झुंझुनूं के इस गांव में शादी हो या नौकरी लगे, खुशियां मनाने का तरीका है अनोखा, जानकर करेंगे तारीफ

झुंझुनूं. किसी घर में शादी हो, जन्मदिन हो या शादी की सालगिरह, परिवार में कोई नौकरी लगा हो या कोई अन्य खुशी का अवसर हो, झुंझुनूं जिले के भोड़की गांव में खुशियां केवल घरों तक सीमित नहीं रहती. यहां उत्सव की मिठास गोशाला तक भी पहुंचती है. ग्रामीण अपने घरों में होने वाले समारोहों के साथ गोवंश के लिए भी सवामणी करवाते हैं. गांव में गोसेवा की यह परंपरा अब सामूहिक संस्कार का रूप ले चुकी है. ग्रामीणों के सहयोग से संचालित जमवाय ज्योति गोशाला में आज 1007 गाय, नंदी और बछड़ों की देखभाल की जा रही है. करीब तीन हजार घरों की आबादी वाले गांव में गोसेवा के प्रति लोगों का जुड़ाव इस परंपरा को खास बनाता है. ग्रामीणों का मानना है कि खुशियों के अवसर पर गोवंश की सेवा करने से उत्सव का आनंद और बढ़ जाता है. इसी सोच के साथ शुरू हुई सवामणी की परंपरा आज भी जारी है. गोशाला में सवामणी के लिए अग्रिम बुकिंग भी होती है.
गांव में गोसेवा को व्यवस्थित रूप देने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में जमवाय ज्योति गोशाला की स्थापना की गई थी. गोशाला अध्यक्ष एवं पूर्व सरपंच शिवराम गोदारा ने बताया कि शुरुआत में 15 लोगों की बैठक हुई थी. इसमें गोशाला शुरू करने का निर्णय लिया गया और जनसहयोग से ढाई लाख रुपए जुटाए गए. इसके बाद 18 सितंबर 2017 को शादी की खुशी में गोशाला में पहली सवामणी हुई. इसकी शुरुआत समिति अध्यक्ष शिवराम गोदारा ने की थी. धीरे-धीरे अन्य ग्रामीण भी इस परंपरा से जुड़ते गए. अब गांव में शादी, जन्मदिन, सालगिरह, छुछक और नौकरी लगने जैसे अवसरों पर गोवंश के लिए सवामणी करवाने की परंपरा निभाई जा रही है.
1500 रुपए से होती है सवामणी की शुरुआत
गोशाला में सवामणी के लिए न्यूनतम 1500 रुपए का सहयोग निर्धारित है. इच्छानुसार कोई भी व्यक्ति इससे अधिक राशि दे सकता है. ग्रामीण अपने परिवार के उत्सवों पर गोवंश के लिए भोजन की व्यवस्था करवाते हैं. गोशाला समिति के सचिव कैलाश डूडी और कोषाध्यक्ष रामसिंह शेखावत ने बताया कि सवामणी के लिए इतनी राशि जमा हो चुकी है कि आने वाले कई महीनों तक इसकी व्यवस्था की जा सकती है. गोशाला के संचालन में राजनेताओं, भामाशाहों और जागरूक लोगों का सहयोग मिलता रहता है. समिति के सदस्य भी शादी-विवाह और अन्य समारोहों में पहुंचकर लोगों को गोसेवा के लिए प्रेरित करते हैं.
38 गायों के नाम है एक-एक लाख रुपए की एफडी
गोशाला में गोवंश के भोजन और देखभाल के साथ उनके लिए आर्थिक व्यवस्था भी की गई है. यहां 38 गायों को गोद लिया गया है. इन गायों के नाम पर एक-एक लाख रुपए की एफडी करवाई गई है. इनसे मिलने वाले ब्याज से गायों के लिए पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है. गोशाला करीब 100 बीघा जमीन पर फैली हुई है. चारदीवारी से घिरे परिसर में गोवंश की देखरेख और भोजन की व्यवस्था के लिए समिति बनाई गई है. गायों की सेवा के लिए सेवादार भी नियुक्त हैं. बीमार गोवंश के उपचार के लिए यहां अस्पताल बनाया गया है. इस व्यवस्था में ग्रामीणों के साथ प्रवासी लोगों का भी योगदान रहता है.
गोशाला को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की है तैयारी
जमवाय ज्योति गोशाला अब केवल गोवंश की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि परिसर को आकर्षक स्वरूप देने के प्रयास भी किए जा रहे हैं. यहां भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पर्वत उठाए हुए प्रतिमा बनाई गई है. दूसरी ओर भगवान शिव की तपस्या में लीन प्रतिमा भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींचती है. परिसर में गार्डन, झूले और फिसलन पट्टी जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही है. सफेद कबूतर और बतख भी यहां आने वाले लोगों के आकर्षण का हिस्सा है. गोशाला को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है.
गोसेवा को उत्सव से जोड़कर पेश की मिसाल
भोड़की में गोशाला के लिए ग्रामीणों का निरंतर सहयोग और उत्सवों पर सवामणी करवाने की परंपरा सामूहिक सहभागिता का उदाहरण है. यहां गोसेवा किसी एक परिवार या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे गांव की भागीदारी से जुड़ी पहल बन गई है. घर में खुशियां आने पर गोवंश के लिए भोजन की व्यवस्था करना ग्रामीणों की परंपरा का हिस्सा है. इसी सामूहिक प्रयास से जमवाय ज्योति गोशाला में सैकड़ों गोवंश की देखभाल की जा रही है.



