Rajasthan

फैंसी कपड़ों को छोड़ खादी की ओर लौटे जयपुरवासी, 50% छूट ने बढ़ाई खरीदारी, जानें पहनने के खास फायदे

Last Updated:October 02, 2026, 12:31 IST

Ground Report On Khadi Clothes Benefits: गांधी जयंती पर जयपुर के खादी भंडारों में 50% छूट के चलते ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. लोग सिर्फ देशभक्ति ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ और आराम के लिए भी खादी को चुन रहे हैं. खादी मौसम के अनुकूल होती है. गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट देती है. इसके उपयोग से बुनकरों को सीधा रोजगार मिलता है. दुकानदारों के अनुसार, सिंथेटिक कपड़ों के बजाय अब खादी की मांग तेजी से बढ़ रही है. असली खादी की पहचान उसके हॉलमार्क से होती है. यह बापू के आत्मनिर्भरता के संदेश को जीवित रखे हुए है.

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जयपुर. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर गुलाबी शहर जयपुर के खादी भंडारों में खरीदारों की भारी भीड़ नजर आ रही है. इस बार सरकार ने खादी के कपड़ों पर 50 प्रतिशत की विशेष छूट का ऐलान किया है, जिसके चलते दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों का तांता लगा हुआ है. खादी को लेकर आम जनता, खासकर युवाओं का रुझान एक बार फिर से तेजी से बढ़ रहा है. ग्राहक अब न केवल देशभक्ति और अपनी पुरानी परंपरा से जुड़े भाव के कारण खादी को अपना रहे हैं, बल्कि इससे होने वाले स्वास्थ्य लाभ को भी इसकी एक प्रमुख वजह मान रहे हैं. बाजार में फैंसी कपड़ों की भरमार है, लेकिन लोग खादी की अहमियत को समझकर वापस अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं.

खादी भंडार पर खरीदारी करने आए एक ग्राहक तेजपाल नारायण कुलरिया ने बताया कि खादी के कपड़े मानव शरीर के लिए सबसे उपयुक्त और आरामदायक होते हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खादी का कपड़ा पूरी तरह से सूत से तैयार होता है, जिससे त्वचा को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता. तेजपाल ने आगे बताया कि खादी का उपयोग करने से देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले बुनकरों और कारीगरों को रोजगार मिलता है. ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने का यह सबसे बेहतरीन तरीका है. उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाले फैंसी और सिंथेटिक कपड़े भले ही सस्ते दामों पर आसानी से मिल जाते हों, लेकिन लंबे समय तक उनका इस्तेमाल करने से शरीर और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है. वहीं, खादी शरीर को हमेशा आराम और ताजगी का एहसास कराती है.

मौसम के अनुकूल ढल जाती है खादीदुकान पर मौजूद एक अन्य ग्राहक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह पिछले 15 सालों से नियमित रूप से खादी के कपड़े ही पहन रहे हैं. उनके अनुसार खादी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मौसम के मिजाज के अनुसार खुद को ढाल लेती है. तेज गर्मियों में जहां यह शरीर को ठंडक और राहत देती है, वहीं सर्दियों की कड़ाके की ठंड में यह गर्माहट बनाए रखती है. उन्होंने राष्ट्रपिता को याद करते हुए बताया कि महात्मा गांधी ने चरखे से धागा कातकर जिस खादी परंपरा की शुरुआत की थी, वह आज भी हमारे समाज में गहराई तक रची-बसी है. बीच के कुछ सालों में भले ही खादी की लोकप्रियता में थोड़ी कमी देखी गई थी, लेकिन अब लोगों में, खासकर नई पीढ़ी में इसका आकर्षण बहुत तेजी से बढ़ रहा है.

दुकानदारों के चेहरे पर भी लौटी मुस्कानजयपुर में पिछले 15 सालों से खादी के कपड़े बेच रहे दुकानदार मांगीलाल कुमावत ने जानकारी दी कि पिछले कुछ वर्षों में खादी की मांग में लगातार भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि लोग अब सिंथेटिक और फैंसी कपड़ों की बजाय वापस खादी की ओर लौट रहे हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि लोगों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी है और वे समझ गए हैं कि खादी टिकाऊ होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी अच्छी है. मांगीलाल ने ग्राहकों को सलाह देते हुए बताया कि खादी की असली पहचान उस पर लगे हॉलमार्क से की जा सकती है. यह हॉलमार्क खादी की प्रामाणिकता और शुद्धता को सुनिश्चित करता है.

छूट और आत्मनिर्भरता का संदेशगांधी जयंती जैसे राष्ट्रीय पर्व और विशेष अवसरों पर खादी भंडारों द्वारा दी जाने वाली छूट से ग्राहक और भी ज्यादा आकर्षित होते हैं. दुकानदारों का साफ कहना है कि इस बार बिक्री में पिछले सालों की तुलना में काफी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है. वहीं, ग्राहकों का भी यही मानना है कि खादी के कपड़े पहनना न केवल स्वास्थ्य, सुविधा और फैशन के लिहाज से लाभकारी है, बल्कि यह महात्मा गांधी के आत्मनिर्भरता के विचारों और स्वदेशी की भावना को भी आज के समय में जीवित रखता है. बापू का यह स्वदेशी मंत्र आज भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

October 02, 2026, 12:31 IST

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