पुष्कर में सुधाबाई के गया कुंड में पिंडदान से मिलता है गया जी के समान फल, दूर दराज से पहुंच रहें है श्रद्धालु

Last Updated:September 28, 2026, 18:47 IST
Pitrapaksh Me kaha Jana Chahiye: पितृपक्ष में अजमेर के पुष्कर स्थित सुधाबाई तीर्थ के गया कुंड में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. लोग अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य कर रहे हैं. पुजारी ईश्वर लाल पाराशर बताते हैं कि सुधाबाई का गया कुंड पौराणिक तीर्थ के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है.
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अजमेर. पितृपक्ष में अपने पूर्वजों को याद कर उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसी धार्मिक आस्था के चलते अजमेर जिले के पुष्कर क्षेत्र स्थित प्राचीन सुधाबाई तीर्थ के गया कुंड में इन दिनों श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है. दूर-दराज से आने वाले यात्री यहां अपने पितरों की तृप्ति और संतुष्टि के लिए विधि-विधान से पिंडदान, तर्पण सहित अन्य धार्मिक क्रियाएं कर रहे हैं. मान्यता है कि पवित्र तीर्थों पर किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
पुजारी ईश्वर लाल पाराशर बताते हैं कि सुधाबाई का गया कुंड पौराणिक तीर्थ के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीरामचंद्र जी ने भी अपने पिता राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था. यहां आने वाले श्रद्धालु गया जी की तरह ही पिंडदान और तर्पण की धार्मिक क्रियाएं करते हैं.
स्नान, दान-पुण्य और तर्पण के लिए दिनभर पहुंचते हैं श्रद्धालु
पुजारी आगे बताते हैं कि श्राद्ध पक्ष के दौरान गया जी, गंगा जी, पुष्कर राज सहित विभिन्न तीर्थ स्थलों पर पितरों के निमित्त धार्मिक क्रियाएं करने की परंपरा है. इसी क्रम में सुधाबाई तीर्थ के गया कुंड में भी दिनभर श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. यहां स्नान करने के साथ पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य किया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तीर्थ में स्नान और पूजा-अर्चना करने से विभिन्न प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है.
चौथ और मंगलवार को लगता है मेला, प्राचीन तीर्थ के दर्शन की अपीलसुधाबाई का गया कुंड प्राचीन धार्मिक स्थल होने के साथ स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष आस्था का केंद्र है. यहां चौथ और मंगलवार, शुक्ल पक्ष के अवसर पर मेला भी आयोजित होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. वर्तमान में पितृपक्ष होने के कारण तीर्थ परिसर में पिंडदान और तर्पण की गतिविधियां लगातार चल रही हैं. पंडित ईश्वर लाल पाराशर ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे तीर्थ पर पहुंचकर दर्शन-पूजन करें और अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण एवं दान-पुण्य जैसे सत्कर्म जरूर करें.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Ajmer,Ajmer,Rajasthan
First Published :
September 28, 2026, 18:47 IST



