पाली की किन्नर आशा कुंवर ने 30 से अधिक गरीब बेटियों का कराया कन्यादान, मां की तरह निभा रहीं जिम्मेदारी

पाली. जब-जब किसी घर में शहनाई बजती है या किलकारी गूंजती है, तो किन्नर दुआएं देने पहुंचते हैं और बदले में खुशियों का नेग लेते हैं. लेकिन राजस्थान के पाली जिले से इंसानियत और सामाजिक सरोकार की एक ऐसी मिसाल सामने आती रही है, जो दिल छू लेती है. पाली की किन्नर गादीपति आशा कुंवर दुआओं में मिले इसी नेग की एक-एक पाई से बेसहारा और गरीब बेटियों की जिंदगी रोशन कर रही हैं.
वे न सिर्फ एक-दो, बल्कि अब तक 30 से अधिक जरूरतमंद बेटियों का धूमधाम से कन्यादान कर चुकी हैं और मां का पूरा फर्ज निभा रही हैं. समाज को दिशा देने वाली यह अनोखी गादीपति सिर्फ बेटियों का विवाह ही नहीं करवातीं, बल्कि असहाय परिवारों के राशन से लेकर संतों के आश्रम तक के लिए दिल खोलकर दान-पुण्य करने से पीछे नहीं हटती हैं.
दुआओं के नेग से बेटियों का कन्यादान
पाली की किन्नर हवेली की गादीपति आशा कुंवर ने समाज के सामने इंसानियत का बड़ा उदाहरण पेश किया है. नाच-गाकर दुआओं के बदले जो नेग उन्हें मिलता है, उसे वे गरीब और बेसहारा बेटियों का घर बसाने में लुटा देती हैं. आशा कुंवर अब तक 30 बेटियों की मां बनकर उनका कन्यादान कर चुकी हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने एक बेटे का विवाह करवाया है और एक बेसहारा परिवार को पक्का मकान तक बनाकर दिया है.
गुरु की प्रेरणा और मां जैसी अटूट जिम्मेदारीगादीपति आशा कुंवर बताती हैं कि उन्हें यह प्रेरणा अपनी गुरु कमला बाई से मिली. गुरु ने कहा था कि ‘जिन गरीब बेटियों का कोई नहीं होता, उनका ध्यान हमें रखना चाहिए.’ आशा कुंवर बेटियों की शादी करवाकर सिर्फ औपचारिकता पूरी नहीं करतीं, बल्कि ताउम्र एक असली मां की तरह उनका ख्याल रखती हैं. शादी के बाद बेटी के पहले प्रसव का सारा जिम्मा उठाना, ससुराल से लगातार संपर्क रखना और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई सिखाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है. बेटियां भी अपने मायके की तरह सबसे पहले आशा कुंवर से ही मिलने आती हैं.
हवेली में निभाई जाती हैं शादी की सभी रस्मेंजिन बेटियों की शादी का बीड़ा किन्नर हवेली उठाती है, उनकी तमाम रस्में किसी अमीर परिवार की तरह पूरी की जाती हैं. हवेली को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है. पाट बैठाने, हल्दी-मेहंदी से लेकर महिला संगीत और बारात के स्वागत तक की सभी जिम्मेदारी अभिभावक बनकर निभाई जाती है. विवाह में बेटी को घरेलू सामग्री के साथ सवा पांच तोला सोना, 25 तोला चांदी, फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन, 14 जोड़ी कपड़े और ससुराल वालों के लिए 32 जोड़ी कपड़े भेंट किए जाते हैं.
धर्म-पुत्र संत किशनगिरी के आश्रम के लिए दी जमीनसामाजिक सरोकार के साथ-साथ धर्म-कर्म में भी आशा कुंवर सबसे आगे हैं. उन्होंने अपने धर्म पुत्र संत किशनगिरी महाराज के अखाड़े ‘श्री गुरु दत्तात्रेय आश्रम’ के निर्माण के लिए 8 लाख रुपये की लागत से एक बीघा 7 बिस्वा जमीन खरीदकर भेंट की है. गोल निम्बाड़ा शनिधाम के पास स्थित इस जमीन पर आश्रम का भूमि पूजन खुद आशा कुंवर ने किया. यह पाली का पहला ऐसा आश्रम होगा, जहां जूना अखाड़े से जुड़े संत विराजेंगे.
राशन किट से लेकर कोरोना काल तक निरंतर सेवा कार्यआशा कुंवर के हाथ सिर्फ नेग लेने के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए उठते हैं. कोरोना महामारी के कठिन समय में उन्होंने बड़े पैमाने पर जरूरतमंदों को भोजन किट बांटे थे. इस सिलसिले को बरकरार रखते हुए वे आज भी सामाजिक सरोकार के तहत हर महीने लगभग 100 गरीब और बेसहारा परिवारों को सूखा राशन किट उपलब्ध कराती हैं.



