न इजाजत दी थी और न ही इसे नामंजूर किया… फॉर्म-6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट की 2 टूक

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न इजाजत दी थी, न ही नामंजूर किया… फॉर्म-6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट की 2 टूक
Last Updated:October 12, 2026, 15:56 IST
Supreme Court SIR Hearing Today: बिहार एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने नए फॉर्म-6 पर कोई न्यायिक फैसला नहीं दिया है. जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि फैसला सुनाते समय यह फॉर्म अदालत के सामने था ही नहीं, इसलिए इसे न तो मंजूरी दी गई और न ही नामंजूर किया गया. इस बीच, फॉर्म-6 विवाद को लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार को पक्षकार बनाते हुए एक नई PIL दाखिल की गई है. CJI सूर्यकांत ने शब्दों को तोड़-मरोड़कर खबरें न छापने की सख्त हिदायत दी है.सुप्रीम कोर्ट में आज बिहार SIR पर सुनवाई हुई.
बिहार SIR और वोटर लिस्ट को लेकर चल रहा सीन अब एकदम नेक्स्ट लेवल पर पहुंच चुका है. फॉर्म-6 पर मचे बवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अपनी बात एकदम क्रिस्टल क्लियर कर दी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने साफ-साफ कह दिया कि भई, हमने नए फॉर्म-6 को ना तो कोई ग्रीन सिग्नल दिया है और ना ही इसे रिजेक्ट किया है. जस्टिस बागची ने याद दिलाया कि जब बिहार SIR का फैसला आया था, तब यह नया फॉर्म एग्जिस्ट ही नहीं करता था. वहीं, CJI सूर्यकांत ने मीडिया और वकीलों को साफ वॉर्निंग दी कि चटपटी खबरें बनाने के लिए कोर्ट के शब्दों के साथ खेलना बंद करो. इसी बीच, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को पार्टी बनाते हुए कोर्ट में एक नई PIL भी ठोक दी गई है, जिसने ECI के दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.
‘खबरें छापने के लिए शब्दों के साथ खेलना बंद करो’सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने मामले पर एकदम दो टूक बात रखी. CJI सूर्यकांत ने मीडिया और वकीलों को तगड़ी फटकार लगाते हुए कहा, “कृपया सनसनीखेज खबरें बनाने के लिए अदालत के शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश न करें.” मामला तब गरमाया जब फॉर्म-6 विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक फ्रेश पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) ठोक दी गई. इस नई याचिका में सीधे तौर पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार को पार्टी बना दिया गया है. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि 5 अक्टूबर को अदालत ने खुद यह बात साफ की थी कि फॉर्म-6 को कोर्ट का ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है, लेकिन इसके बावजूद इलेक्शन कमीशन (ECI) की तरफ से यह नैरेटिव सेट किया जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर मुहर लगा दी है.
जस्टिस बागची का बड़ा क्लेरिफिकेशनइस पूरे कन्फ्यूजन पर पानी डालते हुए जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने साफ-साफ कहा, “नए फॉर्म-6 पर कोई भी न्यायिक फैसला नहीं हुआ है. जब बिहार SIR का फैसला सुनाया गया था, तब नया फॉर्म-6 एग्जिस्ट ही नहीं करता था. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे अप्रूव या डिसअप्रूव कर दिया है.”
मतलब साफ है कि फॉर्म-6 की वैलिडिटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर जो खेल खेला जा रहा था, उस पर कोर्ट ने पानी फेर दिया है. अब देखना यह है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग इस नई PIL के जवाब में क्या स्टैंड लेते हैं, क्योंकि मामला अब और ज्यादा इंटरेस्टिंग हो गया है.
About the AuthorSandeep GuptaChief Sub Editor
पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
October 12, 2026, 15:50 IST



