Rajasthan

दिवाली पर जलेगा 51 हजार गोबर के दीपकों का उजाला, 108 मंदिरों तक पहुंचेगा गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Last Updated:November 04, 2026, 17:28 IST

Alwar Diwali Celebration: अलवर जिले के गोविंदगढ़ में इस बार दिवाली गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाई जाएगी. सेवल मंदिर की पहल पर 51 हजार से अधिक गोबर के दीपक एक साथ प्रज्वलित किए जाएंगे. मंदिर परिसर में डेढ़ लाख से ज्यादा दीपक तैयार हो रहे हैं. मंदिर आने वाले प्रत्येक परिवार को 21 दीपक निःशुल्क दिए जाएंगे. खास बात है कि दिवाली के बाद इन दीपकों का उपयोग जैविक खाद के रूप में भी किया जा सकेगा.

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अलवर में दिवाली पर जलेगा 51 हजार गोबर के दीपकों का उजालाZoomगोविंदगढ़ में जलेगा 51 हजार गोबर के दीपकों का उजाला

अलवर: अलवर जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र में इस बार की दीपावली बेहद खास होने जा रही है. जहां एक तरफ पर्व पर हर घर में दीप जलाए जाते हैं, वहीं इस बार गोविंदगढ़ में जलने वाला प्रत्येक दीपक गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संदेश देगा. स्थानीय सेवल मंदिर ने इस प्राचीन परंपरा को एक बड़े जनअभियान का रूप दे दिया है, जिसकी दिव्य रोशनी क्षेत्र के 108 मंदिरों तक पहुंचेगी. दीपावली की पवित्र गोधूली बेला में एक साथ 51 हजार से अधिक गोबर के दीपक प्रज्वलित करने का लक्ष्य रखा है.

पिछले साल की सफलता को देखते हुए इस बार भी मंदिर परिसर में डेढ़ लाख से अधिक गोबर के विशेष दीपक तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें लेकर क्षेत्रवासियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है.

संदेश समाज के हर घर तक आसानी से पहुंच सकेपारंपरिक दीयों से हटकर तैयार किए जा रहे ये दीपक पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैं. इन दीपकों को बनाने में मुख्य रूप से शुद्ध गोबर, लकड़ी के बुरादे और प्राकृतिक ग्वार गम का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ये प्रदूषण मुक्त और इको-फ्रेंडली हैं. मंदिर आने वाले प्रत्येक परिवार को सेवा भाव के तहत 21 दीपक निःशुल्क भेंट किए जा रहे हैं, ताकि गौसेवा और पर्यावरण का यह पावन संदेश समाज के हर घर तक आसानी से पहुंच सके. मंदिर प्रशासन की यह पहल न केवल पर्यावरण को बचाने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि पारंपरिक कला और संस्कृति को भी बढ़ावा दे रही है.

धरती माता को उपजाऊ बनाने में भी अपना बहुमूल्य योगदानमंदिर से जुड़े जमना जीवन कृष्ण दास जी ने इस पहल के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह अभियान केवल पारंपरिक दीपदान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह गौमाता के प्रति हमारी अटूट श्रद्धा, भारतीय संस्कृति के संवर्द्धन और प्रकृति के संरक्षण का एक दृढ़ संकल्प है. इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दीपावली का पर्व समाप्त होने के बाद ये दीपक बेकार नहीं जाएंगे, बल्कि इन्हें पौधों के गमलों में डालकर उत्तम जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकेगा. यानी इस बार के दीपक न केवल घरों को रोशन करेंगे, बल्कि धरती माता को उपजाऊ बनाने में भी अपना बहुमूल्य योगदान देंगे.

रोशनी के साथ-साथ प्रकृति और गोवंश की सेवासेवल मंदिर की इस प्रेरणादायक पहल से पूरे गोविंदगढ़ क्षेत्र में आध्यात्मिक और सकारात्मक माहौल बन गया है. ग्रामीण और शहरी, दोनों ही इलाकों के लोग बढ़-चढ़कर इस अभियान में अपनी हिस्सेदारी निभा रहे हैं. प्रशासन और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है और लोग अपनी प्राचीन संस्कृति से जुड़ते हैं. इस बार की दीपावली अलवर के इस क्षेत्र में रोशनी के साथ-साथ प्रकृति और गोवंश की सेवा का एक नया इतिहास रचने जा रही है.

About the AuthorJagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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Alwar,Rajasthan

First Published :

November 04, 2026, 17:28 IST

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