धनतेरस पर बदला चांदी की खरीदारी का ट्रेंड, सिक्कों के बजाय हाथी-कछुए की आकृतियों पर बढ़ा रुझान

Last Updated:November 01, 2026, 12:31 IST
Silver Shopping On Dhanteras: धनतेरस पर चांदी की खरीदारी में नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. अब ग्राहक सिक्कों के स्थान पर चांदी के बने हाथी और कछुए की आकृतियों को अधिक पसंद कर रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हाथी को मां लक्ष्मी व स्थिरता और कछुए को भगवान विष्णु के कच्छप अवतार का प्रतीक माना जाता है. वास्तु के अनुसार इन्हें घर में रखना शुभ होता है. कारीगर लोकेश सोनी के अनुसार बाजार में चांदी-पीतल के बर्तनों और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की भी भारी मांग बनी हुई है.
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Jodhpur: धनतेरस पर सदियों से सोने-चांदी के आभूषणों और बर्तनों की खरीदारी की समृद्ध परंपरा चली आ रही है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन अवसर पर नई धातु और बर्तन खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है. पहले के समय में लोग धनतेरस पर मुख्य रूप से चांदी के सिक्के और पारंपरिक बर्तनों की खरीदारी को ही प्राथमिकता देते थे, लेकिन बदलते समय के साथ ग्राहकों की पसंद और खरीदारी का अंदाज भी बदल रहा है. अब धार्मिक आस्था और वास्तु मान्यताओं के चलते लोग पारंपरिक चांदी के सिक्कों के साथ-साथ विशेष आकृतियों को अत्यधिक पसंद कर रहे हैं. इस बार बाजार में चांदी से बने हाथी और कछुए ग्राहकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं. इसके अलावा रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और चांदी व पीतल के बर्तनों की मांग भी लगातार बनी हुई है.
धनतेरस पर चांदी की खरीदारी को लेकर इस बार सर्राफा बाजार में एक नया और अनोखा रुझान देखने को मिल रहा है. पहले जहां ग्राहक केवल चांदी के सिक्के खरीदकर खरीदारी की रस्म निभाते थे, वहीं अब चांदी से तैयार विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आकृतियों की ओर उनका झुकाव बढ़ा है. चांदी के हाथी, कछुए, लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्तियां और नवीन डिजाइन वाले आकर्षक उत्पाद ग्राहकों को बेहद भा रहे हैं. खास बात यह है कि लोग इन उत्पादों को केवल निवेश या धातु की खरीदारी के नजरिए से नहीं, बल्कि अपने घर में शुभता, शांति और समृद्धि के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं.
हाथी और कछुए का धार्मिक एवं वास्तु महत्व
बरसों से चांदी के आभूषण और विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने वाले कारीगर लोकेश सोनी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं में हाथी को धन की देवी मां लक्ष्मी, ऐश्वर्य, शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से चांदी से निर्मित हाथी की आकृतियों को लोग अति शुभ मानते हुए खरीद रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, चांदी के कछुए को भगवान विष्णु के ‘कच्छप अवतार’ और मां लक्ष्मी के आगमन से जोड़कर देखा जाता है. वास्तुशास्त्र की मान्यताओं के अनुसार चांदी के कछुए को घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान की उत्तर दिशा में रखना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है. इन्हीं मान्यताओं के चलते इस धनतेरस पर इन दोनों आकृतियों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है.
चांदी और पीतल के बर्तनों की परंपरा भी बरकरार
धनतेरस पर चांदी और पीतल के बर्तन खरीदने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी पूरी तरह कायम है. ग्राहक इन धातुओं को आरोग्य, पवित्रता और संपन्नता का प्रतीक मानते हुए बर्तनों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं. इसके साथ ही मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आकृति वाले चांदी के सिक्कों तथा मूर्तियों की मांग भी बाजार में बनी हुई है. सर्राफा बाजार में ग्राहकों की पसंद में आए इस बदलाव से यह साफ नजर आ रहा है कि अब धनतेरस की खरीदारी केवल धातु और उसकी बाजार कीमत तक सीमित नहीं रह गई है. लोग उत्पादों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं, वास्तुशास्त्र और शुभ प्रतीकों को भी पूरा महत्व दे रहे हैं. इस तरह परंपरागत चांदी के सिक्कों से शुरू हुई खरीदारी अब आस्था और समृद्धि से जुड़ी विभिन्न कलात्मक आकृतियों तक पहुंच गई है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
November 01, 2026, 12:31 IST



