का रहस्य

Last Updated:October 20, 2026, 08:14 IST
Sundar Raika Chhatri Jalor: राजस्थान के जालौर में स्थित सुंदर रायका की 700 साल पुरानी ऐतिहासिक छतरी और मूर्तियां रायका (देवासी) समाज की आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र हैं. यह प्राचीन विरासत समाज को अपने पूर्वजों और संस्कृति से जोड़े रखती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सुंदर रायका समाज के सम्मानित पूर्वज रहे हैं, जिनकी स्मृति में बनी यह छतरी आज भी जालौर के इतिहास का एक गौरवशाली हिस्सा बनी हुई है.
ख़बरें फटाफट
जालौर: राजस्थान के जालौर की धरती अपने गर्भ में इतिहास के कई अनछुए अध्याय समेटे हुए है. यहाँ की हर एक धरोहर और जगह की अपनी एक अलग और अनूठी कहानी है. जालौर में स्थित सुंदर रायका से जुड़ी यह विरासत बेहद खास है, क्योंकि इसका सीधा संबंध लंबे समय से रायका (देवासी) समाज की गहरी आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है. करीब 700 साल पुरानी इस ऐतिहासिक धरोहर में सुंदर रायका की स्मृति से जुड़ी एक प्राचीन छतरी और मूर्तियां आज भी मौजूद हैं. समय के चक्र के साथ भले ही सब कुछ बदल गया हो, लेकिन सुंदर रायका से जुड़ी यह अनमोल याद आज भी समाज के दिलों और इतिहास में पूरी तरह जीवंत है.
रायका समाज के लोगों के लिए यह ऐतिहासिक स्थल केवल एक पुरानी छतरी या पत्थरों की मूर्तियां भर नहीं है, बल्कि यह उनके लिए अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान, समाज की प्राचीन परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़ने का एक बड़ा माध्यम है. यही मुख्य वजह है कि समाज के लोग आज भी सुंदर रायका को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ याद करते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार यहाँ मौजूद प्राचीन प्रतिमाएँ और छतरी सदियों पुरानी लोक-परंपराओं से जुड़ी हुई हैं. इनसे जुड़ी मान्यताएँ और कहानियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही हैं, जिससे बुजुर्गों के मुँह से सुनी गई बातें आज की नई पीढ़ी तक आसानी से पहुँच रही हैं.
700 साल पुरानी छतरी और सुंदर भाड़का से जुड़ी मान्यताएँइस ऐतिहासिक जगह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ इतिहास और समाज की जीवंत परंपरा एक साथ देखने को मिलती है. एक तरफ जहाँ पुरानी छतरी और कलात्मक मूर्तियां बीते हुए कल की याद दिलाती हैं, वहीं दूसरी तरफ रायका समाज की अटूट आस्था इस विरासत को आज भी खास महत्व देती है. जानकारों के अनुसार सुंदर रायका की स्मृति से जुड़ी इस छतरी को लगभग 700 साल पुराना माना जाता है. इसके अलावा देवासी समाज की मान्यताओं के अनुसार यहाँ सुंदर भाड़का और सुंदर रायका से जुड़ी मूर्तियां भी लंबे समय से स्थापित हैं, जिनके इतिहास और लोकगाथाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की मान्यताएँ प्रचलित हैं.
नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ती यह ऐतिहासिक धरोहरस्थानीय मान्यताओं में सुंदर रायका को समाज के बेहद सम्मानित और प्रतापी पूर्वजों में गिना जाता है और यह पूरा स्थान उन्हीं की याद को समर्पित है. करीब 700 साल से उनकी स्मृति को यहाँ छतरी और मूर्तियों के रूप में लगातार सम्मान दिया जाता रहा है. रायका समाज के लिए ऐसी विरासतों का महत्व केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थान समाज को उनके पुराने पुरखों और रीति-रिवाजों से जोड़े रखता है. आज की युवा पीढ़ी जब इस ऐतिहासिक स्थल पर पहुँचती है, तो उन्हें अपने गौरवशाली अतीत का अहसास होता है. सदियाँ बीत चुकी हैं और समय बहुत बदल चुका है, लेकिन सुंदर रायका का नाम और उनकी यादें आज भी रायका समाज के बीच पूरी शान से कायम हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
और पढ़ेंLocation :
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
October 20, 2026, 08:14 IST



