चंबल के बीहड़ों में ऐसा कौन-सा मंदिर था, जहां डकैत भी सिर झुकाकर मांगते थे माता का आशीर्वाद? जानें

Last Updated:October 12, 2026, 15:44 IST
Dholpur Budhwa Maiya Mandir: कभी चंबल के घने बीहड़ो में डकैतों की गोलियों की तड़तडाहट की आवाज गूंजती थी पर चंबल के घने बीहड़ो एक स्थान ऐसा भी था जहां डकैत सिर्फ अपनी आराध्य देवी बुढ़वा माता की पूजा करते थे वहां गोलियों की आवाज नहीं वहां पर सिर्फ माता रानी के घंटा और झालर की आवाज गूंजती थी।
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धौलपुर: कभी चंबल के घने बीहड़ों में डकैतों की गोलियों की आवाज गूंजती थी. लेकिन इन्हीं बीहड़ों में एक ऐसा स्थान भी था, जहां बंदूकों की आवाज नहीं, बल्कि मंदिर की घंटियों और झालरों की गूंज सुनाई देती थी. यह स्थान धौलपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर नीम बसई गांव की पहाड़ी पर स्थित बुढ़वा माता जी का प्राचीन मंदिर है. मान्यता है कि माता के दरबार में झूठी कसम खाने वाले को दंड मिलता है. इसी विश्वास के कारण कभी चंबल के दस्युओं के बीच भी माता के प्रति गहरी आस्था थी.
स्थानीय निवासी भूपेंद्र सिंह फौजी बताते हैं कि वह बचपन से ही बुढ़वा माताजी के दर्शन करने आ रहे हैं. यह मंदिर लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि माता के दरबार में कोई झूठी कसम नहीं खाता. पुराने समय में चंबल के बीहड़ों में रहने वाले बागी और दस्यु भी यहां दर्शन करने आते थे. वे माता को अपनी आराध्य देवी मानते थे और मंदिर में घंटा-झालर चढ़ाते थे. दस्यु माता के सामने झूठी कसम खाने से डरते थे. यही विश्वास पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के बीच बना रहा. आज भी दूर-दराज के गांवों से श्रद्धालु बुढ़वा माता के दर्शन करने पहुंचते हैं और मंदिर में माथा टेककर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं.
चंबल के बीहड़ों से होकर नदी पार करनीभूपेंद्र सिंह फौजी ने बताया अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान क्रांतिकारी तात्या टोपे भी इस मंदिर में आए थे. बताया जाता है कि उस समय उन्हें चंबल के बीहड़ों से होकर नदी पार करनी थी. मंदिर के महंत भगवान दास जी महाराज ने उन्हें बीहड़ों और चंबल नदी को पार कराने में मदद की थी.
नवरात्र के दिनों में बुढ़वा मैया के दर्शन और पूजा-अर्चना नवरात्र के दिनों में बुढ़वा मैया के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने का रास्ता और चारों ओर फैले चंबल के बीहड़ यहां के माहौल को अलग पहचान देते हैं.
घंटा-झालर की आवाज श्रद्धालुओं की आस्था को दर्शाती बुढ़वा मैया का यह मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थान नहीं है, बल्कि चंबल के पुराने जनजीवन, दस्यु इतिहास और लोक आस्था से जुड़ी विरासत भी है. कभी जिस इलाके की पहचान डकैतों और बंदूकों से होती थी, उसी इलाके में आज भी माता के जयकारे और घंटा-झालर की आवाज श्रद्धालुओं की आस्था को दर्शाती है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
October 12, 2026, 15:44 IST



