दीवाली पर श्मशान में जलते खप्पर के साथ साधना, भीलवाड़ा में सालों पुरानी कपाल पूजा ने खींचा लोगों का ध्यान

Last Updated:November 07, 2026, 19:14 IST
Bhilwara News: भीलवाड़ा में दिवाली के अवसर पर श्मशान में अनोखी कपाल पूजा की परंपरा देखने को मिलती है. इस विशेष अनुष्ठान में साधक अपने सिर पर जलता हुआ खप्पर रखकर साधना करते हैं और विश्व शांति की कामना करते हैं. जहां देशभर में दिवाली दीपों और आतिशबाजी के साथ मनाई जाती है.
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भीलवाड़ा – रोशनी का महापर्व दिवाली के त्यौहार के मौके पर जहां हर कोई व्यक्ति सुख समृद्धि और घर में लक्ष्मी के कामना के लिए मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते हैं या फिर कोई अनुष्ठान करते हैं लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि शमशान में विश्व में सुख शांति की कामना के लिए विशेष आयोजन किया जाता है भीलवाड़ा में एक ऐसी परंपरा है जो बीते कई सालों से लगतानी भाई जा रही है. भीलवाड़ा शहर के पंचमुखी मोक्ष धाम स्थित मसाणिया भैरवनाथ मंदिर में आधी रात को श्मशान भूमि के बीच विशेष कपाल पूजा और खप्पर साधना की जाती है. इस विशेष पूजा के तहत खप्पर में कपूर, घी, पंचधूप और नारियल सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों से अग्नि प्रज्वलित कर साधक अपने सिर पर रखकर विशेष अनुष्ठान करते हैं.
करीब 20 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में दीपावली से दस दिन पहले ही साधना शुरू हो जाती है. और यह पूजा दिवाली तक की जाती है. इस साधना में खास बात यह है कि जिस श्मशान में दिन में भी जाने में डर लगता है वहां रात में साधक अपने सिर पर खप्पर रखकर कपाल पूजा करते हैं. प्रतिदिन साधक बदलते हैं और अलग-अलग विधियों से पूजा करते हैं. इस अनुष्ठान का उद्देश्य परिवारों की सुख-शांति, बाधाओं से मुक्ति और समूचे प्रदेश व विश्व के कल्याण की कामना करना है.
परिवार में आने वाली बाधाएं दूर होंमंदिर पुजारी रवि खटीक ने LOCAL18 से खास बात करते हुए बताया कि लगभग 20 वर्षों से दीपावली के अवसर पर श्मशान भूमि में कपाल पूजा का यह अनुष्ठान किया जा रहा है. दीपावली पर जहां लोग अपने घरों में दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं वहीं हम श्मशान की इस तपोभूमि पर बैठकर विश्व शांति और सर्वकल्याण के लिए साधना करते हैं. इस अनुष्ठान का उद्देश्य है कि सभी परिवार सकुशल रहें, सभी के जीवन में सुख-शांति बनी रहे और किसी भी परिवार में आने वाली बाधाएं दूर हों.
सुख, शांति एवं खुशहाली की कामना कर रहेदीपावली से लगभग 10 दिन पूर्व विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान और साधनाएं शुरू की जाती हैं. यह जो खप्पर है इसमें कपूर, घी, पंचधूप और नारियल का उपयोग किया जाता है. इसके बाद अंगारों पर धूप देकर कपाल यानी मस्तिष्क के ऊपर रखकर पूजा की जाती है. इसी अनुष्ठान को कपाल पूजा या खप्पर पूजा कहा जाता है. इस साधना में अलग-अलग साधक प्रतिदिन विभिन्न क्रियाएं करते हैं. कोई हाथों में खप्पर लेकर, तो कोई पीठ और सीने पर रखकर साधना करता है. करीब 20 वर्षों से साधक इस परंपरा का निर्वहन करते हुए प्रदेश और पूरे विश्व में सुख, शांति एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Bhilwara,Rajasthan
First Published :
November 07, 2026, 19:02 IST



