पाली में गहराया जल संकट, ‘जूना मालारी’ बांध सूखा, पानी की तलाश में आबादी की ओर रूख कर सकते हैं वन्यजीव

Last Updated:August 31, 2026, 06:31 IST
Pali-Godwar Rainfall Deficit: पाली के गोडवाड़ अंचल में इस बार सावन में बारिश की कमी ने खेती, पेयजल और वन्यजीवों की चिंता बढ़ा दी है. देसूरी क्षेत्र में अब तक करीब 277 मिमी और पूरे गोडवाड़ अंचल में 277 से 295 मिमी बारिश दर्ज हुई है, लेकिन नदी-नालों में पर्याप्त पानी नहीं आया. जूना मालारी बांध पूरी तरह सूख चुका है, जबकि कई प्राकृतिक जलस्रोत भी सूखने की कगार पर हैं. इसका असर कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादड़ी और देसूरी रेंज में भी दिख रहा है, जहां प्राकृतिक और कृत्रिम वाटरहोल में पानी लगातार घट रहा है. पानी की तलाश में वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने से मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ सकता है. जानकारों के अनुसार पिछले साल बचे पानी का सावधानी से उपयोग किया जाए तो जनवरी-फरवरी तक पेयजल आपूर्ति संभाली जा सकती है, लेकिन इसके बाद संकट गहरा सकता है.
सावन का महीना खत्म हो चुका है लेकिन पाली जिले के गोडवाड़ अंचल में इस बार बादलों की बेरुखी ने सभी की चिंता बढ़ा दी है. बारिश की भारी कमी के कारण अब खेती, पीने के पानी और कुंभलगढ़ अभयारण्य के वन्यजीवों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा होता नजर आ रहा है. गोडवाड़ अंचल में इस बार सावन में कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खेती, पेयजल और वन्यजीवों के प्राकृतिक जलस्रोतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. देसूरी क्षेत्र की बात की जाए तो यहां पर अब तक लगभग 277 मिमी और पूरे गोडवाड़ अंचल में 277 से 295 मिमी बारिश हुई है. इसके बावजूद, नदी-नालों में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हुई है, जिससे बांधों और प्राकृतिक जलस्रोतों का जलस्तर लगातार घट रहा है. जिससे आगे जाकर परेशानी का सामना करना पड सकता है.
बारिश होने के बावजूद नदी-नालों में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हुई है, जिससे बांधों और प्राकृतिक जलस्रोतों का जलस्तर लगातार घट रहा है. जिससे आगे जाकर परेशानी का सामना करना पड सकता है. जूना मालारी बांध पूरी तरह सूख चुका है, और कई छोटे प्राकृतिक जलस्रोत भी सूखने की कगार पर हैं. कुछ स्थानों पर तो पानी सतह तक भी नहीं पहुंच पाया है. यदि पिछले वर्ष के बचे हुए पानी का सावधानी से उपयोग किया जाए, तो जनवरी-फरवरी तक पेयजल आपूर्ति संभव हो सकती है. जिसके चलते गर्मियों में पेयजल आपूर्ति के संकट की आशंका बनी हुई है.
कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादड़ी और देसूरी रेंज में बारिश की कमी का असर अब वन्यजीवों के जलस्रोतों पर दिखने लगा है. प्राकृतिक और कृत्रिम वाटरहोल में पानी लगातार कम हो रहा है और कई स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. ऐसे में वन्यजीवों के सामने प्यास बुझाने का संकट खड़ा हो गया है. वन विभाग के लिए भीषण गर्मी और कम बारिश के बीच अभयारण्य में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है.
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बारिश और प्राकृतिक जलस्रोतों में कमी के कारण वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों की ओर आने का खतरा बढ़ गया है. पानी और भोजन की तलाश में जानवर जंगल से बाहर निकल सकते हैं, जिससे ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ने की आशंका है. मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती हैं. विशेषज्ञ इसे बड़े खतरे का संकेत मान रहे हैं.
गोडवाड़ अंचल और देसूरी क्षेत्र में इस सीजन में अब तक औसतन महज 277 से 295 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है. कम बारिश के कारण क्षेत्र के नदी-नाले खाली पड़े हैं और जलस्रोत सूख रहे हैं. चिंता की बात यह है कि उपखंड का ‘जूना मालारी’ बांध पूरी तरह सूख चुका है. जानकारों के मुताबिक, अगर पिछले साल के बचे पानी का सही इस्तेमाल किया जाए, तो जनवरी-फरवरी तक पानी चल सकता है, लेकिन उसके बाद भयंकर पेयजल संकट की स्थिति बन सकती है.
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August 31, 2026, 06:31 IST



