नाथद्वारा में अन्नकूट महोत्सव की धूम, सजी-धजी गायों की सवारी बनेगी आकर्षण, जानें क्या है खास परंपरा

Last Updated:November 03, 2026, 13:02 IST
Annakut Festival Nathdwara: नाथद्वारा में दिवाली के दूसरे दिन आयोजित होने वाला अन्नकूट महोत्सव मेवाड़ की सबसे अनूठी धार्मिक परंपराओं में से एक है.बताया जाता है कि जब भगवान श्रीनाथजी नाथद्वारा पधारे थे, तभी से इस परंपरा की शुरुआत हुई थी.इस दिन भगवान को 56 तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है.इसके बाद इस भोग को पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण पहुंचते हैं.
मेवाड़ में आज भी कई ऐसी परंपराएं हैं, जिनका निर्वाह सदियों से किया जा रहा है. इन परंपराओं की खास बात यह है कि समय के साथ इनका महत्व कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है.ऐसी ही एक अनूठी परंपरा राजसमंद जिले के नाथद्वारा में देखने को मिलती है.यहां दिवाली के दूसरे दिन अकोट महोत्सव का आयोजन किया जाता है. बताया जाता है कि जब भगवान श्रीनाथजी नाथद्वारा पधारे थे, तभी से इस खास परंपरा की शुरुआत हुई थी. आज भी मंदिर नगरी में इस परंपरा को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया जाता है.
अन्नकूट महोत्सव की सबसे खास बात इसमें भगवान श्रीनाथजी को लगाया जाने वाला 56 भोग है. इस दौरान भगवान को अलग-अलग तरह के पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है.इसके बाद इस प्रसाद को पाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता और परंपरा के अनुसार लोग इस भोग को लूटने के लिए उत्साह के साथ जुटते हैं. इस पूरे आयोजन का नजारा अपने आप में खास होता है.श्रद्धालुओं की भीड़, धार्मिक उत्साह और भगवान के प्रति आस्था इस महोत्सव को अलग पहचान देते हैं.
इस महोत्सव को देखने के लिए अब सिर्फ मेवाड़ ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग नाथद्वारा पहुंचते हैं.खास बात यह है कि विदेशी पर्यटकों के बीच भी इस आयोजन को लेकर आकर्षण बढ़ा है.हजारों की संख्या में लोग इस अनूठी परंपरा को अपनी आंखों से देखने के लिए पहुंचते हैं.उनके लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मेवाड़ की सदियों पुरानी संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर भी होता है.
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साथ यहां आयोजित होने वाला ग्वाल महोत्सव भी अपने आप में बेहद खास है. इस दौरान गौशाला में गायों को अलग-अलग तरीके से सजाया जाता है. उनके शरीर पर आकर्षक रंगों और पारंपरिक सजावट के जरिए उन्हें सुंदर रूप दिया जाता है.इसके बाद सजी-धजी गायों की सवारी नाथद्वारा की गलियों से होकर गुजरती है. जब ये गायें सजकर शहर की सड़कों से निकलती हैं तो स्थानीय लोगों से लेकर पर्यटकों तक की नजरें उन पर टिक जाती हैं.पूरा माहौल उत्सव और उल्लास से भर जाता है.
ग्वाल महोत्सव के पीछे गायों के प्रति सम्मान और मेवाड़ की धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है. इस आयोजन में गायों को केवल सजाया ही नहीं जाता, बल्कि उनके प्रति श्रद्धा और सेवा भाव भी दिखाई देता है.स्थानीय लोग इस परंपरा से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि हर साल इस आयोजन का इंतजार किया जाता है.खासकर बच्चों और परिवारों के लिए सजी हुई गायों को देखना आकर्षण का केंद्र रहता है.
नाथद्वारा में अन्नकूट और ग्वाल महोत्सव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.गौशाला में गायों को सजाने का काम शुरू हो चुका है.वहीं मंदिर मंडल की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं. बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आयोजन को व्यवस्थित बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है. हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं में इस महोत्सव को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है.
नाथद्वारा का अन्नकूट महोत्सव और ग्वाल महोत्सव मेवाड़ की उस सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं, जो आज भी अपनी पुरानी परंपराओं को सहेजे हुए है.एक ओर भगवान श्रीनाथजी के भोग के दर्शन और प्रसाद पाने की आस्था है, तो दूसरी ओर सजी-धजी गायों की अनूठी सवारी का आकर्षण.यही दोनों आयोजन दिवाली के दूसरे दिन नाथद्वारा को खास बना देते हैं और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को मेवाड़ की संस्कृति से रूबरू कराते हैं.
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November 03, 2026, 13:02 IST



