दिवाली बीतते ही मंडराएगा संकट, दिसंबर में दिखेगा सबसे विकराल रूप! अब संयुक्त राष्ट्र ने भी कर दिया अलर्ट

भले ही मॉनसून का दौर बीत गया लेकिन देश और दुनिया पर संकट मंडराता जा रहा है. आने वाले दिनों में कई देशों में सूखे की भीषण मार पड़ सकती है, जबकि कहीं-कहीं भारी प्रलय या बाढ़ के भी आसार जताए गए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने अब दिसंबर को लेकर बड़ी चेतावनी दी है, जिसमें कयामत बनकर उभर रहे एल नीनो के इस साल के आखिर में मजबूत होने की वॉर्निंग दी गई है.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन ने एल नीनो का सबसे खराब दौर बाकी होने की आशंका जताई है. डब्ल्यूएमओ का कहना है कि दिसंबर में एल नीनो का असर पीक पर पहुंच जाएगा. इसका असर भी दुनिया के तमाम हिस्सों में देखने को मिलेगा.
विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि जारी एल नीनो की घटना अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि दिसंबर में यह अपने चरम पर पहुंचेगी. इससे दुनिया के बड़े हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाएगा. संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था ने कहा कि एल नीनो असर के चलते सामान्य बारिश के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, जिससे सूखे और बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा.
क्या है एल नीनोबता दें कि एल नीनो एक जलवायु पैटर्न है, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. इससे दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है. डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा, “एल नीनो मजबूती से स्थापित हो चुका है और तेजी से मजबूत हो रहा है. पूर्वानुमान बताते हैं कि फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की लगभग 100 प्रतिशत संभावना है. यह 1950 के बाद की सबसे मजबूत घटनाओं में से एक हो सकती है.”
हालांकि सबसे बड़ी बात है कि यह घटना अक्टूबर-दिसंबर में चरम पर पहुंचेगी और 2027 के वसंत तक जारी रह सकती है. यानि संकट काल फरवरी के आसपास तक बना रह सकता है.
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत की बात करें तो एल नीनो का असर यहां भी पड़ रहा है. इस साल भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून 13 प्रतिशत कम बारिश के साथ खत्म हुआ है. महाराष्ट्र और कर्नाटक में काफी कम मात्रा में बारिश होने के चलते सूखा घोषित किया गया है. इतना ही नहीं महाराष्ट्र ने बाकी जगहों पर बेलेंस बनाने के लिए कई जिलों में 10 प्रतिशत पानी कटौती भी की है.
दुनिया में गर्मी का बना रिकॉर्ड
मॉनसून की बारिश कम होने और महासागर के पानी के गर्म होने के चलते यूरोप में इस साल सबसे गर्म गर्मियां देखी गई हैं. यहां फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ दिया. डेन्यूब, राइन और टेम्स जैसी कई बड़ी नदियां सूख गईं. कुछ में पानी नाममात्र का बचा है.
एल नीनो क्या है?
यह एक प्राकृतिक समुद्री-वायुमंडलीय घटना है, जो हर दो से सात साल में दोहराई जाती है. इसमें तीन चरण होते हैं, गर्म (एल नीनो), सामान्य और ठंडा (ला नीना). हाल के महीनों में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का तापमान तेजी से बढ़ा है. अगस्त में नीनो 3.4 क्षेत्र में तापमान सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था.
एल नीनो भारत और दुनिया के कई इलाकों में बारिश को कम करता है, जिससे सूखा पड़ता है. साथ ही तापमान को सामान्य से काफी ऊपर ले जाता है.विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में मौसम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. सरकारों और लोगों को तैयार रहने की सलाह दी गई है.



