नीम पर चढ़ी गिलोय सबसे गुणकारी, अमृता कहलाती है ये लता, इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर

Last Updated:September 14, 2026, 12:03 IST
Neem Giloy Benefits: आयुर्वेद में गिलोय को एक अत्यंत गुणकारी और स्वास्थ्य वर्धक जड़ी बूटी माना गया है. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता हो या रक्त में शर्करा की अधिकता, गिलोय के सेवन से इनमें सुधार होता है और इंसान को निरोग होकर जीने का मौका मिलता है. बात यदि नीम के पेड़ से लगे गिलोय की कि जाए तो, आयुर्वेद में इसे सबसे ज्यादा गुणकारी और असरदार माना गया है.
गौर करने वाली बात यह है कि ज़िले के वन वर्ती क्षेत्रों में ऐसे कई नीम के पेड़ हैं. जिनपर गिलोय की लताओं का कब्ज़ा है. अर्थात गिलोय ने नीम के गुण को अपने अंदर समा लिया है. इस लेख में हम आपको इसी विषय पर कुछ खास जानकारी दे रहे हैं.
करीब एक दशक से मेडिसिनल प्लांट्स पर कार्य कर रहे एक्सपर्ट रविकांत पांडे बताते हैं कि गिलोय एक ऐसी लता है जो कभी भी सूखती नहीं है. हिंदी में इसे गुडुची के नाम से भी जाना जाता है.
यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली एक जड़ी बूटी है, जिसे अक्सर अमृतावली भी कहा जाता है.आश्चर्य की बात यह है कि इसकी लताएं जिस औषधीय पेड़ पर चढ़ती हैं उसके गुणों को भी खुद में मिला लेती हैं.
Add as Preferred Source on Google
यदि गिलोय की लताएं नीम के पेड़ पर चढ़ी हैं, तो उनमें नीम के गुण भी समाहित हो जाएंगे. मजे की बात यह है कि इंसान यदि इसके काढ़े का सेवन करता है, तो उसे अनगिनत स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से बढ़ाकर संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाएगा.
इतना ही नहीं, यदि नीम के संपर्क में रहने वाले गिलोय का अर्ख बनाकर नियमित रूप से सेवन किया जाए, तो डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और पुराने वायरल बुखार जैसी कई समस्याओं से प्रमाणित लाभ मिल सकता है.
बकौल रविकांत, कुछ स्टडी में इस बात की भी जानकारी मिली है कि ये एक दूसरे से कई पोषक तत्व लेते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ साथ एंटीफंगल और एंटी बैक्टिरियल का काम भी करते हैं.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :
September 14, 2026, 12:03 IST



