दिवाली से पहले ही आ गई सबसे बड़ी मुसीबत, सिसकने लगे डेढ़ करोड़ लोग, दो वक्त की रोटी के पड़ जाएंगे लाले?

रिपोर्ट-सांतिया गेरा.
दिवाली से पहले ही महाराष्ट्र में बड़ी मुसीबत दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई है.राज्य में इस बार मॉनसूनी बारिश कम होने से पड़े सूखे ने कपास, सोयाबीन, दालों, फलों और सब्जियों जैसी अहम फसलों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. नकदी फसल माने जाने वाले गन्ने का भी यही हाल है. इसे लेकर नेटवर्क18 की सांतिया गोरा ने महाराष्ट्र के जालना में गन्ना किसानों से बात की है और उनका दर्द समझा है कि कैसे बारिश की कमी ने उनकी फसल को कितना नुकसान पहुंचाया है और उनकी कमाई पर इसका क्या असर पड़ा है?
बता दें कि महाराष्ट्र में सूखे का सामाजिक और आर्थिक असर दिखने लगा है. हर साल दशहरे या दिवाली के आसपास पलायन करने वाले गन्ना मजदूर इस बार कई हफ्ते पहले ही काम की तलाश में निकल पड़े हैं. जालना के गन्ना मजदूरों ने बातचीत में बताया कि सूखे के चलते इस बार भले ही उनकी दिहाड़ी कम होगी, लेकिन कम से कम पानी के इंतजाम की चिंता नहीं रहेगी.
महाराष्ट्र ने 1960 से अब तक 15 बार सूखे का सामना किया है, लेकिन 1972 का सूखा आज भी सबसे भयावह माना जाता है. अब राज्य सरकार का कहना है कि मौजूदा सूखा 1972 से भी बदतर हो सकता है. आखिर 1972 में क्या हुआ था? उस सूखे की मार झेलने वालों की जुबानी, सुनिए तबाही और संघर्ष की कहानी.
किसानों ने बताया कि सूखे जैसे संकट में सरकारी योजनाएं और पेंशन लोगों का बड़ा सहारा होती हैं. लेकिन जब यही मदद वक्त पर नहीं मिलती, तो गुजारा करना भी मुश्किल हो जाता है.
लातूर के मातेफल गांव में बुजुर्गों और दिव्यांगों का कहना है कि नियमित भुगतान न मिलने से उनके लिए रोजमर्रा की जिंदगी चलाना भी एक संघर्ष बन गया है. बुजुर्गों का कहना है कि अब उनमें एक और सूखे का सामना करने की ताकत नहीं बची है.
भूमिहीनों के पास न काम न कमाई
मजदूरों ने कहा कि ऐसी मुसीबतें आने पर किसानों को तो फिर भी फसल खराब होने पर कुछ मुआवजा मिल जाता है. लेकिन भूमिहीन खेत मजदूरों के पास न काम है, न कमाई, न कोई सहारा. महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए 6,728 करोड़ रुपये रखे हैं. लेकिन खेत मजदूरों का कहना है कि कुछ दिनों का रोजगार उन्हें महीनों के इस सूखे से नहीं उबार सकता.
1 करोड़ 4 लाख किसान परेशानमहाराष्ट्र में सूखे ने 1 करोड़ 40 लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसल तबाह कर दी है. वहीं इससे करीब 1 करोड़ 40 लाख किसान इससे प्रभावित हैं. और अब पानी की किल्लत ऐसी है कि किसानों का कहना है, रबी की फसल उगाने का सवाल ही नहीं उठता.
लिहाजा यह संकट सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि इसका असर पूरे भारत पर देखने को मिलेगा, जहां महाराष्ट्र से फसलों की सप्लाई होती है.



