जैवलिन मिसाइल: बटन दबाते ही भस्म होंगे दुश्मन के बख्तरबंद टैंक, भारत आ रहा दुनिया का सबसे खूंखार किलर

नई दिल्ली: भारतीय सेना की मारक क्षमता में अब एक ऐसा ब्रह्मास्त्र जुड़ने जा रहा है, जिससे सरहद पार बैठे दुश्मनों के पसीने छूट जाएंगे. भारत ने अमेरिका से दुनिया का सबसे खतरनाक माना जाने वाला जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस यानी एलओए पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. यह डिफेंस डील अमेरिका के फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रोसेस के तहत पूरी की जा रही है. इस एग्रीमेंट के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास यह अत्याधुनिक मीडियम रेंज हथियार मौजूद है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस कदम का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला दोनों देशों की सैन्य साझेदारी को नया आयाम देगा. इस वेपन सिस्टम के आने से भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.
आखिर जैवलिन मिसाइल को क्यों माना जाता है टैंकों का यमराज?
जैवलिन सिस्टम आधुनिक युद्ध के मैदान का सबसे भरोसेमंद और सटीक एंटी-टैंक वेपन है. यह सिस्टम पूरी तरह से ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ तकनीक पर काम करता है. इसका मतलब यह है कि सैनिक को मिसाइल दागने के बाद उसे गाइड करने की जरूरत नहीं होती. मिसाइल खुद ही अपने टारगेट को ट्रैक करके उसे पूरी तरह तबाह कर देती है.
इसे अमेरिकी सेना और मरीन कॉर्प्स लंबे समय से इस्तेमाल कर रहे हैं. यह हथियार न सिर्फ भारी भरकम बख्तरबंद गाड़ियों को उधेड़ सकता है, बल्कि दुश्मनों के मजबूत बंकरों और सैन्य ठिकानों को भी मलबे में बदल देता है.
जैवलिन मिसाइल का इस्तेमाल करते यूक्रेनी सैनिक. (File Photo : Reuters)
क्या भारत में ही तैयार होगी यह घातक मिसाइल?
इस ऐतिहासिक समझौते के बाद केवल हथियारों की खरीद ही नहीं होगी. इसके जरिए दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच साझा तकनीक और को-प्रोडक्शन के नए दरवाजे भी खुलेंगे.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, ‘यह समझौता भारतीय सेना के लिए अमेरिकी समर्थन की गहराई को दिखाता है.’ उन्होंने मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग का हवाला देते हुए बताया कि दोनों देशों के रक्षा संबंध अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं.
जैवलिन मिसाइल सिस्टम का निर्माण आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन के जॉइंट वेंचर द्वारा किया जाता है. भविष्य में अगर इसका उत्पादन भारत में शुरू होता है, तो इससे देश के घरेलू डिफेंस सेक्टर को भारी बूस्ट मिलेगा.
लद्दाख और रेगिस्तानी बॉर्डर पर भारतीय सेना को इससे कितना फायदा मिलेगा?
पूर्वी लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों और थार के रेगिस्तान में टैंकों की मूवमेंट हमेशा चुनौतीपूर्ण रहती है. ऐसे दुर्गम इलाकों में पैदल सैनिकों के लिए जैवलिन मिसाइल एक गेम-चेंजर साबित होगी. यह कंधे पर रखकर दागा जाने वाला बेहद हल्का और पोर्टेबल वेपन सिस्टम है.
सैनिक इसे आसानी से किसी भी चोटी या छिपे हुए मोर्चे से ऑपरेट कर सकते हैं. पहाड़ी मोर्चों पर चीनी बख्तरबंद टुकड़ियों के खिलाफ यह हथियार भारतीय जवानों को अचूक बढ़त देगा. बॉर्डर पर किसी भी हिमाकत का जवाब अब सेकंडों में मिलेगा.



