पूर्व मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, जल जीवन मिशन घोटाला मामले में मिली जमानत

राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने राजस्थान पुलिस की एसीबी द्वारा दर्ज मामले में उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है. इस मामले में एक अन्य आरोपी को भी जमानत दी गई है.
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने महेश जोशी की स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. मामले में करीब तीन दिन पहले सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद महेश जोशी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्हें इस मामले में राहत मिली है.
कोर्ट ने पहले सुरक्षित रखा था फैसला
पिछले दिनों दोनों पक्षों की लंबी और तीखी बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज अदालत ने फैसला सुनाते हुए महेश जोशी की स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) मंजूर कर ली. इसके बाद उन्हें रेगुलर जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया है.
महेश जोशी को इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जेल जाना पड़ा था. इस मामले में करीब 7 महीने हिरासत में रहने के बाद 3 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी थी. उस समय अदालत ने उनकी लंबी हिरासत और उम्र पर भी विचार किया था.
7 मई 2026 को ACB ने दोबारा किया था गिरफ्तार
ईडी मामले में जमानत मिलने के कुछ महीनों बाद ही 7 मई 2026 को राजस्थान एसीबी ने महेश जोशी को जयपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया था. यह गिरफ्तारी 900 करोड़ रुपये से अधिक के कथित टेंडर आवंटन घोटाले और रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में हुई थी.
इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से ही महेश जोशी हिरासत में थे. अब सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है. हालांकि, जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है. मामले की कानूनी कार्यवाही आगे जारी रहेगी.
क्या है जल जीवन मिशन योजना ?
राजस्थान में हर घर तक नल से शुद्ध पीने का पानी पहुंचाने के लिए शुरू की गई जल जीवन मिशन योजना कभी आम जनता के लिए वरदान साबित होनी थी. लेकिन यह राज्य के इतिहास का सबसे बड़े भ्रष्टाचार घोटाला का शिकार होती नजर आ रही है. केंद्र और राज्य सरकार की तिजोरी से इस नेक काम के लिए हजारों करोड़ रुपये का बजट जारी किया था.
आरोप हैं कि फर्जी दस्तावेजों का खेल खेलकर अपने चहेते और दलाल ठेकेदारों को पानी के ठेके बांट दिए गए. साथ ही घटिया सामग्री का इस्तेमाल होने की बात भी सामने आई है. जनता को शुद्ध पानी मिलने के बजाय, जमीनी स्तर पर घटिया पाइप और पाइपलाइन बिछाने में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया.
आरोप तो ये भी हैं कि इस पूरे खेल में अधिकारियों, बिचौलियों और बड़े राजनीतिक चेहरों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की भारी-भरकम रिश्वत और कमीशनखोरी का काला कारोबार चला था. इस सनसनीखेज भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ने के लिए देश की दो सबसे बड़ी जांच एजेंसियां ईडी और राजस्थान एसीबी मैदान में उतरीं और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां कीं.



